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नोटबंदी-GST इंपैक्ट: कर्मचारियों को गाड़ी-फ्लैट देने वाले गुजराती कारोबारी इस बार बोनस भी नहीं दे पाए

अहमदाबाद, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिमामंडित करके शुरू की गई नोटबंदी और जीएसटी योजना अाधी-अधूरी तैयारियों की वजह से व्यापारियों और जनसामान्य के लिए तकलीफदेह ही साबित हुई हैं। गाहे-बगाहे कोई ना कोई ऐसी खबर आ ही जाती है जिसमें नोटबंदी और जीएसटी की व्यापारियों पर पड़ी मार साफ दिखाई पड़ती है।

गुजरात के व्यापारियों के साथ दिक्कत ये है कि वो अपना दर्द भी ढंग से बयां नहीं कर सकते क्योंकि नोटबंदी औऱ जीएसटी के विरोध में बोलते ही एक तो वो राज्य की बीजेपी सरकार के निशाने पर आ जाएंगे दूसरा विरोध करते ही वो देशद्रोही करार दे दिए जाएंगे।

पिछले साल दिवाली पर अपने कर्मचारियों को 400 फ्लैट और एक हजार कारें गिफ्ट करके चर्चा में आए सूरत के हीरा व्यापारी शावजी ढोलकिया ने इस साल कोई तोहफा नहीं दिया। लेकिन वो इसका कारण भी बयां नहीं कर पा रहे हैं।

लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि नोटबंदी, जीएसटी और विभिन्न आर्थिक एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई के चलते गुजरात के कारोबारी आर्थिक दबाव में हैं। हालांकि ढोलकिया ने अपने फैसले के पीछे नोटबंदी या जीएसटी को वजह नहीं बताते।

2015-2016 में बांटे कार और आभूषण- 

ढोलकिया हरे कृष्णा एक्सपोर्ट के मालिक हैं, उनकी कंपनी में करीब 500 कर्मचारी हैं और कंपनी का करीब छह हजार करोड़ रुपये का सालाना कारोबार है। ढोलकिया पहली बार तब चर्चा में आए थे जब साल 2015 में दिवाली पर उन्होंने अपने 1200 कर्मचारियों को 491 फिएट पंटो कारें, 200 फ्लैट और आभूषण दिए थे।

साल 2016 में ढोलकिया ने दिवाली पर पहले से भी ज्यादा दरियादिली दिखाते हुए 2000 कर्मचारियों को डॉटसन रेडी-गो, मारूती अल्टो कारें और आभूषण गिफ्ट किए थे। गुजरात में कई अन्य कारोबारी भी दिवाली एवं अन्य त्योहारों पर कर्मचारियों को उपहार देते रहे हैं लेकिन ढोलिकया जैसी उदारता शायद ही किसी ने दिखायी हो।

ढोलकिया भले ही इनकार करें लेकिन इस साल उनके द्वारा गिफ्ट न दिए जाने के पीछे जीएसटी को बड़ी वजह मानने के पीछे ठोस आधार हैं। एक जुलाई से लागू जीएसटी में केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को दिए 50 रुपये से अधिक मूल्य के गिफ्ट को टैक्स के दायरे में रखा है। ऐसे में किसी भी कारोबारी के लिए महंगे गिफ्ट देना पहले जैसा आसान नहीं रहा।

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