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मोदीराज: धर्म की चासनी में लपेटकर खत्म कर ही दिया आरक्षण, प्रोफेसर के 52 पदों में OBC-1, SC/ST-0

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल ( नेशनल जनमत) 

बहेलिया आएगा जाल बिछाएगा हमको फंसाएगा लेकिन हम फंसेंगे नहीं। बचपन ये कहानी तो आपने सुनी ही होगी अब इस कहानी की तरह देश के पिछड़े और दलित वर्ग की स्थिति हो गई है। बहेलिया आया जाल बिछाया और फिर फंसाकर आपके वोट भी ले गया।

पिछड़े वर्ग का व्यक्ति दिन भर रटेगा आरक्षण पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे, अरे भाई कैसे नहीं करोगे ? अब कर तो दिया आरक्षण पर हमला, हर दिन खत्म तो हो रहा है आरक्षण अब और कितना हमला करवाओगे?

बीजेपी के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जयपुर में कहा था हम आरक्षण को इस स्थिति में ला देंगे जिससे उसके होने ना होने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। आज यही बात सच साबित हो रही है। देशभर के सभी केन्द्रीय संस्थानों और परीक्षाओं में ये खेल शुरू हो गया है।

शायद पिछड़े तो धर्म की चासनी में लिपटे हैं और राममंदिर के इंतजार में हैं। जहां ब्राह्मण पुरोहितों के साथ ओबीसी के बच्चे दरी बिछाने और मजीरा बजाने का काम करेंगे।

समझिए पूरा खेल-

रोस्टर सिस्टम के आधार पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय केन्द्रीय विश्वविद्यालय अमरकंटक (IGNTU) में 52 पदों के लिए भर्तियां निकाली गईं। सामान्य नियम के रहते 27 प्रतिशत सीट यानि कम से कम 14 सीट ओबीसी के खाते में और 8 सीट एससी के खाते में आतीं लेकिन विभागवार निकाली गईं नियुक्तियों के चलते 52 सीटों में ओबीसी को सिर्फ 1 औऱ एससी-एसटी को एक भी सीट नहीं दी गई है।

पद- 52, सामान्य- 51, ओबीसी- 1, एससी-0, एसटी- 0

असली खेल ये है कि 27 विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तो 52 निकाले गए लेकिन इतनी होशियारी से कि विभागवार किसी भी नियुक्ति में दलित-पिछड़े और आदिवासियों को एक भी सीट ना देनी पड़े।

सिर्फ एक विभाग कॉमर्स में ओबीसी के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर का 1 पद आरक्षित किया गया है बाकि 51 पद सामान्य श्रेणी के रखे गए हैं। देश के जातिवादी स्वरूप को देखते हुए ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि दलित-पिछड़ों को सामान्य सीटों पर कितनी तवज्जों दी जाएगी।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि अगर मानवीय गरिमा के साथ भारत में जिंदा रहना है तो यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में OBC, SC,ST रिजर्वेशन खत्म करने के फैसले का विरोध करें।

सरकार को मजबूर करें कि वह ऐसा न करे। वरना आने वाली पीढ़ी पूछेगी कि जब यह सब हो रहा था, तब आप क्या कर रहे थे।

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील यादव लिखते हैं कि केंद्र सरकार के एक विश्वविद्यालय के 52 पद में 1 ओबीसी और 00 एससी-एसटी को मिल रहा है और कुछ हराखोर कह रहे हैं कि “कोई माई का लाल आरक्षण नही हटा सकता। आप सबको आरक्षण हटाने के नाम पर बरगलाया जा रहा है”

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