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दूसरी जाति में प्रेम करने पर आखिर कब तक, कुर्बानी लेता रहेगा जातिवादी गिरोहों का ‘सभ्य समाज’

नई दिल्ली/रायबरेली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

अपने देश में मृत्यु की तरह जाति भी एक शाश्वत सत्य है। जिस जाति में जन्म ले लिया चाहकर भी आप उस जाति के जंजाल से बाहर नहीं निकल सकते। आप घर से बाहर रह सकते हैं, किसी के साथ घूम भी सकते हैं, कहीं भी नौकरी कर सकते हैं लेकिन शादी कहां करेगे ये तय घर वाले ही करेंगे।

हैरत की बात तो देखिए इस जातिवादी सिस्टम की वजह से जो समाज सबसे ज्यादा प्रताड़ित हैं उनमें जातिवाद का जहर बुरी तरह घुला हुआ है। या यूं कहें कि जन्म के साथ ही उनको दुनिया के सबसे अमानवीय सिस्टम में बांध दिया गया है। देश भर में किसी भी समाज में अलग जाति में प्रेम करने वालों को किसी ना किसी प्रकार से दिक्कत का सामना तो करना ही पड़ता है।

खबर यूपी के रायबरेली जिले की है। सलोन थाना क्षेत्र के मामुनी गांव में पेड़ से लटकते प्रेमी युगल के शव मिलने से सोमवार को हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवो को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर जांच शुरू कर दी है ।

प्रदीप मौर्य का गांव की ही उमा वर्मा के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। गांव के लोग तरह तरह के ताने मारते थे प्रदीप ने शादी के लिए घर वालों से बात की पर दोनों के घरवाले और गांव के लोग अलग-अलग जाति के चलते शादी करने के लिए तैयार नही हुए।

प्रदीप के घरवालों ने दूसरी जगह शादी की बात शुरू कर दी पर दोनों का बराबर मिलना-जुलना जारी रहा। जिसके बाद आज सोमवार सुबह गांव के बाहर तालाब के किनारे पेड़ से लटके प्रदीप और उमा के शव लोगों ने देखा तो होश उड़ गए ।

वही घटना की खबर पाकर मौके पर पहुंची पोलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

(रायबरेली से अमरेश पटेल की रिपोर्ट)

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