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कुछ तो है जो अंदर ही अंदर सड़ रहा है, हाईकोर्ट के उत्पीड़न से परेशान OBC जिला जज ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो 

जस्टिस कर्णन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद न्यायपालिका मे भ्रष्टाचार एक आम चर्चा का विषय बना। ये अलग बात है कि भारतीय न्यायपालिका में एक खास जाति का वर्चस्व होने के कारण वो आज सलाखों के पीछे हैं। लेकिन उस प्रकरण ने इतना तो साफ कर ही दिया है कि न्यायपालिका में कोई तो ऐसी गंदगी है जो अंदर ही अंदर सड़ती जा रही है।

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हालिया मामला उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले का है यहां के जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमल किशोर शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे का कारण उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा किए जा रहे उत्पीडऩ को बताया है। जिला जज ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को अपना इस्तीफा भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक कमल किशोर शर्मा सहारनपुर के निवासी और ओबीसी की बढ़ई जाति से आते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए त्याग पत्र में जिला जज कमल किशार शर्मा ने लिखा कि जिला जज रहते हुए मैंने अपने कार्यकाल में अपीलों के रिकार्ड निस्तारण को ठीक से प्रतिपादित किया है इस समय सिर्फ 14-15 अपीलें ही शेष हैं।

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जिला जज ने नेशनल जनमत से इस्तीफे की पुष्टि की लेकिन, ज्यादा कुछ कहने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि इस्तीफे में जो लिखा है, वह सही है। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है कि अधिवक्ताओं की हड़ताल को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने गलत सूचना नहीं दी है।

उन्होंने इस्तीफे में कहा की जल्द से जल्द मेरा इस्तीफा स्वीकार कर राज्य सरकार को भेज दिया जाए ताकि वह नई पारी शुरू कर सकें। उन्होंने राजनीतिक और लीगल क्षेत्र में नई पारी शुरू करने की बात भी लिखी है।

क्य़ा था मामला- 

जानकारी के अनुसार किसी बात को लेकर रायबरेली के वकील हड़ताल  पर थे इस दौरान वकीलों ने बवाल भी किया था। वकीलों की हड़ताल को लेकर चीफ जस्टिस ने जज कमल किशोर शर्मा से कह दिया कि आप प्रशासन नहीं संभाल पा रहे हैं।

इसके उत्तर में जज ने चीफ जस्टिस को कुछ उदाहरण बता दिए और बोले कि ये आपके प्रशासन का उदाहरण है सर। इसी बात को लेकर चीफ जस्टिस और जिला जज में तनातनी बढ़ गई थी।

 

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