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इतिहास का भगवाकरण जारी, महाराष्ट्र सरकार ने किताबों से ताज और मुस्लिम शासक गायब कर दिए

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

भाजपा शासन काल में इतिहास से लेकर स्मारकों, शहरों के भगवाकरण का खेल बदस्तूर जारी है। यूपी के विभिन्न शहरों, एयरपोर्ट के नामकऱण तक तो ठीक था लेकिन अब इतिहास को संघी कलम से लिखने का प्रयास किया जा रहा है।

कुछ ही दिन पहले राजस्थान से खबर आई थी कि पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी का युद्ध जीतना बता दिया गया है। इसके साथ ही ताजा खबर महाराष्ट्र से आ रही है।

महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड ने 7वीं और 9वीं कक्षा के इतिहास की पुस्तकों में मुस्लिम शासकों से जुड़े तथ्यों में संशोधन कर दिया है। मुंबई मिरर की खबर मुताबिक 7वीं कक्षा की किताब में से मुस्लिम शासकों के इतिहास से जुड़े अध्यायों को हटा दिया गया है।

जिनमें मुगल साम्राज्य तथा सल्तनत कालीन शासकों का जिक्र किया गया। इनमें से रजिया सुल्ताना और मोहम्मद बिन तुगलक जैसे मुस्लिम शासकों से जुड़े तथ्य हटा दिया गए है।

ताजमहल, कुतुबमीनार भी गायब- 

इतिहास के नए पाठ्यक्रम में ताज महल, कुतुब मीनार और लाल किला जैसे स्मारकों का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। इसके साथ ही 9वीं कक्षा की पुस्तक में बोफोर्स घोटाला और 1975-1977 में लगे आपातकाल का भी जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल की इतिहास पुस्तक की बात करें तो उसमें अकबर को एक उदार और सहिष्णु शासक बताया गया था। जबकि इस बार 7वीं कक्षा की पुस्तक में अकबर के बारे में लिखा गया है कि ‘अकबर मुशल वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था। जब उसने भारत को केंद्रीय सत्ता के अधीन लाने का प्रयास किया तो उसे कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

महाराणा प्रताप, चांद बीबी और रानी दुर्गावती ने उनके खिलाफ संघर्ष किया। उनका संघर्ष उल्लेखनीय है।’ इन सबके अलावा अकबर के शासनकाल को सिर्फ तीन पंक्तियों में ही समेटने की कोशिश की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक नई पुस्तक में दिल्ली में शासन करने वाली पहली मुस्लिम महिला रजिया सुल्ताना, मुहम्मद बिन तुगलक के दिल्ली से दौलताबाद (मौजूदा मराठावाड़ा) में राजधानी स्थानांतरित करने और देश में पहली विमुद्रीकरण पहल को भी हटा दिया गया है।

सल्तनत कालीन शासक मुहम्मद बिन तुगलक ने रातों-रात सोने और चांदी के सिक्कों को बंद कर उसकी जगह तांबे और पीतल के सिक्कों का चलन शुरू किया था। इसी तरह शेरशाह से जुड़ी जानकारियों को भी हटा दिया गया है। इन जानकारियों को हटा मध्यकालीन भारतीय इतिहास के खंड में शिवाजी से संबंधित जानकारियों पर ज्यादा जोर दिया गया है।

मुंबई मिरर से बात करते हुए महाराष्ट्र इतिहास विषय समिति के अध्यक्ष सदानंद मोरे ने कहा कि ‘हमें क्यों नहीं बदलाव करना चाहिए? हमने महाराष्ट्र-केंद्रित इतिहास को जगह दी है। इसमें गलत क्या है? सेंट्रल बोर्ड की किताबों में हमारे राज्य के इतिहास को बहुत कम जगह दी गई है।’

राजस्थान सरकार पर लगे थे ये आरोप…

राजस्थान की वसुंधरा सरकार पर आरोप लगे थे कि नए इतिहास में मुगलों को हत्यारों के रूप में दिखाया जा रहा है वहीं हिंदू राजाओं को विजेताओं की तरह प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके साथ ही इन सरकारों पर यह भी आरोप है कि इनके द्वारा भारतीय राजनीति के इतिहास के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

18 जून 1576 को हुए हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर ने अपनी विशाल सेना के साथ मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप को हरा दिया था। इतिहास के अनुसार महाराणा प्रताप युद्ध भूमि छोड़ कर चले गए थे। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी यह जंग जारी रखी।

राजस्थान विश्वविद्यालय ने यह तय किया है कि अब इतिहास की नई किताब कोर्स में शामिल की जायेगी जिसमें नया इतिहास पढ़ाया जाएगा। इस नए इतिहास के मुताबिक 450 साल पहले महाराणा प्रताप ने अकबर को हराया था। इससे पहले भाजपा सरकार ने नवीं और दसवीं की किताबें बदली थीं।

 

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