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वसुंधरा सरकार की पाबंदी के बाद भी समर्थकों संग सड़क पर उतरी बेनीवाल-मीणा की जोड़ी

जयपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो

निर्दलीय विधायक और किसान नेता हनुमान बेनीवाल के समर्थकों ने वसुंधरा सरकार की तमाम पाबंदियों के बाद भी मंगलवार को जबरदस्त प्रदर्शन किया. हालांकि रैली को पुलिस ने शहीद स्मारक नहीं जाने दिया लेकिन जालूपुरा स्थित सरकारी आवास से गर्वमेंट हॉस्टल तक उमड़ी भारी भीड़ ने पुलिस के हाथ पांव फुला दिए. समर्थकों ने बेनीवाल को विधानसभा से निलम्बित किए जाने को लोकतंत्र की हत्या करना बताया.

खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल को विधानसभा से निलंम्बन किए जाने के विरोध में मान सम्मान बचाओ संघर्ष समिति की ओर से जयपुर में रैली निकाली गई और प्रदर्शन किया गया. बेनीवाल के विधानसभा से निलंबन वापसी की मांग को लालसोट विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा भी समर्थन देने पहुंचे. बेनीवाल और किरोड़ीलाल मीणा ने सड़क पर ही समर्थकों को संबोधित किया.

डरी हुई है वसुंधरा सरकार- 

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि वसुंधरा सरकार समर्थकों के आक्रोश से डरी हुई है इसलिए पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते उनके समर्थकों की गाड़ियां जयपुर से पहले ही रोक दीं. वहीं, राज्य सरकार की ओर से भी हनुमान बेनीवाल के पास एक संदेश आने की सूचना मिली लेकिन बेनीवाल ने उसका खुलासा तो नहीं किया. बस इशारों इशारों में इतना जरूर कहा कि वह सकारात्मक संदेश नहीं था.

निलंबन वापस नहीं होने पर होगा बड़ा आंदोलनः किरोड़ीलाल मीणा

रैली का समर्थन करने पहुंचे डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा विधानसभा स्पीकर और सरकार का मजबूत संदेश देने के लिए यह एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन है. अगर बेनीवाल का निलंबन वापस नहीं होता है तो बड़ा आंदोलन होगा, जिसमें लाखों लोग शामिल होंगे.

क्यों हुआ था निलंबन-

राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल शुरू हुआ तो कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने एक पूरक प्रश्न पूछने के लिए बटन दबाया, लेकिन स्पीकर कैलाश मेघवाल ने उन्हें मौका नहीं दिया. डोटासरा ने इसका विरोध किया तो स्पीकर ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र का मामला है. इसी बात पर विपक्षी विधायक अशोक चांदना और धीरज गुर्जर समेत कई विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया.

बाद में सदन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्पीकर को मार्शल बुलाने पड़े. इसी मामले को अनुशासनहीनता मानते हुए 14 विधायकों का निलंबन हुआ था, जिसमें बेनीवाल भी एक थे. बाकी सारे विधायकों का निवंबन वापस ले लिया गया लेकिन हनुमान बेनीवाल का निलंबन वापस नहीं लिया गया.

बेनीवाल और मीणा की जोड़ी ने सत्तासीनों को हिला दिया है- 

रैली की कवरेज के लिए पहुंचे स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र महला कहते हैं कि जननेता हनुमान बेनीवाल और किरोड़ीलाल मीणा बीजेपी और कांग्रेस के विरोध में राजस्थान की  सबसे मजबूत आवाज़ हैं. उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस की सत्ता की अदला-बदली के ख़ेल को निर्णायक रूप चुनौती दे दी है. उन्होंने उच्च जातियों के सत्ता वर्चस्व को हिला कर रख दिया है. उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस को चुनौती देकर तथाकथित उच्च वर्गों के घमंड को चुनौती दी है, जिनका हमेशा से मानना रहा है कि सत्ता पर क़ाबिज होने की क़ाबिलियत उन्हीं में हैं, राज उन्हीं को करना चाहिये. हनुमान बेनीवाल ने समाज के सत्ता के ढ़ांचे में सुराख़ कर दिया है.

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