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जंतर-मंतर पर क्यों भड़का गुस्सा जो लोगों ने तोड़ दिया अपना कलावा ?

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल

सुबह से नीला झंडा लगाए भीम आर्मी के सिपाही संसद के करीब जंतर मंतर पर जुटने लगे थे. मानो आज ही संसद पर कब्जा करने निकल पड़े हो. उनको रोकने के लिए क़रीब तीन सौ पुलिसवाले, गिरफ्तारी के लिए क़रीब 30 बसें, आँसू गैस छोड़ने वाला वज्र वाहन और पानी की तेज़ धार छोड़ने वाली दमकल तैनात थीं. हो भी क्यों ना आखिर भीम आर्मी के सेनापति चन्द्रशेखर आजाद द्वारा आयोजित मानव मुक्ति महायज्ञ जो था. इस महायज्ञ में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के मंत्र थे. तरक्की के रास्ते और संघर्ष के वचन थे. और तो और इस महायज्ञ के समापन पर हाथ का कलावा यानि रक्षा सूत्र को तिलांजलि यानि पूर्णाहुति भी दी गई.

सैकड़ों लोगों ने काटकर फेंका हाथ का कलावा-

भीम आर्मी द्वारा रविवार को जंतर-मंतर पर आयोजित शक्ति प्रदर्शन दिल्ली में इस साल की सबसे बड़ा प्रदर्शन था. लेकिन मेरी नजर में ये प्रदर्शन सिर्फ भीड़ का एक जगह इकट्ठा होकर भाषण देना नहीं था. बल्कि ये मानव मुक्ति के लिए किया गया देश की राजधानी का सबसे बड़ा महायज्ञ था. वैचारिक रूप से मानव को गुलामी की जंजीरों को तोड़कर समानता का नया समाज बनाने के लिए प्रेरित करने वाले इस आंदोलन में सैकड़ों लोगों ने हाथ से कलावा यानि रक्षासूत्र भी तोड़कर फेंक दिया.

बीजेपी के रवैये से समझ में आया कि दलित सिर्फ चुनाव के समय हिन्दू है-

अपने हाथ में बांधे हुए लाल धागे को गुलामी का प्रतीक बताते हुए सैकड़ों लोगों ने तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के तावीज भी उतार दिए. सहारनपुर से आए राजेश कुमार ने कहा कि हमारे साथ हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था में नीची जाति का होने का अभिशाप लगा है, इसी कारण भेदभाव हो रहा है, हमें हिंदू बने रहने से क्या फायदा. अब हम हिंदू धर्म की जगह बौद्ध धर्म को अपना लेंगे. वहीं रमेश कुमार ने कहा कि हमें सिर्फ चुनाव के समय ही हिन्दू मानते हैं बाकि समय में हम दलित हैं. बोले हमने सोचा प्रदेश का विकास करेंगे तो हमने चुपके से बीजेपी को वोट दिया लेकिन बदले में हमारे घर जला दिए गए.

संविधान तो हमारे खून में है-

आजाद ने कहा कि मनुवादी लोग हमें संविधान पढ़ने की सलाह दे रहे हैं. मैं उनको कहना चाहता हूं कि संविधान तो हमारे लोगों के खून में है. हम संविधान के अनुसार ही समता, न्याय और वंधुत्व की बात करते हैं.

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