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जानिए जाट-मेघवाल(दलित) के बीच नफरत फैलाने से किसको फायदा मिलता है !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों व जाटवों और राजस्थान के जाटों व मेघवालों, हरियाणा के जाटों व दलितों के बीच झगड़ा फैलाकर किसको फायदा है. कौन चाहता है कि इनमें नफरत बनी रहे तो हमें फायदा होगा. इनकी एकता से किसको डर लगता है.

इन्ही सब के खोजने का प्रयास किया है राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार जितेन्द्र महला ने.

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जाटों और मेघवालों से डरते हैं मनुवादी- 

मनुवादियों को राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा डर जाट-मेघवाल एकता से लगता है, इसीलिए मनुवादी चौबीस घंटे जाटों और मेघवालों में फूट डालने और नफ़रत फैलाने का काम कर रहें हैं.

पहलु ख़ान, जाट आरक्षण गोली कांड, गुर्जर आरक्षण गोली कांड, भगेगा, बिजनौर, कैराना, सुनपेड, मुजफ्फरनगर, अखलाक, डेल्टा मेघवाल, उना, डांगावास, धनाउ, सोती, बुडाना और मिर्चपुर यह सब कहाँ हैं ? सब पश्चिमी भारत में हैं.

मेघवालों, मुसलमानों, मीणाओं, जाटों, गुर्जरों, सैनियों, विश्नोईयों, यादवों, प्रजापतियों की बहुसंख्यक आबादी है इस इलाके में है. राजस्थान, पश्चिमी उत्तरप्रदेश और हरियाणा यहीं पर हैं. यह पूरा का पूरा इलाका ब्राह्मणवादियों और मनुवादियों के द्वारा लगाई गई आग में ज़ल रहा है. औबीसी, एससी, एसटी और मुसलमान संघी फूट का शिकार हैं.

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ब्राह्मणवाद के लिए कैसेे मुफीद जगह बन गई है- 

पश्चिमी भारत मनुवाद और ब्राह्मणवाद के लिए सबसे मुफीद जगह बनी हुई है क्यों कि यहाँ आज तक कबीर, बुद्ध, फुले, शाहुजी महाराज , रामस्वरूप वर्मा, चौधरी छोटूराम और डॉ. अंबेडकर की न्यायवादी परंपरा जमीन पर नहीं पहुँची. सामाजिक और राजनीतिक चेतना जमीन पर नहीं पहुँची.यहाँ तो 1987 में भी राजस्थान के सीकर में 18 साल की मासूम लड़की रूप कंवर तथाकथिक रूप से सती हुई हैं.

मनु की मूर्ति का प्रभाव है राजस्थान में – 

यहां जयपुर में मनु की गैरकानूनी मूर्ति लगी है. यहाँ अब भी मनुस्मृति को जलाना कोई आसान काम नहीं है. पश्चिमी भारत के इस पूरे इलाके को मनुवादी स्वयं सेवक संघ और उसकी ब्राह्मणवादी संस्थाओं ने अपनी प्रयोगशाला बना कर रखा हुआ है. देश में कहीं पर भी चुनाव का मौसम होता है तब वे यहाँ सक्रिय हो जाते हैं और उसके बाद अखलाक, सुनपैड, कैराना, मुजफ्फरनगर हो जाता है.

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सम्पूर्ण दलित जाटों सहित सम्पूर्ण ओबीसी को एकजुट होना होगा- 

मनुवाद से त्रस्त हरियाणा-राजस्थान-पश्चिमी उत्तरप्रदेश के इस इलाके को आप दोनों की जरूरत है. आप दोनों अगर साथ आते हैं तो मनुवाद को नेस्तनाबूत करने से दुनिया की कोई ताकत हमें नहीं रोक सकती. हमें यह समझना होगा कि इस पूरे इलाके में संघियों को सामाजिक, वैचारिक, आर्थिक और राजनैतिक हर फ्रंट पर चुनौती देने के लिए हमारे पास यहीं एक रास्ता है.

माना कि संघी लोग फूट डालने में माहिर होते हैं. रोज़ाना फूट डालते हैं. लेकिन क्या हम लोग न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुता जैसे मूल्यों के लिए एक नहीं हो सकते ? हो सकते हैं. होना ही पड़ेगा वरना हमेशा की तरह चील-कौवों की लड़ाई में मलाई कोई ओर ले जाएगा.

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