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JNU का भगवाकरण करने की रणनीति फेल, ABVP चारों खाने चित, अध्यक्ष समेत सभी पदों पर लाल सलाम

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो । 

दक्षिणपंथ और वामपंथ के विचारों के सियासी टकराव का प्रतीक बन चुके जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघचुनाव में लेफ्ट एकता काम आ गई। संयुक्त वाम संगठनों छात्र संघ की चारों सीटों पर लाल परचम लहरा दिया है। छात्रसंघ के सेंट्रल पैनल की सभी चार सीटों पर लेफ्ट यूनिटी को अच्छे अंतर से जीत हासिल हुई है.

लेफ्ट संगठनों में आॅल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) ने मिलकर चुनाव लड़ा था. शनिवार देर रात आए छात्रसंघ चुनाव परिणाम में आइसा की गीता कुमारी को अध्यक्ष पद पद पर जीत हासिल हुई है.

गीता कुमारी ने 1506 वोट हासिल करके अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की उम्मीदवार को हराया. विद्यार्थी परिषद से निधि त्रिपाठी को 1042 वोट मिले.

लेफ्ट की ही सिमोन जोया खान (आइसा) को उपाध्यक्ष, दुग्गीराला श्रीकृष्ण (एसएफआई) को महासचिव और शुभांशु सिंह (डीएसएफ) को संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल हुई है.

उपाध्यक्ष पद के लिए सिमोन जोया खान ने 1876 वोट हासिल किए. उन्होंने एबीवीपी के दुर्गेश को हराया जिन्हें 1028 वोट मिले हैं. महासचिव पद पर दुग्गीराला श्रीकृष्ण ने 2082 वोट पाकर एबीवीपी के निकुंज मकवाना (975) को हराया. संयुक्त सचिव पद के लिए शुभांशु सिंह को 1755 वोट मिले, उन्होंने एबीवीपी के पंकज केसरी (920) को हराया.

लेफ्ट ने चारों सीटें अच्छे अंतर से जीत लीं, हालांकि, जेएनयू में हमेशा बहुत कमजोर स्थिति में रहने वाले एबीवीपी ने सभी चार सीटों पर दूसरा स्थान हासिल किया है.

पिछले वर्ष 9 फरवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में जेएनयू के कुछ छात्रों पर देशविरोधी नारे लगाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद जेएनयू पूरे देश में चर्चा में था और इस तरह की तमाम अफवाहें फैलाई गईं कि जेएनयू के छात्र देश तोड़ने वाली गतिविधियों में शामिल रहते हैं.

इसके बाद भी आइसा और एसएफआई ने मिलकर चुनाव लड़ा था और सेंट्रल पैनल की सभी चार सीटें जीत ली थीं. अध्यक्ष पद पर मोहित कुमार पांडेय की जगह आइसा की ही गीता कुमारी ने ली है.

बापसा का प्रदर्शन काबिले गौर- 

अंबेडकरवादी छात्र संगठन बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) को सभी सीटों पर तीसरा स्थान मिला है. डी राजा की बेटी अपराजिता राजा अध्यक्ष पद के लिए एआईएसएफ की उम्मीदवार थीं जिन्हें 416 वोटों के साथ पांचवा स्थान हासिल हुआ है. निर्दलीय उम्मीदवार फारूक आलम को 419 वोट हासिल हुए.

कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को नोटा से भी कम वोट मिले हैं. साइंस स्कूल के ज्यादातर छात्रों ने नोटा को वोटा दिया. नोटा पर कुल 1512 वोट मिले हैं, जबकि एनएसयूआई को सभी सीटों पर कुल मिलाकर 728 वोट मिले.

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