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धार्मिक कट्टरता के खिलाफ सड़क पर उतरने का वक़्त है, जो अब भी घरों में दुबके हैं, वे सबसे बड़े मुज़रिम हैं

राजस्थान/नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

राजस्थान के भगवा शासित राज में राजसमंद इलाके में शंभूलाल रेगर नाम के दलित शख्स ने 50 साल के मुस्लिम बुजुर्ग मोहम्मद अफरजुल की कुल्हाड़ी और तलवार से काट कर हत्या कर दी. इतना ही नहीं नफरत से भरे इस हैवान ने पूरे हत्याकांड का लाइव वीडियो भी जारी किया.

वीडियो में उस शख्स की भाषा उसके धर्म के प्रति पागलपन को दिखा रही है। इस वीडियो ने साबित कर दिया कि धर्म वास्तविक में एक अफीम है जो मनुष्य के सोचने-समझने की छमता को खत्म कर देती है।

राजस्थान के स्वतंत्र पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र महला लिखते हैं कि राजस्थान में पहलु खान, जफ़र खान, उमैर खान, बिसाऊ, चौमूं और अब राजसमंद में मोहम्मद अफराजुल, एक के बाद एक देश के नागरिक मुसलमानों पर हिंसा बढ़ती जा रही है. जो भी लोग यह सब कर रहे हैं, वे यूहीं नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें सत्ता, सरकार और प्रशासन की शह हासिल है.

आरएसएस की राजनैतिक शाखा बीजेपी ने संघी मानसिकता से ओतप्रोत लोगों को शासन प्रशासन में हर जगह भर दिया है, राजसमंद हिंसा से पहले हुई घटनाओं में अब तक कोई मजबूत कार्रवाई नहीं हुई. अपराधी, दंगाई, क़ातिल और षड्यंत्रकारी खुलेआम घुम रहे हैं.

हाल ही में बिसाऊ में जिन्होंने हिंसा की शुरूआत की उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही बल्कि एक खास धर्म के ही लोगों की लगातार गिरफ्तारियां हो रही हो, यहाँ कानून और संविधान का राज खत्म हो चुका है.

पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को मिलकर लड़ना होगा- 

उत्तर भारत में जहां बिहार और उत्तर प्रदेश में पिछड़े, दलित और मुसलमान सामाजिक और राजनैतिक रूप से संगठित हैं, जागरूक हैं. बीजेपी-कांग्रेस के अलावा जो भी हैं, वे ऐसे मामलों में जमकर लड़ते हैं, इंसानियत के साथ खड़े होते हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में यूनियनिस्ट पार्टी के चौधरी छोटूराम और जनता पार्टी और लोकदल के चौधरी चरण सिंह के बाद ऐसा कोई नेता और मिशन नहीं दिखता, जिसने की मनुवादी ताकतों को कोई चुनौती दी हो.

राजस्थान की राजधानी जयपुर में इंसानियत के दुश्मन मनु की मूर्ति गैरकानूनी तरीके से राजस्थान हाईकोर्ट में लगी हैं, फिर भी यहां किसी को कोई दिक्कत महसूस नहीं होती. राजस्थान बहुत ही गलीच, जातिवादी और मनुवादी दलदल बन चुका है.

बीजेपी-कांग्रेस दोनों मनुवादी-जातिवादी हैं- 

यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही जातिवादी और मनुवादी हैं, दोनों में से कोई भी मुसलमानों के लिए नहीं बोलता. बीजेपी को मुसलमानों से कोई मतलब कभी रहा ही नहीं क्यों कि वह तो मुसलमानों के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत से ही जिंदा है और कांग्रेस मुसलमानों को अपना वोट बैंक मानती हैं, इसलिए वह भी गूँगी और बहरी है, और मुसलमानों के पास भी राजस्थान में कोई विकल्प नहीं है.

जहां दूसरे राज्यों में मुसलमानों के साथ पिछड़े और दलित मुश्किल वक़्त में कम ज्यादा मात्रा में खड़े रहते हैं, वैसा राजस्थान में कुछ नहीं है. चरण सिंह के जाने के बाद वह पूरी परम्परा खत्म हो गई है.

इस राज्य के जाट, मेघवाल, मीणा, यादव, माली, कुम्हार जैसी पिछड़ी, दलित, आदिवासी और किसान जातियों का मरण हो चुका है. आरपीएससी जैसी संस्थाए लगातार इनके संवैधानिक आरक्षण को साजिशन खत्म कर रही है, सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन से लेकर हर क्षेत्र में भयंकर निजीकरण कर रही है.

किसानों की जमीन हड़पी जा रही है- 

जिससे कि इनकी नौकरियां खत्म की जा सके, किसानों की जमीन हड़पने के काले कानून बनाए जा रहे हैं, खेती और पशुपालन बर्बाद हो चुके हैं, बेरोजगारों की फौज खड़ी हो गई हैं, सरकार नौजवानों से ठेके पर काम करवाती हैं और दिन-रात शोषण करती हैं लेकिन किसी को कई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सब लोग दिन रात मनुवाद की चरस पीते हैं.

राजस्थान को नए आंदोलनकारियों की जरूरत है जो कि प्रदेश भर में मुसलमान, दलित, पिछड़ा और किसान आंदोलन करे और सत्ता की आंख में आंख डालकर संविधान, न्याय, लोकतंत्र और इंसानियत की लड़ाई लड़ी जा सके.

सड़कों पर उतरने का वक़्त है जो घरों में बैठे हैं, वो सबसे बड़े मुज़रिम हैं…

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