You are here

JNU में आज रात ‘मनुस्मृति दहन’ करके महामना रामस्वरूप वर्मा को याद करेंगे सामाजिक न्याय के साथी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

अर्जक संघ के संस्थापक महामना रामस्वरूप वर्मा का मानना था कि सामाजिक चेतना से ही सामाजिक परिवर्तन होगा, सामाजिक परिवर्तन के बगैर राजनैतिक परिवर्तन सम्भव नहीं। अगर येन केन प्रकारेेण राजनैतिक परिवर्तन हो भी गया तो वह ज्यादा दिनों तक टिकने वाला नहीं होगा। रामस्वरूप वर्मा सामाजिक सुधार के पक्षधर नहीं थे, वे सामाजिक परिवर्तन चाहते थे।

वे हमेशा समझाया करते थे कि जिस प्रकार दूध से भरे टब में यदि पोटेशियम साइनाइट का टुकड़ा पड़ जाये तो उस टुकड़े को दूध के टब से निकालने के बाद भी दूध का प्रयोग करना जानलेवा होगा। इस लिए ब्राह्मणवादी मूल्यों में सुधार की कोई गुंजाइश नही है। ब्राह्मणवाद सुधारा नहीं जा सकता बल्कि नकारा ही जा सकता है।

महामना के इन्ही विचारों को आगे बढ़ाते हुए आज 22 अगस्त को सामाजिक न्याय के नायक रामस्वरूप वर्मा की 94वीं जयंती पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविधालय में साबरमती ढाबे पर मनुस्मृति को जलाने का कार्यक्रम 9.30 बजे आयोजित किया गया है।

यह आयोजन इसलिए जरुरी है कि 14 अप्रैल 1978 में रामस्वरूप वर्मा ने अर्जक संघ के कार्यकर्ताओं से अपील की थी की 14 अप्रैल से 30 अप्रैल तक मनुस्मृति और रामायण को जलाकर मनुष्य से मनुष्य का भेद करने वाली ब्राह्मणवादी व्यवस्था का बहिष्कार किया जाए।

कार्यक्रम के आयोजक सदस्य प्रशांत निहाल ने बताया कि आज महामना रामस्वरूप वर्मा का 94वां जन्मदिवस हैl उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर के गौरी करन गाँव में 22 अगस्त 1923 को साधारण कुर्मी किसान परिवार में हुआl उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालाय से एमए और आगरा विश्विद्यालय से एलएलबी कि डिग्री प्राप्त की l

सामाजिक चेतना और जागृती पैदा करने के लिए उन्होंने 1 जून 1968 को सामाजिक संगठन ‘अर्जक संघ’ की स्थापना कीl रामस्वरूप वर्मा ने अंबेदकर के विचारों को उत्तर भारत में फैलाने का काम कियाl जब लोहिया ने नारा दिया, “संसोपा ने बांधी गांठ, सौ में पावें पिछड़े साठ” तब इस नारे ने पिछड़ो को समाजवादी आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया l

बाद में वर्मा जी ने लोहिया से मतबेध होने पे संसोपा छोड़ दिया और शहीद जगदेव प्रसाद के साथ मिल कर 7 अगस्त 1972 को शोषित समाज दल का गठन कियाl

वर्मा जी ने अर्जक संघ के कार्यकरताओं से अनुरोध किया कि पूरे देश में अम्बेडकर के जन्मदिवस 14 अप्रैल को चेतना दिवस के रूप में मनाएं और 14 अप्रैल 1978 से 30 अप्रैल 1978 तक पूरे पखवाड़े रामायण और मनुस्मृती का दहन करेंl

रामस्वरूप वर्मा 1967, 1969, 1980, 1989 और 1991 में विधान सभा सदस्य रहे l 1967 की संबिद सरकार में वर्मा जी लोहिया की पार्टी संसोपा से जीत कर उत्तर प्रदेश विधान सभा पहुँचे और चौधरी चरण सिंह के सरकार में वित्त मंत्री बनाये गये और उन्होंने मुनाफे का बजट पेश कियाl

आज हम कुछ छात्र उनकी स्मृती में और उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए जेएनयू में मनुस्मृति का दहन करेंगे l आप लोगों से अनुरोध है कि आज शाम 9.30 बजे साबरमती ढाबे पर पंहुचकर कार्यक्रम में अपनी भागीदारी सुनिश्चत करें।

आयोजक मंडल- बीरेंद्र कुमार, प्रशांत निहाल, दिलीप कुमार, मुलायम सिंह, दिलीप यादव

Related posts

Share
Share