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तानाशाही के खिलाफ JNU में UNITED OBC FORUM का छात्र आंदोलन आज, नोटिस भेजकर आयोजकों को धमका रहे हैं कुलपति !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

छात्रों के हितों की आवाज उठाने वाले छात्र नेताओं के निलंबन और पीएचडी से रोके जाने के जवाहर लाल नेहरू वि.वि. प्रशासन के फासीवादी रवैये के खिलाफ यूनाइटेड ओबीसी फोरम ने आज यानि सोमवार को जेएनयू में एक बड़े छात्र आंदोलन की तैयारी की है। लेकिन छात्रों का आरोप है कि जातिवादी और तानाशाही मानसिकता से ग्रसित जेएनयू के कुलपति प्रदर्शन में ना जाने के लिए शिक्षकों और छात्रों को धमका रहे हैं।

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आयोजकों को भेजा गया नोटिस- 

जेएनयू प्रशासन ने कार्यक्रम  के आयोजकों और  वक्ताओं को नोटिस भेजकर कार्यक्रम ना करने की सख्त हिदायत दी है. ऐसा ना करने पर कार्रवाई की बात भी कही है लेकिन यूनाइटेड ओबीसी फोरम के छात्र नेता कार्यक्रम करने पर अड़े हैं छात्र नेता दिलीप यादव कहते हैं कि कार्यक्रम हर कीमत पर होकर रहेगा। प्रशासन अपनी तानाशाही पर अड़ा है तो हम भी अपने अधिकारों पर अड़े हैं।

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कार्यक्रम में शामिल होने वाले वक्ताओं एके रामकृष्णन, सौम्यब्रत चौधरी, पत्रकार महेश राठी, प्रदीप शिंदे और जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय को भी कार्यक्रम में शामिल ना होने की हिदायत दी गई है।

ओबीसी फोरम के नेता बोल हर हाल में होगा कार्यक्रम- 

छात्र नेता दिलीप यादव ने फेसबुक पर प्रशासन के तानाशाही रवैये के जवाब में लिखा कि-

आज यूनाइटेड ओबीसी फोरम के छात्र हितो के लिए हो रहे प्रोग्राम को रुकबाने की वाईस चांसलर साहेब पूरी कोशिश कर रहे है.
प्रोग्राम में जो भी स्पीकर आ रहे है उन सबको वीसी ने प्रोग्राम में ना आने की सलाह दी है और बोला अगर आप जाएंगे तो आप लोगो पर कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं कार्यक्रम आयोजकों को भी नोटिस  भेजा गया है।

दिलीप कहते हैं एक बात समझ नही आ रही अरे हम लोग फासीवादी ताकतों के द्वारा छात्रों पर हो रहे हमलों के खिलाफ प्रोग्राम ही तो करा रहे है कौन सा वीसी साहेब के टैंक से लड़ाई कर रहे हैं जो ये प्रोग्राम नही होने देना चाहते.

साथियों आप सब से अपील है प्रोग्राम में बड़ी से बड़ी संख्या में आइये और इस फासीवादी वी सी और सरकार को दिखा दीजिये अगर छात्र हितो का हनन हुआ तो खून बहेगा सडको पर. आज शाम 5 बजे जेएनयू एडमिन ब्लाक

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हाईकोर्ट ने किया है जेएनयू प्रशासन से जवाब तलब- 

जेएनयू प्रशासन द्वारा 4 निलंबित छात्रों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से रोके जाने के मामले में चारों छात्रो ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू के इन चारोंं छात्रों के निलंबन के मामले में जेएनयू प्रशासन से  जवाब-तलब किया है। प्रशासन इसी बात से नाराज होकर इस प्रदर्शन को हर कीमत पर रोक  देना चाहता है।

क्या है मामला- 

दरअसल 26 दिसंबर को जेएनयू में विद्वत परिषद की बैठक के दौरान 9 छात्रों ने हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. छात्रों का आरोप था कि पीएचडी में जो वायवा होता है उसमें ओबीसी-एससी छात्रों के साथ भेदभाव होता है. इसलिए पीएचडी के लिए होने वाले वायवा के अंकों को कम करके उसे लिखित परीक्षा में जोड़ा जाए. इसके अलावा यूजीसी द्वारा पीएचडी के नियमों में बार-बार बदलाव करके ओबीसी-एससी के छात्रों की संख्या कम करने के  लिए की जा रहीं साजिशों का विरोध भी किया था।

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ओबीसी का कोई प्रोफेसर नहीं जेएनयू में –

प्रदर्शन में शामिल छात्र मुलायम सिंह ने बताया कि अब्दुल नासे कमेटी की रिपोर्ट में इस बात को माना गया है कि ओबीसी-एससी के छात्रों के साथ वायवा में भेदभाव किया जाता है इसलिए 100 प्रतिशत वायवा को चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता. मुलायम सिंह ने कहा कि इतने सालों से आरक्षण मिलने के बाद भी जेएनयू कैम्पस में ओबीसी का कोई भी प्रोफेसर क्यों नहीं है? छात्रों ने कहा कि प्रशासन भेदभाव के चलते ओबीसी-एससी के लोगों को ऊपर आने ही नहीं देता.

निलंबित किए गए थे 9 छात्र-

प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ मीटिंग में जबरदस्ती घुसकर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधि और हॉस्टल से निलंबित कर दिया था. इसके बाद छात्रों द्वारा मांग करने पर कि जांच से पहले उन्हे कैसे दोषी ठहराया जा सकता है. छात्रों को अंतरिम रजिस्ट्रेशन की छूट दे दी गई थी.

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इसके बाद इन सभी नौ छात्रों को प्रशासन ने कमेटी की जांच रिपोर्ट भेजी थी. जांच में सभी को बताया गया था कि उनके ऊपर लगे अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए गए हैं. इसलिए 8 जून तक आप सभी लोग अपने जवाब प्रॉक्टर ऑफिस में उपलब्ध करा दें.

ये है सामाजिक न्याय के सिपाही-

छात्र बिरसा, अंबेडकर, फुले स्टूडेंट एसोसिएशन (बाप्सा) और यूनाइडेट ओबीसी स्टूडेंट फोरम से जुडे हैं। शकील अंजुम, मुलायम सिह यादव, दिलीप कुमार यादव. दिलीप कुमार, भूपाली विट्ठल, मृत्युंजय सिंह यादव, दावा शेरपा, एस राहुल औऱ प्रशांत कुमार पर आरोप तय किए गए थे।

इनमें से 4 छात्रों ने फाइन जमा करने से मना कर दिया था- 

बाएं से दाएं  प्रशांत कुमार , दिलीप यादव , मुलायम सिंह , शकील अंजुम ने फाइन जमा करने के बजाए संघर्ष का रास्ता चुना और हाईकोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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छात्र संघ मोहित पांडेय पर भी 20 हजार का जुर्माना-

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पर पिछले साल अक्टूबर माह में कब्जा करने का आरोप लगाकर प्रशासन ने छात्र संघ अध्यक्ष मोहित पांडेय, उपाध्यक्ष अमल पीपी, सचिव सतरूपा चक्रवर्ती के अलावा तबरेज, उमर खालिद व सुरेश के ऊपर 20-20 हजार का जुर्माना लगाया था, और हास्टल के स्थानांतरण का आदेश दिया है।

छात्र संघ अध्यक्ष मोहित पांडेय को दो जून को प्रशासन ने नोटिस दिया था। जिसके जवाब में उन्होनें अपील की थी कि छात्र संघ अध्यक्ष होने के नाते उन्हें भी अपना पक्ष रखने दिया जाए। विवि प्रशासन ने उनकी अपील ठुकरा दी और 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। छात्रों को हास्टल के स्थानांतरण का भी आदेश मिला है। जुर्माना नहीं चुकाने पर उनका नामांकन रद कर दिया जाएगा।

छात्र संघ अध्यक्ष मोहित पांडेय का इस बार में कहना है कि विवि प्रशासन द्वारा हम लोगों के खिलाफ सात जांच कराई जा रही हैं। यदि सभी में 20-20 हजार रुपये का जुर्माना कर दिया जाएगा तो हम 1,40,000 रुपये कहा से देंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन उनकी आवाज दबाना चाहता है। इसलिए हम किसी कीमत पर जुर्माना नहीं जमा करेंगे।

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