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एक निष्काम कर्मयोगी की तरह काम करने वाले ऑफीसर, यशकायी पीएन सिंह की याद में शोकसभा आज

लखनऊ, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

बात इसी साल के अक्टूबर माह की है  मैं अपनी मां के ऑपरेशन के लिए लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानि ( SGPGI) में था। मेरी मां ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थीं और मैं उनकी देखभाल के लिए उनके साथ पीजीआई में ही रह रहा था।

पीजीआई में एक बेहद ही भले और सामाजिक इंसान हैं डॉ. केके सचान। उन्होंने पीजीआई में रहने के दौरान मेरी काफी मदद भी की थी। इसलिए मैं अक्सर फ्री टाइम में उनसे मिलने चला जाता था।

तारीख ठीक-ठीक याद नहीं हां समय कोई रात्रि के 8 बजे का होगा। मैं डॉ. केके सचान से मिलने के लिए पीजीआई की इमरजेंसी गया हुआ था। उसी समय मैंने देखा कि इमरजेंसी के गेट पर बेसिक शिक्षा विभाग के ज्वाइंट सेकेट्री पीएन सिंह साहब व्हील चेयर पर बैठे हुए हैं।

चेयर की एक तरफ उनके पुत्र डॉ. वेद प्रकाश सिंह और एक तरफ उनके दामाद थे। चेहरे से ही पीएन सिंह साहब बेहद बीमार लग रहे थे। थोड़ा दिमाग में जोर डालने पर उन्होंने मुझे पहचाना और मेरा परिचय अपने पुत्र को दिया। इसके बाद मुझे जानकारी हुई कि उनको केजीएमयू में डायलिसिस कराने के बाद अब पीजीआई एडमिट करने के लिए लाया गया है।

इसी बीच में डॉ. केके सचान अपनी ड्यूटी टाइम के हिसाब से आते देखे। मैं उनके पीछे-पीछे गया और अनुरोध किया सर पीएन सिंह साहब बेहद ही अच्छे और सामाजिक अधिकारी हैं। आज वो बीमार हैं वर्ना सचिवालय में उपसचिव रहते हुए आपने खुद ना जाने कितने लोगों को यहां एडमिट भी कराया और यहां के स्टाफ की मदद भी की है।

डॉ. केके सचान मुझसे बोले हां मेरे पास पटेल साहब का फोन आया है केजीएमयू से पीएन सिंह साहब को एडमिट को करना ही है। पटेल साहब से डॉ. सााहब का मतलब था उनके बहनोई एमएल पटेल जी से जो केजीएमयू लखनऊ में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

इसके बाद पीएन सिंह साहब का उपचार प्रारम्भिक तौर पर एक रात के लिए पीजीआई की इमरजेंसी में प्रारम्भ हुआ। जहां से उनको नेफ्रोलॉजी वार्ड में एडमिड किया गया। दोनो किडनी फेल होने की वजह से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया। जीवन और मौत से संघर्ष करते हुए अन्तत: 24 दिसंबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर उनका देहांत हो गया।

इस वृतांत का मकसद सिर्फ इतना था कि उस रात को व्हीलचेयर पर बैठे पीएन सिंह साहब से मुझे आखिरी बार बातचीत का सौभाग्य मिल गया था क्योंकि इसके बाद उनको जो भी देखने आया वो उनसे बात नहीं कर पाया।

एक मिलनसार और बेहद सामाजिक व्यक्ति थे पीएन सिंह – 

इलाहाबाद की कोरांव तहसील के गजनी गांव के रहने प्रभुनारायण सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में ज्वाइंट सेकेट्री के पद पर कार्यरत थे और वर्तमान में अपने परिवार के साथ शारदा नगर योजना रतन खंड लखनऊ में रहते थे।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए करने के बाद उनका चयन सचिवालय सेवा के लिए हो गया था। सिंह साहब उ.प्र. पटेल प्रतिनिधि सभा के संस्थापक अध्यक्ष बनाए गए थे। जिस पर वे स्वास्थ्य खराब होने तक बने रहे।

बेहद सामाजिक व्यक्ति, सादगी से जीवन जीने वाले पीएन सिंह जी को करीब से जानने वालों को ये बात अच्छे से पता है कि सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग, गृह विभाग में रहते हुए आपने सैकड़ों जरूरतमंदों की मदद की है।

फोटो खिचाऊ और मार्केटिंग समाज सेवा से दूर पीएन सिंह साहब लोगों के काम तो करते थे लेकिन उन्होंने उसको महिमामंडित कभी नहीं किया। खामोशी से अपनी नौकरी करना और अपनी क्षमतानुसार लोगों का सहयोग करना यही उनके काम करने का तरीका था।

आखिर उनकी स्मृति में शोकसभा क्यों ?

पीएन सिंह साहब को करीब से जानने वाले अमरेश व अदिति उमराव इस बारे में कहते हैं कि उनके जीवन में तमाम ऐसे संस्मरण हैं जब पीएन सिंह जी ने अपनी क्षमता से आगे बढ़कर लोगों की मदद की। वो भी बिना किसी स्वार्थ या दिखावे से दूर रहकर। इसलिए ऐसे सामाजिक व्यक्ति के जीवन से जुड़े अच्छे कार्यो को याद करना हम सबके लिए प्रेरणाप्रद होगा।

पटेल प्रतिनिधि सभा के सेवा प्रमुख पटेल ज्ञान सिंह कहते हैं कि सरकारी सेवा में रहते हुए भी समाज के प्रति उनका योगदान और उनके द्वारा किए गए कार्य अदि्तीय हैं। दिखावे से दूर और सादगी पसंद पीएन सिंह जी ऑफिस में जो भी सामाजिक व्यक्ति पहुंचा आपने अपनी क्षमता से बढ़कर उसकी निस्वार्थ भावना से मदद की।

इसलिए उनकी याद में 30/12/17 (शनिवार) समय- दोपहर 1 बजे से सायं 3 बजे तक, स्थान- कैफी आजमी अकादमी पेपर मिल कालोनी, गुरुद्वारा रोड, निशातगंज, लखनऊ में शोकसभा आयोजित की जा रही है। 

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