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जिस जज पर लगाए थे जस्टिस कर्णन ने भ्रष्टाचार के आरोप उसी जस्टिस को सौंप दिया कर्णन का केस !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 जून) को कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति सी एस कर्णन के उस आग्रह पर विचार करने से इंकार कर दिया जिसमें उन्होंने अंतरिम जमानत दिए जाने तथा अदालत की अवमानना की वजह से स्वयं को सुनाई गई छह माह की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।

यहां तक तो खबर ठीक है लेकिन आगे की खबर ये है कि दो सदस्यीय बेंच में शामिल जस्टिस एस के कौल वही शख्स हैं जिन पर जस्टिस कर्णन काम ना करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं वो भी साधारण ढ़ंग से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर. पीएम मोदी को लिखे पत्र मे जिन 20 जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था उनमें जस्टिस कौल का नाम नम्बर एक पर था. यानि कि जिस पर जस्टिस कर्णन ने आरोप लगाए थे उनका केस सुनने के लिए उसी जज की बेंच में मामला भेज दिया गया.

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कौल का सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के खिलाफ थे जस्टिस कर्णन-

जस्टिस कर्णन ने साल 2015 में मद्रास हाईकोर्ट को मुश्किल में डाल दिया था जब उन्होंने चीफ जस्टिस संजय के कौल के खिलाफ अवमानना का केस करने की धमकी दी थी। कौल को कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव दिया है। कर्णन ने कौल पर काम न करने का आरोप लगाया था और दूसरे जज की शैक्षिक योग्यता पर सवाल खड़े किए थे। जस्टिस कर्णन ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जाति की वजह से भेदभाव का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उन्हें दलित की वजह से प्रताड़ित कर रहे हैं।

क्या कहा जस्टिस कौल ने –

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस के कौल की बेंच ने कहा कि इस मामले में सात जजों की बेंच का आदेश मानना कोर्ट का दायित्व है और कर्णन को चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष यह मामला बताना चाहिए। दो जजों की बेंच ने कहा कि सात जजों की बेंच पहले ही आदेश पारित कर चुकी है और केवल संवैधानिक बेंच ही अपील सुन सकती है। कर्णन की ओर से पेश अधिवक्ता मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने कहा कि अदालत के पास सभी अधिकार हैं और उसे तब तक के लिए कर्णन को अंतरिम जमानत देना चाहिए जब तक अदालत फिर से नहीं खुल जाती। इस पर दो जजों की बेंच ने कहा कि वह सात जजों की बेंच के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

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इतिहास में पहली बार हो रहा है ये- 

उल्लेखनीय है कि भारतीय न्याय इतिहास में पहली बार किसी सिटिंग जज पर कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे सभी न्यायिक और प्रशासनिक काम पहले ही छीन लिए थे। सुप्रीम कोर्ट को लिखे गए पत्र में कर्णन ने कहा था कि उनको दलित होने की वजह से निशाने पर लिया जा रहा है। जस्टिस कर्णन को मद्रास हाई कोर्ट से कलकत्ता हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया था।

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20 जजों पर लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप उनमें जस्टिस कौल भी थे- 

जस्टिस कर्णन ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर ‘न्‍यायपालिका में भारी भ्रष्‍टाचार’ के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। इसमें जस्टिस कौल का नाम भी प्रमुखता से था.  23 जनवरी को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कथित ‘भ्रष्टाचारी जजों’ की लिस्ट भी दी थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 20 जजों के नाम थे। मामले को देखते हुए चीफ जस्टिस ने तत्काल इसमें एक्शन लिया और सात जजों की विशेष बेंच गठित कर दी थी. इस बेंच ने ही जस्टिस कर्णन की गिरफ्तारी का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन मेश्राम अपनी वॉल पर लिखते हैं कि बडा ही पेचीदा मामला है। जस्टिस संजय किशन कौल के खिलाफ जस्टिस कर्णन ने भ्रष्टाचार की कंम्पलेंट की है। कंम्पलेंट मे जस्टिस कौल का नाम नं. १ पर है। आज सुप्रीम कोर्ट मे जस्टिस कर्णन को बेल देने के लिये उनके वकील ने मेन्शनिंग की और सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया। आज सुप्रीम कोर्ट के दो जजों मे १ जज जस्टिस संजय किशन कौल थे। जस्टिस कौल के खिलाफ ज. कर्णन ने भ्रष्टाचार की कंम्पलेंट की है जिसकी वजहसे उन्हे न्यायालय के अवमान के लिये ६ महीने की सजा सुनाई गयी। जिन २० जजों के खिलाफ कंम्पलेंट की थी उनमे ज. कौल का नाम नं. १ पर है।

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वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल इस मामले में मुखर होकर लिखते हैं कि –

जस्टिस कर्णन ने जिन बीस जजों के करप्शन के सबूत नरेंद्र मोदी को भेजे थे उनमें पहला नाम संजय किशन क़ौल का था। संजय किशन क़ौल के ख़िलाफ़ जाँच नहीं बिठाई गई। वे पद पर बने रहे। क़ौल ने ही आज जस्टिस कर्णन की बेल की सुनवाई की और उसे ख़ारिज कर दिया।

ब्राह्मण का न्याय। मोदी भी अजीब आदमी है। जिन जजों के ख़िलाफ़ शिकायत की गई थी, उनकी जाँच तो नहीं ही कराई। जाँच का अप्लिकेशन उन्हीं जजों के पास भेज दिया, जिनके ख़िलाफ़ शिकायत थी।

जज भूखे भेड़ियों की तरह कर्णन पर टूट पड़े।

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