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साजिश की बू : जस्टिस कर्णन को सुनाई गई सजा का पूरा फैसला कब तक लिखेंगे मीलॉर्ड?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

जस्टिस कर्णन को छह महीने की सजा भी सुनाई गई. उनको जेल भी भेज दिया गया. लेकिन भारतीय न्यायिक इतिहास में दर्ज होने वाली अपनी तरह की इस अनोखी घटना का पूरा फैसला अभी तक नहीं लिखा गया मीलॉर्ड? क्या आपकी नजर में एक जस्टिस को सिर्फ कोर्ट की अवमानना के मामले में छह महीने के लिए जेल भेज देना एक साधारण सी घटना है ?

बस आपकी 7 सदस्यीय पीठ ने 9 मई को इतना ही कहा कि जस्टिस कर्णन न्यायालय की अवमानना के दोषी हैं. पूरा फैसला तो बताइए देश को आखिर पता तो चले कि जस्टिस कर्णन को किस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की सजा मिली है.

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21 जून को खारिज कर दी जमानत याचिका- 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 जून) को कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति सीएस कर्णन के उस आग्रह पर विचार करने से इंकार कर दिया जिसमें उन्होंने अंतरिम जमानत दिए जाने तथा अदालत की अवमानना की वजह से स्वयं को सुनाई गई छह माह की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी.

जिस जज  पर लगाए आरोप उसी ने सुना केस- 

हैरत की बात ये कि दो सदस्यीय बेंच में शामिल जस्टिस एस के कौल वही शख्स हैं जिन पर जस्टिस कर्णन काम ना करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं वो भी साधारण ढ़ंग से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर. पीएम मोदी को लिखे पत्र मे जिन 20 जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था उनमें जस्टिस कौल का नाम नम्बर एक पर था. यानि कि जिस पर जस्टिस कर्णन ने आरोप लगाए थे उनका केस सुनने के लिए उसी जज की बेंच में मामला भेज दिया गया.

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अब ये बात सामने आ रही है कि जस्टिस कर्णन को जो सजा सुनाई गई है उसका पूरा फैसला ही नहीं दिया गया है. अब बड़ा सवाल ये है कि जब तक पूरा फैसला नहीं सुनाया जाएगा तब तक जस्टिस कर्णन अपने बचाव में फैसले की रिव्यू के लिए भी पिटीशन फाइल नहीं कर सकते. बुधवार को जस्टिस कर्णन की ओर से पेश अधिवक्ता मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने कहा कि अदालत के पास सभी अधिकार हैं और उसे तब तक के लिए कर्णन को अंतरिम जमानत देना चाहिए जब तक अदालत फिर से नहीं खुल जाती। इसके अलावा वकील ने पूरा जजमेंट सुनाने की मांग भी की.

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल फेसबुक पर लिखते हैं  कि-

आपका फ़ैसला कहाँ है मीलॉर्ड?

सुप्रीम कोर्ट ने एक लाइन में जस्टिस कर्णन को दोषी क़रार दिया और उन्हें सज़ा सुना दी। लिखा कि पूरा फ़ैसला बाद में आएगा।
यह 9 मई को हुआ। वह फ़ैसला कहाँ है? 40 दिन से ज़्यादा हो गए। देश को पता तो चले कि जस्टिस कर्णन का अपराध क्या है?
कई वकीलों का मानना है कि वह फ़ैसला कभी नहीं आएगा। क्योंकि उसमें लिखना पड़ेगा कि जस्टिस कर्णन ने अपनी शिकायत में लिखा क्या था। यह न्यायिक इतिहास का पहला आदेश है, जिसमें जजमेंट लिखा ही नहीं गया।

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कौल का सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के खिलाफ थे जस्टिस कर्णन-

जस्टिस कर्णन ने साल 2015 में मद्रास हाईकोर्ट को मुश्किल में डाल दिया था जब उन्होंने चीफ जस्टिस संजय के कौल के खिलाफ अवमानना का केस करने की धमकी दी थी। कौल को कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव दिया है। कर्णन ने कौल पर काम न करने का आरोप लगाया था और दूसरे जज की शैक्षिक योग्यता पर सवाल खड़े किए थे। जस्टिस कर्णन ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जाति की वजह से भेदभाव का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उन्हें दलित की वजह से प्रताड़ित कर रहे हैं।

सात जजों की पीठ थी लेकिन पूरा फैैसला अभी तक नहीं लिखा- 

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस के कौल की बेंच ने बुधवार को जस्टिस कर्णन की जमानत पर फैसला सुनाते हुए  कहा कि इस मामले में सात जजों की बेंच का आदेश मानना कोर्ट का दायित्व है और कर्णन को चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष यह मामला बताना चाहिए। दो जजों की बेंच ने कहा कि सात जजों की बेंच पहले ही आदेश पारित कर चुकी है और केवल संवैधानिक बेंच ही अपील सुन सकती है। कर्णन की ओर से पेश अधिवक्ता मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने कहा कि अदालत के पास सभी अधिकार हैं और उसे तब तक के लिए कर्णन को अंतरिम जमानत देना चाहिए जब तक अदालत फिर से नहीं खुल जाती। इस पर दो जजों की बेंच ने कहा कि वह सात जजों की बेंच के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

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20 जजों पर लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप उनमें जस्टिस कौल भी थे-

जस्टिस कर्णन ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर ‘न्‍यायपालिका में भारी भ्रष्‍टाचार’ के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। इसमें जस्टिस कौल का नाम भी प्रमुखता से था. 23 जनवरी को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कथित ‘भ्रष्टाचारी जजों’ की लिस्ट भी दी थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 20 जजों के नाम थे। मामले को देखते हुए चीफ जस्टिस ने तत्काल इसमें एक्शन लिया और सात जजों की विशेष बेंच गठित कर दी थी. इस बेंच ने ही जस्टिस कर्णन की गिरफ्तारी का आदेश दिया था.

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