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देश भर से उठने लगी है जस्टिस कर्णन के समर्थन में आवाज, तमिलनाडु के बाद हैदराबाद में प्रदर्शन

नई दिल्ली/हैदराबाद। नेशनल जनमत ब्यूरो

दलित समुदाय से आने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस सीएस कर्णन की गिरफ्तारी ने देश में और सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है. सोशल मीडिया पर सक्रिय सामाजिक चिंतक इस बात पर एकमत दिखाई दे रहे हैं कि इस देश में ब्राह्मणवादियों नें संविधान में दिए गए समता, स्वतंत्रता, न्याय, वंधुत्व जैसे मानवीय विचारों की हत्या कर दी है और ये देश को मनु के संविधान मनुस्मृति की तरफ ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.

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वहीं पूरे देश में लोगों में इस बात को लेकर भी रोष पनप रहा है कि दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले लोग और दल क्यों शांत बैठे हैं. क्यों नहीं इस आवाज को विधानसभा से लेकर संसद में उठाया जा रहा है. सवर्णों के खिलाफ लड़ने की एक दलित जज को इतनी बड़ी सजा भुगतनी होगी. इन सब मागों के बीच में से ही पूरे देश में जस्टिस कर्णन के समर्थन में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. तमिलनाडु की दीवारों पर पोस्टर लगाने के बाद हैदराबाद के लोगों ने भी जस्टिस कर्णन के समर्थन में आवाज बुलंद की है.

फैसले पर विचार करने की मांग- 

हैदराबाद में प्रदर्शन और कैंडिल मार्च में शामिल लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के पैनल से अपने फैसले पर विचार करने की मांग की. इसके बाद वीसीके पार्टी के नेता तिरुमावाला ने एक प्रेस कांफ्रेस करके मांग की कि आर्टिकल 72 1 ( b) के तहत सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले को वापस लेने का अधिकार है. सर्वोच्च अदालत को देश वासियों की भावनाओं को देखते हुए इस मांग को मानना चाहिए.

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इंडियन लायर्स एसोसिएशन, हेल्प डेस्क और एससी-एसटी लॉयर्स एसोसिएशन के बैनर तले कोयंबटूर में आयोजित कैंडल मार्च और प्रदर्शन में शामिल वकील भीम राव ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर विचार नहीं करता हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा. भीम राव ने बताया कि विभिन्न सामाजिक संगठन राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे.

तमिलनाडु में लगे पोस्टर- 

तमिलनाडु में लोगों  इस न्याय के योद्धा के लिए दीवारों पर जस्टिस कर्णन के समर्थन में पोस्टर लगाए हैं. भारतीय न्यायिक इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है, जब किसी जस्टिस का पोस्टर बनाकर उसे आंदोलन का रूप दिया जा रहा है. सड़कों पर समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं. वकीलों ने रैलियाँ निकालीं हैं.

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पोस्टर में तमिल भाषा में यह लिखा है-

जस्टिस सी. एस. कर्णन गिरफ़्तार हो गए।
क्या यह न्याय है?
जवाब दो।
एक तरफ़ दिखावे के लिए एक दलित को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया. दूसरी तरफ़ सत्य के प्रहरी जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार कर लिया गया.संसद और विधानसभाओं के दलित सांसदों और विधायकों, तुम्हें धिक्कार है। शर्म करो।

दलित होकर भी सवर्ण जजों के भष्ट्राचार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा-

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले जस्टिस कर्णन देश में हाईकोर्ट के पहले जस्टिस हैं जिनको सेवानिवृत्त होने के बाद गिरफ्तार किया गया है. कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस कर्णन का कसूर बस इतना था कि दलित होकर भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 20 जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच की मांग की थी. अब देश की न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे पुराधाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले जज को ही 6 महीने की सजा सुना दी. अब जस्टिस कर्णन के समर्थन मे लाखों लोग आन्दोलन की रूप रेखा बना रहे है .

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