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जानिए मोरनी को आंसू पिलाकर गर्भवती करने वाले शर्मा जी जैसे जज बनते कैसे हैं?

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत)

जस्टिस महेश चंद्र शर्मा 31 मई को राजस्थान हाईकोर्ट से रिटायर हो गए लेकिन जाते-जाते जज साहब इतना बड़ा धमाका कर गए कि ट्विटर से लेकर फेसबुक तक और समाचार पत्र से लेकर न्यूज चैनल तक सिर्फ उन्ही की चर्चा है. हो भी क्यों ना जज साहब ने इतने सारे खुलासे जो कर दिए हैं. दरअसल जज साहब ने अपना ज्ञान उड़ेलते हुए यहां तक कह डाला कि मोरनी मोर के आंसु पीकर गर्भवती हो जाती है.इ

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पहले पढ़िए क्या कह गए शर्मा जी-

जस्टिस साहब बोले हमने मोर को राष्ट्रीय पक्षी क्यों घोषित किया. क्योंकि मोर आजीवन ब्रह्मचारी रहता है. इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुग कर गर्भवती होती है. मोर कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता. मोर पंख को भगवान कृष्ण ने इसलिए लगाया क्योंकि वह ब्रह्मचारी है. साधु संत भी इसलिए मोर पंख का इस्तेमाल करते हैं. मंदिरों में इसलिए मोर पंख लगाया जाता है. ठीक इसी तरह गाय के अंदर भी इतने गुण हैं कि उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।’ इसको उन्होंने अन्तर्रात्मा की आवाज बताया.

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यहां ये जानना जरूरी है कि जस्टिस शर्मा द्वारा मोर को लेकर कही गई बात सिर्फ एक मिथक है.मोरनी मोर के साथ सहवास करके ही गर्भवती होती है.

अब जानिए शर्मा जी की जन्म कुंडली-

1 जनवरी 1955 को इनका जन्म हुआ. दौसा राजस्थान से बीएससी किए और राजस्थान वि.वि. से कानून की पढ़ाई की.

जनवरी 1979 में वकील के तौर पर प्रेक्टिस आरंभ कर दी.

महाराजा सवाई मानसिंह ट्रस्ट, पिंकसिंटी प्रेस क्लब, राजस्थान पत्रिका और हिन्दुस्तान टाइम्स के वकील रहे.

7 जनवरी 1979 को इन्होंने बार कौंसिल ऑफ राजस्थान में वकील के तौर पर पंजीकरण करवाया

2000 में कांग्नेस सरकार में अतिरिक्त महाधिवक्ता के तौर पर नियुक्त हुए.

वहीं 5 जुलाई 2007 को इन्हें वकील कोटे से हाईकोर्ट का जज बना दिया गया.

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शर्मा जी जज कब और कैसे बने-

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन मेश्राम सवाल उठाते हुए कहते हैं. महेश चंद्र शर्मा 5 जुलाई 2007 को राजस्थान हाईकोर्ट में जज नियुक्त किए गए. 12 अक्टूबर 2005 से 15 जुलाई 2007 तक यानि शर्मा जी की नियुक्ति होने के समय तक राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे झां साहब यानि जस्टिस एस एन झां.

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बस फिर क्या था कॉलोजियम सिस्टम की जय हो. कोलोजियम सिस्टम के आधार पर जज साहब और उनके चार जजों के पैनल ने शर्मा जी को बुला लिया. जब यह प्रक्रिया शुरू हुई उस समय सुप्रीम कोर्ट में भी वाई एस संभरवाल साहब चीफ जस्टिस थे तो वहां से भी दिक्कत होने का सवाल ही नहीं था. और योग्य मानते हुए शर्मा जी वकील से जज बना दिए गए बात खत्म. अब वही योग्यता शर्मा जी प्रकट कर रहे हैं.

कॉलेजियम सिस्टम पर कई जस्टिस उठा चुके हैं सवाल-

मुझे अपने अनुभवों के आधार पर यह लगता है कि कॉलेजियम में लोग गुट बना लेते हैं. राय और तर्क रिकॉर्ड किए बिना ही चयन हो जाता है. दो लोग बैठकर नाम तय कर लेते हैं और बाकी से ‘हां’ या ‘ना’ के लिए पूछ लेते हैं. कुल मिलाकर कॉलेजियम सबसे अपारदर्शी कार्यप्रणाली बन गई है, इसलिए मैं अब कॉलेजियम की मीटिंग में शामिल नहीं हो पाऊंगा.”

 

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज और संविधान पीठ ‘कॉलेजियम’ के 5 मेंबर्स में से एक, जे. चेल्मेश्वर ने हाल में ही यह बयान दिया था, तो धमाका हो गया था. कॉलेजियम सिस्टम पर उन्होंने पक्षपात करने का आरोप लगाया.

साथ ही कहा कि कुछ लोग ही न्यायपालिका की स्वतंत्रता का फायदा उठा रहे हैं. और तो और, इस प्रणाली में मजबूत मेरिट वाले और लायक लोगों के लिए कोई स्थान नहीं रह गया है.

जानिए कॉलेजियम सिस्टम है क्या-

-देश की अदालतों (सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट) में जजों की नियुक्ति की प्रणाली को ‘कॉलेजियम सिस्टम’ कहा जाता है.
-1993 से लागू इस सिस्टम के जरिए ही जजों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रमोशन का फैसला होता है.
-कॉलेजियम 5 लोगों का एक समूह है. इसमें भारत के चीफ जस्टिस समेत सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जज मेंबर हैं. सीनियर जज जे चेल्मेश्वर इसी समूह में मेंबर हैं.
-कॉलेजियम कथित तौर पर व्यक्ति के गुण-कौशल का मूल्यांकन करता है और उसकी नियुक्ति करता है. फिर सरकार उस नियुक्ति को हरी झंडी दे देती है.
-इस सिस्टम को नया रूप देने के लिए एनडीए सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्त‍ि आयोग (NJAC) बनाया था. यह सरकार द्वारा प्रस्तावित एक संवैधानिक संस्था थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया.
-NJAC में 6 मेंबर रखने का प्रस्ताव था, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ SC के 2 वरिष्ठ जज, कानून मंत्री और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं 2 जानी-
मानी हस्तियों को बतौर सदस्य शामिल करने की बात थी.
– लेकिन इसे यह कहकर रद्द किया गया कि जजों के सिलेक्शन और अपॉइंटमेंट का नया कानून गैर-संवैधानिक है. इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा.

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काटजू ने भी कहा था- चुनकर लिए जाते हैं भ्रष्ट जज-

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने भी अपने ब्लॉग में कॉलेजियम पर तीखी टिप्पणी की थी. उन्होंने लिखा था, इस सिस्टम में ‘एक हाथ दो, एक हाथ लो’ वाला फॉर्मूला चलता है. लोग पक्षपात करते हैं और बाकी लोग अपने फायदे के लिए उसमें शामिल होते हैं. कुछ लोग अपने रिश्तेदारों को भी चुनते हैं. इसलिए अच्छे जज लाने में यह सिस्टम फेल है.

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