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सिर्फ न्यायपालिका में ही नहीं, शर्मा जी जैसे ब्रह्मचारी मोर देश के हर सिस्टम में नाच रहे हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

पिछले दिनों राजस्थान हाईकोर्ट के जज एम.सी शर्मा ने अपने रिटायरमेंट के आखिरी दिन अजीबोगरीब फैसले सुनाकर पूरी मीडिया का ध्यान आकर्षित किया था. जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि मोर सेक्स से नहीं बल्कि आंसुओं से बच्चे पैदा करता है. मोर ब्रह्मचारी पक्षी है इसलिए उसे भारत का राष्ट्रीय पक्षी बनाया गया है.

इस बेतुकी बयानबाजी के बाद ना सिर्फ जस्टिस शर्मा का मजाक बनना शुरू हुआ बल्कि न्यायपालिका की योग्यता पर भी प्रश्न चिह्न उठ गया. मोर के बहाने इसी विमर्श को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक चिंतक और इंडिया-स्विटजरलैंड के संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर SANJAY SHRAMAN JOTHE (https://www.facebook.com/sanjay.jothe) अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि…

न्यायपालिका का नाचता मोर देश का दुर्भाग्य है- 

अभी आपने न्यायपालिका में नाचते हुए मोर को देखा. इस बात को गंभीरता से लीजिये, ये मजाक नहीं है. ये भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि कम से कम ज्ञात एक हजार साल से भारत सबसे अकुशल, मंदबुद्धि, षडयंत्रकारी, अन्धविश्वासी, अमानवीय और असभ्य लोगों के द्वारा चलाया जाता रहा है.

जाति या वर्ण विशेष को केंद्र में रखना हालाँकि अशोभन है लेकिन ये बात अब उठानी जरुरी हो गयी है कि भारत पर अब तक राज करने वाले लोगों और उनके धर्म, उनके वर्ण, उनकी जाति और उनकी संस्कृति का भारत की दुर्दशा में क्या योगदान रहा है.

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जिन तीन वर्णों पर देश की जिम्मेदारी थी उन्होंने देश के लिए क्या किया-

ये एक नया तरीका है, नया नजरिया है. इस नजरिये से देखेंगे तो ही आप न्यायपालिका, कार्यपालिका और खबरपालिका में नाचते ब्रह्मचारी मोर को समझ सकेंगे वरना आप समझ ही नहीं सकेंगे कि हजारों साल से ये मुल्क गड्ढे में क्यों गिरता जा रहा है.

-इस देश की रक्षा की जिम्मेदारी जिन्हें दी गयी उनसे पूछिए कि भारत गुलाम क्यों हुआ?
-इस देश को शिक्षित करने की जिम्मेदारी जिन्होंने ली उनसे पूछिए कि भारत की न्यायपालिका में ब्रह्चारी मोर क्यों नाच रहा है? भारत अनपढ़   औरअन्धविश्वासी क्यों हुआ?
-इस देश के व्यापार की जिम्मेदारी जिन्होंने ली उनसे पूछिए ये देश गरीब और बेरोजगार क्यों है?

इन तीनों ऊपर के वर्णों से पूछिए वे इतने निकम्मे और अयोग्य क्यों साबित हुए? उन्होंने भारत को गुलाम गरीब और अन्धविश्वासी, अनपढ़ क्यों बनाया?

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ब्राह्मणवाद ने आज देश का ये हाल कर दिया है-

भारत की दुर्दशा को ठीक से समझिये. यहाँ कम से कम ज्ञात हजार सालों से सनातन द्विज मेरिट वालों की सत्ता रही है. सरकार, शासन प्रशासन
न्यायपालिका आदि जिनके नियन्त्रण में है उन्हें और उनके धर्म को देखिये. …ये आज ही नहीं हजारों साल से यही कर रहे हैं.

अभी सरकारों, ब्यूरोक्रेसी, प्रशासन, पुलिस, न्यायपालिका में जो लोग सर्वोच्च सत्ता और शक्ति हथियाए हुए हैं उनके सरनेम और वर्ण देखिये, सब
ब्राह्मण हैं, या अन्य सवर्ण द्विज हैं, उन्हें एक ख़ास तरह का आरक्षण मिला हुआ है.

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जब तक अघोषित आरक्षण है भारत सभ्य नही हो सकता-

अन्य जातियों वर्णों से भी जो लोग आये हैं वे स्वतंत्र नहीं हैं, उन्हें भी इन द्विजों के इशारों पर काम करना पड़ता है. ऐसे अन्य मुख्य नामों को चलाने वाले संगठन और धार्मिक सांस्कृतिक आग्रह भी देखिये वे सब सवर्ण द्विजों के धार्मिक सिद्धांतों के विस्तार मात्र हैं. इस नजरिये से इन लोगों को एक सनातन आरक्षण मिला हुआ है. ये जब तक खत्म नहीं होता तब तक न भारत सभ्य होगा न समर्थ होगा…

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भारत के इन सनातन दुश्मनों को बेनकाब करने के लिए इनके वर्ण और इनके धर्म पर सवाल उठाना जरुरी है अब. इन्हें भ्रष्ट या अकुशल कहने से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.

ब्राह्मण या स्वर्ण द्विज मित्र क्षमा करें … मेरे कई विद्वान् मित्र ब्राह्मण हैं जिनसे मुझे प्रेरणा मिलती है, मैं ब्राह्मण जाति के खिलाफ नहीं बल्कि ब्राह्मणवाद के खिलाफ लिख रहा हूँ.

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