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सेना के शौर्य का श्रेय लेने वाली मोदी सरकार ने की रक्षा बजट में कटौती, सैनिकों को खुद खरीदनी होगी वर्दी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण करके सेना के शौर्य को अपने महिमामंडन के लिए इस्तेमाल करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन काल में सेना के बजट में ही कटौती की जा रही है।

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर को मानें तो बजट की मौजूदा स्थिति में सैनिकों को अपनी वर्दी, जूते, बेल्ट जैसे जरूरी सामान अपने खर्च पर सामान्य बाजार से खरीदने होंगे।

गोला-बारूद के नाम पर बचाया जा रहा बजट- 

केंद्र द्वारा अतिरिक्त बजट न देने के कारण आपातकालीन स्थिति में काम आने वाले गोला-बारूद के लिए फंड बचाने के चलते सेना सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्टरियों पर ख़र्च किए जाने वाले बजट को कम कर रही है.

भारतीय सेना ने सरकारी ऑर्डनेन्स (आयुध) फैक्ट्री से ली जाने वाली सप्लाई के लिए अपने बजट में भारी कटौती की है, जिसके चलते सैनिकों को होने वाली वस्तुओं की सप्लाई जैसे यूनिफॉर्म, बेरेट्स (टोपी), बेल्ट आदि प्रभावित होगी.

अख़बार की इस रिपोर्ट के अनुसार आपातकालीन या छोटे युद्ध की स्थिति में काम आने वाला गोला-बारूद खरीदने के लिए फंड बचाने के चलते सेना आयुध फैक्ट्री पर होने वाले खर्च के बजट में भारी कटौती कर रही है.

आयुध फैक्ट्री से होने वाले सामान की सप्लाई के बजट को 94 फीसदी से 50 फीसदी पर लाया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल होने वाले गोला-बारूद के लिए अतिरिक्त बजट नहीं दिया गया है.

सेना के उच्चाधिकारियों का तर्क- 

इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सेना गोला-बारूद का स्टॉक बनाने के लिये तीन बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और इसके लिए हजारों करोड़ के बजट की जरूरत है. केंद्र द्वारा बजट न देने की वजह से सेना इस जरूरत को पूरा करने के लिए अपने तरीके से इसके लिए न्यूनतम बजट जुटाने को मजबूर है.

बताया जा रहा है कि आयुध फैक्ट्री पर खर्च होने वाले बजट को कम करने से जवानों की वर्दी आदि जैसी जरूरतों की सप्लाई प्रभावित होगी. साथ ही हो सकता है कि कई गाड़ियों के पुर्जों की खरीद पर भी इस बजट कटौती का असर पड़ेगा.

सेना अधिकारी ने यह भी बताया कि इस साल मार्च में आयुध फैक्ट्री की सप्लाई में शुरुआती कटौती की गयी थी. उन्होंने बताया, ‘आयुध फैक्ट्री के 94 प्रतिशत सामान की सप्लाई सेना को होती है. हमने इसे 50 प्रतिशत पर लाने का फैसला किया है.’

बीते दिनों सेना के इस कदम के खिलाफ आयुध फैक्ट्रियों ने प्रदर्शन किया था. सेना के उच्च अधिकारी ने रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिलकर उन्हें इसकी वजह भी बताई थी, लेकिन फिर भी इस कदम से सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि इन फैक्ट्रियों और कई अन्य छोटे और मझोले उद्योगों के पास सेना के पिछले ऑर्डर्स हैं, जिसको लेकर वे विवाद खड़ा सकते हैं.

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