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GST से नाराज केरल की छात्राओं ने अरुण जेटली को भेजे सेनिटरी पैड, बोलीं स्वच्छता अभियान दिखावा है

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

1 जुलाई से जीएसटी लागू होते ही मोदी सरकार के खिलाफ व्यापारियों के साथ अब आम लोगों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। मोदी सरकार एक तरफ तो स्वच्छ भारत अभियान का महिमामंडन करती है दूसरी तरफ महिलाओं की स्वच्छता से जुड़ी सबसे जरूरी चीज को ही जीएसटी के दायरे में लाकर मंहगा कर दिया है। इससे नाराज होकर केरल की छात्राओ ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को सेनिटरी पैड पोस्ट किए हैं।

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ये कमाल की बात है कि सोने के बिस्कुट पर 5 फीसदी जीएसटी लगाया गया है पर खाने वाले बिस्कुट पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया गया है। इसी तरह हवाई यात्रा पर सिर्फ 5 फीसदी जीएसटी है पर ट्रेन यात्रा पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया गया है।

कफन और  सेनिटर नैपकिन को भी नहीं छोडा- 

इसके अलावा मोदी सरकार ने कफन औऱ महिलाओं द्वारा इस्तेमाल सेनिटरी नैपकिन को भी जीएसटी के दायरे में ला दिया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार की काफी आलोचना हो रही है। मोदी सरकार द्वारा सेनिटरी नैपकिन को जीएसटी के दायरे में लाने से केरल की महिलाओं में खासी नाराजगी है।

केरल की सत्तारूढ़ पार्टी सीपीआई (एम) के छात्र संघ स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकताओं ने ‘ब्लीड विदाउट फियर, ब्लीड विदाउट टैक्स’ स्लोगन के साथ नैपरकिन पर टैक्स लगाने के विरोध में में वित्त मंत्री अरुण जेटली को डाक से सेनिटरी नैपकिन भेजे हैं। सेनिटरी पैड पर कर लगाने के खिलाफ राज्यभर में कई कॉलेजों के परिसरों में एसएफआई ने प्रदर्शन किया।

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एसएफआई की केंद्रीय समिति की सदस्य खादीजथ सुहेला ने यहां विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। राज्य के अन्य हिस्सों में आयोजित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में कई जिला और प्रदेश स्तर के नेताओं ने भाग लिया। गौरतलब है कि सेनिटरी नैपकिन पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया गया है।

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