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जिस खादी पर अंग्रेजों ने भी कभी TAX नहीं लगाया था, अब GST लगा दिया खादी के स्वयंंभू ‘BRAND AMBASSADOR’ PM मोदी ने

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था कि अगर गांधी जी खादी के ब्रांड अम्बेसडर थे तो आज नरेंद्र मोदी खादी के नए ब्रांड अम्बेसडर हैं. लेकिन उन्हीं खादी के ब्रांड अंबेसडर पीएम मोदी की सरकार ने बदहाल खादी ग्रामोद्योग की स्थिति सुधारने के बजाए खादी पर 12 प्रतिशत तक जीएसटी लागू कर दिया। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

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आजाद भारत में पहली बार लगा खादी पर टैक्स- 

स्वतंत्र भारत में यह पहला मौका है, जब खादी पर टैक्स ‘जीएसटी’ लगाया गया है। एक तरफ हमारा देश चंपारण सत्यागह शताब्दी वर्ष मना रहा है, तो दूसरी ओर गांधी की खादी पर टैक्स लगाया जा रहा है। कहा गया है कि टैक्स इस प्रकार लगाया जाना चाहिए, जिससे इसका बोझ महसूस भी न हो और सरकार को राजस्व भी मिलता रहे।

मगर खादी के साथ ऐसा नहीं हुआ है। इस पर टैक्स लगने से बुनकर भी परेशान हैं और खादी पहनने वाले भी। बुनकरों को न तो कच्चा माल मिल रहा है और न ही उनके कपड़े बाहर जा पा रहे हैं। ऐसे में खादी अन्य कपड़ों से कैसे प्रतिस्पर्धा कर पाएगी ? एक अनुमान के अनुसार, खादी उद्योग 75 प्रतिशत प्रभावित हो चुका है।

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सोशल मीडिया पर वाहवाही कर लेती है सरकार- 

कानपुर निवासी अमित कटियार लिखते हैं कि वर्तमान सरकार सिर्फ सोशल मीडिया पर ही सक्रिय है, और वहां अपना गुणगान कर रही है। ऐसा लगता है कि वह तकनीकी एक्सपर्ट की सहायता से अपने प्रचार के लिए तरह-तरह के विज्ञापन बनाती है और फिर उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करवाया जाता है। सरकार का यह रवैया गलत है। इससे माहौल खराब हो रहा है। एक तरफ पीएम खादी को प्रमोट करने के नाम पर चरखा चलाकर फोटो खिंचाते हैं दूसरी तरफ उसी खादी को मंहगा कर रहे हैं।

सीधा असर रोजगार पर-

खादी पर 5 से 12 प्रतिशत तक लगे जीएसटी ने खादी बुनकरों की नींद को काफूर कर दिया है। खादी की कताई में दो जून की रोटी कमाने वाली बस्सी निवासी मीरा महावर ने बताया कि जब खादी महंगी हो जाएगी तो उसके खरीदार भी घट जाएंगे, जिसका सीधा असर उनके रोजगार पर दिखाई देगा। इसी तरह दामोदर महावर का कहना है कि खादी का कपड़ा हाथ से काता जाता है, जिससे अन्य कपड़े के मुकाबले उसकी दर अधिक होती है। यदि जीएसटी की दर कम नहीं हुई तो खादी का कारोबार ही खत्म हो जाएगी।

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अब स्टेटस सिम्बल बन गया खादी

आजादी के संघर्ष के दौरान सभी गरीब लोगों को पहनने का कपड़ा मिले, कोई भी व्यक्ति बिन कपड़ों के नहीं रखे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर महात्मा गांधी ने खादी का प्रयोग शुरू हुआ था, जो कालान्तर में तेजी से बढ़ता गया। बाद का एक दौर ऐसा आया, जिसमें खादी का कपड़ा स्टेटस सिम्बल बन गया, लेकिन अब खादी पर जीएसटी का अतिरिक्त भार आने से खादी की बिक्री पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है।

कांग्रेस के प्रदेश संगठन सचिव और किसान नेता तरुण पटेल कहते हैं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस खादी पर अंग्रेजों ने टैक्स नहीं लगाया, उस खादी पर आज मोदी सरकार ने जीएसटी लगाकर बापू की खादी को खत्म करने की साजिश रची है। खादी की कताई, बुनाई और बिक्री से मुख्य रूप से समाज का गरीब तबका जुड़ा रहता है, लेकिन सरकार खादी के बहाने गरीब लोगों को भी समाप्त करने का कुचक्र रच रही है।

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खादी आयोग ने किया जीएसटी हटाने का अनुरोध- 

हमने सरकार को निवेदन किया है कि खादी को जीएसटी से मुक्त किया जाए। आयोग की इस सन्दर्भ में सरकार से वार्ता हुई है, निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम आएंगे। पूरा विषय सरकार के समक्ष लाया गया है। अवश्य राहत मिलेगी।

-वीके सक्सेना, राष्ट्रीय अध्यक्ष खादी ग्रामोद्योग आयोग, मुम्बई

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