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आखिर किसान नेता हनुमान बेनीवाल से क्यों खौफ खाती है वसुंधरा सरकार

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल 

हनुमान बेनीवाल जैसे निर्दलीय विधायक के कद और बीजेपी-कांग्रेस जैसी पार्टियों का उनसे खौफ खाने का कारण जानने के लिए एक साल पीछे किसान हुंकार महारैली तक जाना होगा. इस महारैली में जाट, मीणा, गुर्जर, मेघवाल, मुसलमान, दूसरी तमाम जातियाँ और यहाँ तक की आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण भी बड़ी संख्या में एकजुट हुए थे.

सब लोगों की नाराजगी थी कि हमारी शासन-सत्ता में हिस्सेदारी क्यों नहीं. आज़ादी के सत्तर साल बाद भी पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों की सरकार क्यों नहीं. इस महारैली में लगभग पाँच लाख लोगों का यह जनसमूह बग़ैर किन्हीं साधनों के ख़ुद अपने खर्चे पर इकट्ठा हुआ था. ऐसे जननेता से वसुंधरा सरकार का खौफ खाना स्वाभाविक ही जान पड़ता है.

राजस्थान में सामाजिक न्याय की आवाज बन गए हैं बेनीवाल-

राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र महला हनुमान बेनीवाल को जननेता बताते हैं. हनुमान बेनीवाल के निलंबन को तानाशाही बताते हुए जितेन्द्र कहते  हैं , ” हनुमान बेनीवाल टीम ने एक बार फिर हुंकार भर दी है. इस बार फिजा बदली-बदली है. किसान हैं, छात्र हैं, मजदूर हैं, दलित हैं, मेघवाल हैं, मुसलमान हैं, मीणा हैं, गुर्जर हैं, जाट हैं और तो और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण भी हैं. सब साथ हैं. सब लोग लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहें हैं. हनुमान बेनीवाल के विधानसभा से निलंबन को रद्द करवाने की लड़ाई लड़ रहें हैं.”

जितेन्द्र आगे लिखते है कि राजस्थान में हनुमान बेनीवाल, संघ और बीजेपी के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा हैं. वे बहुत तेजी से दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, मुसलमानों और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को एक साथ लाने में कामयाब हो रहें हैं .

निलंबन खत्म कराने के लिए दर्जनों संगठन आगे आए- 

30 मई को सिविल लाइंस जयपुर का घेराव करने और 1 जून को किसानों की मांगो के समर्थन में राजस्थान बंद करने के ऐलान के साथ दर्जनों संगठनों ने अपनी सहमति जता दी है. अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति, राष्ट्रीय जाट मंच, किसान बचाओ देश बचाओ समिति, वीर तेजा जी संस्था राजस्थान, संगठनों के अलावा बड़ी संख्या में गूजर, मीणा, जाटव, यादव जातियों के अलावा अन्य कमेरे किसान जातियों के संगठन ने बेनीवाल के समर्थन में आंदोलन में भाग लेने के लिए हामी भरी है.

 

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