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VC त्रिपाठी के राज में अश्लीलता का गढ़ बन गया BHU, पढ़िए एक छात्रा का शर्मसार कर देने वाला पत्र

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के राज में विश्वप्रसिद्ध बीएचयू कैम्पस जातिवाद, अराजकता और अश्लीलता का अड्डा बन चुका है। हैरत कि बात ये है कि प्रो. त्रिपाठी छात्राओं की समस्या सुनने के बजाए उन्ही पर पाबंदी लगाने के दकियानूसी ख्यालात को ज्यादा मुफीद मानते हैं।

शायद यही वजह है कि तीन दिन चले आंदोलन के दौरान छात्राओं से बातचीत करने की बजाए कुलपति महोदय लाठीचार्ज करवाके आंदोलन का दमन करना चाह रहे थे। जब इतने से भी छात्राओं की आवाज नहीं दबाई जा सकी तो जबरन गर्ल्स हॉस्टल खाली कराने के निर्देश दे दिए गए।

रविवार को कुलपति की तरफ से स्पष्ट निर्देश आया कि शाम पांच बजे तक हर हाल में कैम्पस खाली कराकर लड़कियों को घर भेजा दिया जाए। हॉस्टल बार्डेन निर्देश कैसे टाल सकती थीं। छात्राओँ के लिए नियम लागू किया गया कि बिना बैग लिए कैम्पस से बाहर नही जाने दिया जाएगा। जबरन सामान पैक कराया गया और घर भेज दिया गया।

खैर इन सब के बीच एक छात्रा का शिकायती पत्र सामने आया है। जो 21 सितंबर को बीएचयू के चीफ प्राक्टर को दिया गया है। उस पत्र से स्पष्ट है कि छात्राएं यूं ही परेशान नहीं है उनके साथ अश्लीलता की हद तक बदतमीजी की जाती है। पत्र पढ़कर आप खुद समझ जाएंगे कि किस तरह उनके मान, सम्मान, स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई जाती है और बीएचयू प्रशासन मूक दर्शक बना रहता है।

चौथे नम्बर की शिकायत पढ़िए और समझिए कैसे अनपढ़, जाहिल, गंवार और मानसिक रूप से विक्षिप्त पुरुषवादी मानसिकता के बीच फंसी हैं बीएचयू की लड़कियां। कुलपति को क्या समझ में नहीं आता कि MASTURNATION (हस्तमैथुन) क्या होता है?

बीएचयू प्रशासन का शर्मनाक रवैया- 

बीएचयू की छात्राओं ने छेड़खानी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो कौन सी मानसिकता थी जो वीसी ने बात करना बंद कर दिया। लाठीचार्ज शर्मनाक घटना है। क्या सत्ता के दम पर वाइस चांसलर ये बताना चाहते हैं कि लड़कियों का कोई हक नहीं इस लोकतंत्र में ?

लड़कियों से कहा गया कि तुम रेप कराने के लिए रात में बाहर जाती हो । तुम जेएनयू बना देना चाहती हो। मतलब छेड़खानी सहो और उसके ख़िलाफ़ बोले तो ऊपर से चरित्र हनन।

क्या हुआ था उस रात- 

छात्राएं यूं ही सड़क पर नहीं उतर गईं शुक्रवार की रात छात्राओँ को ना सिर्फ अश्लील इशारे किए गए बल्कि एक छात्रा को दबोचने का प्रयास हुआ। उसको आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई। कुलपति महोदय क्या ये साधारण सी घटना है आपके लिए? आप बीएचयू के अभिवावक हैं क्या एक अभिवावक का यही फर्ज है जो आपने निभाया है?

तीन दिन चले धरने में बात तक करने नहीं आए वीसी- 

बावन घंटे तक धरना चला और वीसी बात नहीं कर सके। प्रोक्टोरियल बोर्ड के दफ्तर के सामने किसी लड़की के कपड़े फाड़ने के प्रयास हुए, दबोचा गया, क्या इसे कोई भी समाज इसलिए सहन करेगा क्योंकि वे ‘तेज’ हो गई हैं ! शर्मनाक है।

इन सवालों को टालने की जगह के लिए राजनीति बताना और भी शर्मनाक है। आप जांच करते, बात करते। लाठीचार्ज वो भी लड़कियों पर? क्या हिन्दू मुस्लिम टापिक पर इतना भरोसा हो गया है कि आप समाज को कैसे भी रौंदते चलेंगे और लोग सहन कर लेंगे?

लड़कियों का बीएचयू प्रशासन पर गंभीर आरोप-

-लड़कियों का आरोप है कि जब कुलपति से शिकायत की गई तो उन्होंने कहा, “पीएम का दौरा है। अभी आप सभी लोग शांत रहिए।” उधर प्रोटेस्ट कर रही बीएफए स्टूडेंट आकांक्षा सिंह ने विरोध के दौरान सिर के बाल मुंडवा लिया था। उसका कहना है कि छेड़खानी होते रहे और हर वक्त हम खामोश रहे, ऐसा नहीं हो सकता है।

छात्राओं का आरोप है कि घटना के दौरान गेट पर सिक्‍युरिटी गार्ड तैनात था लेकिन उसने छोड़खानी का विरोध नहीं किया। छात्रा हॉस्‍टल में रहकर पढ़ाई करती है। जब मामले की जानकारी अन्‍य छात्राओं को हुई तो अन्‍य छात्राओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया। मामला बीएचयू प्रशासन तक पहुंचा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इतना ही नहीं कई छात्राओं को हास्‍टल में ही बंद कर दिया गया है और विरोध दबाने की कोशिश की जा रही है। बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय में छात्रा से छेड़खानी को लेकर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, इससे छात्राओं का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

कपड़े तक फाड़ने की धमकी देते हैं-

प्रोटेस्ट कर रही रश्मि ने बताया,”हॉस्टल की खिड़कियों पर लड़के पत्थर में लेटर लिखकर फेंकते है। खिड़कियों पर खड़ा होने पर लड़कियों को अश्लील इशारे करते हैं। विरोध करने पर कहते है, कैंपस में दौड़ाकर कपड़े फाड़ देंगे।

नेहा यादव ने कहा, ” कैंपस में ही लड़के फिजिकली एब्यूज कर रहे है। कपड़े फाड़ने की धमकी तक दी जाती है। कल की घटना के बाद हम सभी को खामोश रहने की चेतावनी दी गयी है। सर्कुलर जारी किया गया है शाम 6 बजे के बाद सुबह में अंधेरे तक लड़कियां ना निकले। ये कैसी आजादी है।

बीएचयू में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ ही आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बीएचयू में हुई नियुक्तियों में जातिवादी खेल को लेकर एससी, एसटी कमीशन के अलावा राष्ट्रपति सचिवालय से नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।

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