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बड़े-बड़े माफियाओं-आतंकवादियों को कैद में रखने वाले, बीआर वर्मा बने DIG जेल, पढ़िए खास बातचीत

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

मुख्तार अंसारी, बबलू श्रीवास्तव समेत छोटा राजन गिरोह के कई खतरनाक गैंगस्टरों को जेल में रखने के बाद भी अपने सुधारात्मक प्रयासों के लिए पहचान बनाने वाले वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीआर वर्मा की प्रोन्नति 12 दिसंबर को उप महानिरीक्षक (DIG) जेल इलाहाबाद परिक्षेत्र के पद पर हो गई है।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक से डीआईजी जेल के पद पर प्रोन्नत होने के खास मौके पर ‘नेशनल जनमत’ के संपादक नीरज भाई पटेल ने उनसे खास बातचीत के आधार पर जेल सर्विस के उनके शानदार 29 साल के सफर के बारे मेें जाना।

बीआर वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के अंबेडकनगर जिले के रुहुल्लाहपुर गांव मेंं कुर्मी किसान स्व. सभापति वर्मा और स्व. राजपति वर्मा के घर में हुआ था। दो बहनों के बीच बीआर वर्मा अकेले भाई थे। आज अंबेडकरनगर समेत पूरे समाज को उनके उपलब्धि पर गर्व है।

शानदार सफर पर एक नजर- 

एलाइड पीसीएस के पद पर चयन होने के बाद 8 अगस्त 1988 को ट्रेनिंग के लिए ज्वाइन किया।

1989- पहली नियुक्ति जिला जेल कानपुर में एडीशनल सुपरिटेंडेंट के पद पर हुई जहां 8 महीने रहे।

1990 से 94- जिला जेल नैनीताल और उपकारागार हल्द्वानी के जेल अधीक्षक रहे।

1994-96- बाराबंकी में जेल अधीक्षक

1996-99- फतेहगढ़ फर्रुखाबाद की जिला जेल में अधीक्षक

1999- में वरिष्ठ जेल अधीक्षक के रूप में प्रोन्नति हुई।

19990-2000- जिला जेल बस्ती में वरिष्ठ जेल अधीक्षक

2000-2005- फतेहगढ़ फर्रुखाबाद की सेंट्रल जेल में वरिष्ठ जेल अधीक्षक

2005 से 2010- सेंट्रल जेल बरेली में वरिष्ठ जेल अधीक्षक

2010 से 2015- सेंट्रल जेल आगरा वरिष्ठ जेल अधीक्षक

2015 से जून 2017- जिला जेल मुरादाबाद में वरिष्ठ जेल अधीक्षक

28 जून 2017 से सेंट्रल जेल नैनी में वरिष्ठ जेल अधीक्षक के पद पर तैनात हैं।

अब सात जेलों की जिम्मेदारी- 

12 दिसंबर को प्रोन्नत होकर इलाहाबाद परिक्षेत्र के उपमहानिरीक्षक जेल। जिसमें इलाहाबाद और बांदा मंडल की 7 जेल आती है। इसके साथ ही आपके पास वर्तमान में नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। 

कुख्यात अपराधी रहे जेल में- 

बीआर वर्मा बताते हैं कि 29 साल की सेवाओं के दौरान कई कुख्यात अपराधियों से सामना हुआ। कई बार धमकियां भी मिलीं, लेकिन मैं कभी डरा नहीं और अपनी जिम्मेदारियों को निडर होकर निभाया।

बरेली जेल में माफिया बबलू श्रीवास्तव, मंजीत सिंह मंगे समेत 27 अंडर ट्रायल संदिग्ध आतंकवादी, फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, जय सिंह, छोटा राजन गिरोह के कई अपराधियों से वास्ता पड़ा।

वहीं सेंट्रल जेल आगरा में कुख्यता गैंगस्टर विधायक मुख्तार अंसारी समेत कई अपराधी रहे। नैनी जेल में भी राजेश पायलट, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शातिर अपराधी उधम सिंह, चर्चित विक्की त्यागी हत्याकांड का आरोपी सागर मलिक समेत, 5-6 अंडर ट्रायल संदिग्ध आतंकवादी हैं।

सरकार और कोर्ट के बीच में कई बार मुश्किल होती है- 

बीआर वर्मा कहते हैं कि नौकरी के दौरान चुनौतियां बहुत रहीं लेकिन कभी परवाह नहीं की। नौकरी के दौरान ऐसे भी मौके आए जब कोर्ट ने कैदी के लिए कुछ और आदेश दिया लेकिन सरकार ने कुछ और चाहती थी। ऐसी स्थिति में काम करने में मुश्किलें आती हैं। कैदियों के भी अपने मानवाधिकार हैं और उसका हमें सम्मान करना चाहिए।

एक घटना का जिक्र करते हुए बीआर वर्मा कहते हैं कि एक बार कोर्ट ने एक गैंगस्टर को चुनाव प्रचार में जाने की अनुमति दे दी। लेकिन तत्कालीन सरकार नहीं चाहती थी कि उस गैंगस्टर को जेल से निकलकर प्रचार करने जाने दिया जाए। ऐसी स्थिति आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होती हैं।

रचनात्मक कार्य वाले कैदियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए- 

बीआर वर्मा कहते हैं कि प्रशासन की सोच हमेशा कैदियों के लिए कल्याण के लिए होनी चाहिए। लेकिन हां ये भी ध्यान  रखना होगा खुराफाती तत्वों से आप उचित दूरी भी बनाए रखें। कहीं ऐसा ना हो कि भावुकता में आप कुछ गलत फैसला ले लें।

हां इतना जरूर है कि रचनात्मक कार्य करने वाले बंदियों को सरकार को प्रमोट करना चाहिए। मैं जहां भी रहा हूं वहां पेटिंग बनाने वाले, गायन करने वाले, जेल का अलग बैंड बनाने वाले व अन्य कार्यों में निपुण कैदियों को प्रोत्साहित किया है।

श्री वर्मा कहते हैं कि हकीकत तो यही है कि जेल के अंदर के तकरीबन सभी काम ऐसे ही कैदी संभालते हैं जिनके अंदर सुधारात्मक भावना होती है, उनके प्रति जेल प्रशासन हमेशा सहानुभूति रखता है। लेकिन नकारात्मक सोच के कैदियों के साथ सख्ती से पेश आना मजबूरी हा जाती है।

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