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बस्ती: पुलिस व BJP सांसद से नाराज कुर्मी समाज उतरा सड़क पर, मार्च निकालकर DM कार्यालय का घेराव

लखनऊ, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

समाजवादी पार्टी की सरकार को यादववादी बताकर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार काबिज हो गई। जातिवाद सफाए के नाम पर गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ को कुर्सी सौंपी गई।

कुर्सी मिलते ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गोरक्षनाथ पीठ की तरह ही अपने स्वजाति लोगों का वर्चस्व सरकार में बढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि आरएसएस में ब्राह्मणवादी प्रभाव के चलते एकतरफा ठाकुरवाद तो नहीं चल पाया लेकिन फिर भी सीएम के स्वजाति लोगों का पौरुष अचानक से जाग गया और पूरे प्रदेश में कई मामले आने लगे जहां उनके स्वजाति लोगों का आतंक सामने आया।

सहारनपुर तो इसका गवाह बना ही था, इसका ज्वलंत उदाहरण बस्ती जिले की एक घटना है। जिसमें सीएम के स्वजाति सांसद जगदंबिका पाल के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित कुर्मी समाज के लड़के को ही जेल मे ठूंस दिया गया। दूसरी तरफ सत्ता में शामिल कुर्मी समाज के नेता चुप्पी साथे बैठे हैं।

मार्च निकालकर किया धरना प्रदर्शन- 

इस घटनाक्रम में पुलिस और सांसद की कार्यप्रणाली से नाराज कुर्मी समाज के लोगों ने सरदार सेना, अखिल भारतीय कुर्मी महासभा व अन्य तमाम पिछड़े समाज के संगठनों को साथ लेकर जिलाधिकारी कार्यालय बस्ती पर धरना प्रदर्शन शुरू किया।

इस दौरान बस्ती जिले के एसपी और थानाध्यक्ष लालगंज पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल के दबाव के चलते बेगुनाहों को फर्जी मुकदमों में लालगंज पुलिस जेल भेज रही है।

 इस मामले के विरोध में ग्रामीणों ने सरदार सेना के प्रदेश महासचिव महिपाल सिंह पटेल माही व अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव नर सिंह पटेल अज्ञानी, सामाजिक कार्यकर्ता रजनीश पटेल, अरुण प्रकाश वर्मा, राजकुमार पटेल, अभिषेक पटेल, गुड्डू पटेल, बृजेश चौधरी, दिलीप पटेल समेत सैकड़ो युवाओं को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान शहर भर में जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। इस धरने में दलगत और जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर विभिन्न पार्टियों और जातियों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

क्या है मामला ?

बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के बनकटी बाजार में 1 माह पूर्व सीतापति पत्नि रामदत्त चौधरी के घर में घुसकर ठाकुर जाति के लोगों ने मारपीट करते हुए घर की गाड़ियां तक तोड़ दी थीं।

इस मामले में लालगंज थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी लेकिन डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल के दबाव के चलते आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी तरफ आरोपी पक्ष की तरफ से एफआईआर लिखकर सीतापति के बेटे दीपू चौधरी को ही उल्टा जेल भेज दिया गया। इतना ही नहीं जुलूस में शामिल लोगों ने आरोप लगाए कि सीतापति चौधरी की तरफ से लिखाए गए मुकदमे में सांसद के कहने पर धाराओं को भी कम करने का प्रयास पुलिस प्रशासन कर रहा है।

नेताओं की खामोशी से आक्रोश- 

पूरे प्रदेश में कुर्मी समाज के खिलाफ वारदात हो रही हैं ऐसे में कुर्मी समाज के नाम पर राजनीति करने वाले और वोटबैंक की ठेकेदारी लेकर सत्ता में काबिज नेताओं के खिलाफ जनता में आक्रोश पनप रहा है।

धरने में शामिल लोगों ने स्पष्ट कहा कि समाज के कोटे से मंत्री बने बैठेअनुप्रिया पटेल, मुकुटबिहारी वर्मा व स्वतंत्रदेव सिंह जैसे लोग समाज की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने के बजाए अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।

इस दौरान लोगों ने हाथ उठाकर शपथ ली कि अगर ऐसे नेता समाज के नाम पर वोट मांगने आएंगे तो इनका बहिष्कार किया जाएगा।

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