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योगीराज: अब लखीमपुर में जिला पंचायत सदस्य किरण वर्मा की गोली मारकर हत्या, कुर्मी समाज में आक्रोश

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रदेश की कानून व्यवस्था के हालात से बदतर होते जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर एनकाउंटर शुरू करवाए तो उन पर भी फर्जी होने के आरोप लगे।

सबसे बड़ा आरोप सरकार पर ये है कि सीएम की जाति के लोगों में अचानक से सत्ता का रौब और धौंस आ गई है. इस गुंडागर्दी के सबसे ज्यादा शिकार प्रदेश में दलित और पिछड़ी जाति के लोग ही हो रहे हैं.

मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का है। जहां जिला पंचायत सदस्य किरण वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो खीरी कोतवाली इलाके में देवकली रोड स्थित ग्राम उदयपुर महेवा निवासी रामसागर राणा के घर कल देर शाम उसका साला अमर सिंह अपनी पत्नी किरन वर्मा (32) के साथ आया था।

किरन पलिया से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य है। रामसागर राणा के घर पर शिवप्रताप सिंह भी पहले से ही मौजूद था। इस दौरान वहां किसी बात को लेकर शिवप्रताप और अमर सिंह के बीच मारपीट शुरू हो गई । बात बढ़ने पर शिव प्रताप सिंह ने लाइसेंसी रिवाल्वर से किरण वर्मा को गोली मार दी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

किरण वर्मा के पति अमर सिंह को घायलावस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया।

सरकार के प्रति बढ़ रहा है कुर्मी समाज में गुस्सा-

इलाहाबाद में ब्राह्मणों द्वारा अनुज पटेल की पीट पीटकर हत्या, फतेहपुर में फार्मासिस्ट दिलीप पटेल की गोली मारकर हत्या, झांसी में पीतांबर पटेल के साथ ठाकुर समाज के लागों द्वारा की गई मारपीट, अपना दल की ब्लॉक प्रमुख केे साथ की गई अभद्रता समेत दर्जनों मामलों में कुर्मी समाज के उत्पीड़न से  पूरे प्रदेश के कुर्मी समाज में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

इस बारे में सरदार सेना के संयोजक डॉ. आर एस सिंह पटेल का कहना है कि कुर्मी समाज ने 2019 के लोकसभा और बाद में प्रदेश के विधानसभा चुनावों में दिल खोलकर भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया था। लेकिन परिणाम आपके सामने है पूरे प्रदेश में कुर्मी समाज के  लोगों का उत्पीड़न हो रहा है।

महत्वपूर्ण पदों पर कुर्मी समाज के अधिकारियों को तैनाती नहीं दी जा रही है। बीजेपी के 10 एमएलसी और 10 राज्यसभा सांसदों की सूची में किसी कुर्मी को स्थान नहीं दिया गया। बीजेपी के 27 विधायकों में सिर्फ एक कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

जो पार्टियां कुर्मी समाज के नाम पर अपने परिवार को सैटल करने में लगीं हैं उन पार्टी के नेता भी शांत रहकर तमाशा देखते हैं औऱ किसी तरह अपने पद को बचाए रखने की कोशिश में लगे रहते हैंं।

क्या इस बात पर चिंता नहीं करनी चाहिए कि देश के PM जनता को बहकाने के लिए झूठ भी बोल देते हैं?

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