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‘गोदी’ मीडिया की एजेंडा पत्रकारिता पर उठे सवाल, पढ़िए कैसे लालू यादव को बना दिया अपराधी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के दिल्ली पहुंचते ही जिस तरह मीडिया ने लालू यादव के साथ अपराधियों जैसा वर्ताव किया उससे मीडिया का मनुवादी चेहरा एक बार फिर लोगों के सामने आ गया. आपको बता दें कि बिहार में दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों की आवाज उठाने के कारण लालू यादव लम्बे समय से मीडिया में बैठे जातिवादी और मनुवादी लोगों के निशाने पर हैं.

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पटना नगर-निगम में एक भी ब्राह्मण-भूमिहार के ना पहुंचने का असर है क्या- 

दरअसल लालू यादव की सामाजिक न्याय की राजनीति के परिणाम अब बिहार में दिखाई देने लगे हैं. ऐसा पहली बार हुआ है कि पटना नगर – निगम के चुनाव में 75 वार्डों में एक भी ब्राह्मण और भूमिहार जाति के नेता ने चुनाव नहीं जीत पाया है. मीडिया में बैठे मनुवादी लोगों में इस खबर से घोर निराशा फैली है. फ्रस्टेशन या अवसाद में बदल चुकी अपनी कुंठा और निराशा के चलते ही मीडिया में बैठे कुछ मनुवादी पत्रकारों ने लालू यादव के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करते हुए ऊल-जुलूल सवाल पूंछे.

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लालू यादव के साथ मीडिया के इस व्यवहार को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.सामाजिक चिंतक नायर मलिक अपने फेसबुक बॉल पर लिखते हैं कि …

एअरपोर्ट पर लालू प्रसाद यादव से मीडिया. जिस प्रकार पेश आया बेहद खौफनाक, शर्मनाक और घटिया पत्रकारिता का नमूना था। ऐसा लगा वो पत्रकार नहीं भेजे गए गुंडे थे। जो काफी उकसाऊ और धमकाने की मुद्रा में तैयार खड़े थे। आरोप महज़ इतना था कि आजकल बिहार के एक बाहरी नेता ने कपिल मिश्रा के तर्ज़ पर रोज रोज नये आरोप लगाने के तहत आज की प्रेस वार्ता में लालू यादव की बेटी पर 65 लाख का उपहार किसी पार्टी कार्यकर्ता से स्वीकारने की बात कही थी।

मीडिया की एजेंडा पत्रकारिता देखिए लालू यादव से पूछे ये सवाल-

1. लालू जी आपको अपने किये घोटालों पर क्या कहना हैं?
2. आप घोटाले पर घोटाले करेंगे और हम आराम करें?
3. ये दिल्ली है आपका जंगलराज नही आपको जवाब देना होगा।
4. चौथा और बेहद डरावना आपकी किन किन लोगों से सांठगाठ हैं?

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अब आप विचार कीजिये कि महज़ आरोपों पर मीडिया ने आरोपी मान लिया और ऐसे नुकीले सवाल किये। क्या यही पत्रकार अनेक संगीन मामलों में आरोपी भाजपा मंत्रियों, सांसद और विधायकों,नेताओं से करने की कुव्वत रखते हैं? मै लालू जी का सलाहकार तो नहीं पर सुभचिन्तक हूँ क्योंकि हमारे गृह जिले का प्रतिनिधित्व करते हुये पूरे बिहार तथा देश भर में जातीय असंतुलन और सामाजिक भेदभाव को पाटने में हद तक सफल रहे हैं।

आरोप साबित होगा तो कानून अपना काम करेगा लेकिन इस प्रकार राजनितिक आरोपों की आड़ में किसी को उकसाना या परेशान करना आपको अनुचित लगता हो तो आवाज़ उठाईये क्योंकि हो सकता हैं की किसी ऐसी ही धरणा मात्र से आपकी जीवन भर कमाई इज्जत मटियामेट हो जाए. ये षडयंत्र आजकल देश भर में विपक्ष को खत्म कर एक व्यक्ति को जबरदस्ती तानाशाही कर प्रधानमंत्री बनाये रखने के उद्देश्य से चल रहा हैं। क्योंकि ये तय हैं कि लालू यादव ने बार बार भाजपा का रथ रोका हैं। अभियान अधूरा किया हैं। मंसूबों पर पानी फेरा हैं।
लालू, ममता दी और केजरीवाल से डरती हैं भाजपा बाकि तो गोदी पार्टी या गोदी मीडिया बने बैठे हैं.

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इसी तरह जेएनयू शोधार्थी और सामाजिक चिंतक जयंत जिज्ञाशु इस मामले में अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि-

रिपब्लिक टीवी का पत्रकार मुझे निहायत ही घटिया और बदतमीज़ी पर उतारू लगा। अगर कोई पत्रकार का लबादा ओढ़े जानबूझकर किसी को ज़लील करने पर उतारु हो जाए, तो पत्रकारिता ऐसे लंपटों से शर्मसार होती है, किसी नेता की वजह से नहीं। किसी भी नेता को ऐसे बेहया ख़बरनवीस को इंटरटेन नहीं करना चाहिए। ध्यान रहे कि अब हुकूमत अपने हिसाब-किताब का टीवी चैनल खुलवाती है, और निर्लज्ज गुंडों को रिपोर्टर तैनात करवाती है।

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लोकतंत्र की बुनियाद हिलाने वाले भाजपाई चैनलों का बहिष्कार करना चाहिए, और समझदार विपक्ष को इन पर बाइट बैन लगाना चाहिए। ये यही डिज़र्व करते हैं। हालांकि, पेशेवराना नजरिए के अभाव के शिकार इस रिपोर्टर के उकसावे में आकर लालू प्रसाद को किसी अपशब्द के प्रयोग से बचना चाहिए था। सेलेक्टिव टारगेटिंग के उस्ताद पत्रकारों, इतने ही बहादुर हो तो रेल घोटाले पर प्रभु के साथ जाके बदतमीज़ी करके आओ न, मोदी जी ने 3 साल से अपनी जुमलेबाज़ी का लेखा जोखा अभी तक नहीं प्रस्तुत किया, पत्रकारिता के नाम पर सत्ता के दलालो, वो पहला प्रेस कांफ्रेंस ही करवा दो, करवा दो ना.

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