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योगीराज: ठाकुर-ब्राह्मणों का थानों पर कब्जा, दलित-पिछड़ों को झुनझुना देखें लिस्ट

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो

सपा सरकार पर यादववाद करने का आरोप लगाकर सत्ता में आई योगी सरकार ने अब खुलकर ट्रांसफर पोस्टिंग में ठाकुर-पंडितवाद करना शुरू कर दिया है. ठाकुर अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ के राज्य में मलाईदार पदों पर ज्यादातर सवर्ण ही हैं जिनमें ब्राह्मण और ठाकुर जाति के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की अधिकता है. अब उन अधिकारियों ने अपनी जाति के लोगों को थानाध्यक्ष बनाना शुरू कर दिया है.

सवर्णवाद की शुरुआत राजधानी लखनऊ से ही-

थाने- 47, ओबीसी- 1, एससी-0, मुस्लिम-0 सवर्ण- 46

यूपी की राजधानी लखनऊ में पूरी तरह से ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी के थानेदारों को बैठा दिया गया है. हालत ये है कि सिर्फ एक थाने में ओबीसी थानेदार है, बाकी भाजपा को वोट करने वाली कुर्मी, कोयरी, लोधी, चौरसिया, लोहार, सुनार, विश्वकर्मा, पासी, धोबी, कोरी आदि जातियों के थानाध्यक्ष पूरी तरह से नदारद हैं. दलित और मुसलमान समुदाय का कोई भी थानेदार लखनऊ में तैनात नही हैं. आप खुद लिस्ट देंखें और तय करें

ये रही लखनऊ के थानेदारों की लिस्ट….

राजकुमार सिंह- हुसैनगंज
अखिलेश पाण्डेय- गुडम्बा
आशुतोष त्रिपाठी- आलमबाग
अरुण मिश्रा-गौतमपल्ली
सतीश सिन्हा इस्पेक्टर हसनगंज
विजय सेन सिंह- ताटकटोरा
शशीकांत यादव- ठाकुरगंज
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह-अलीगंज
राघवन कुमार सिंह- मडियांव
अजय त्रिपाठी- गोमतीनगर
अक्षय कुमार- इटौंजा
उदयवीर सिंह- बीकेटी
केके मिश्रा- निगोहा
ब्रिजेश राय- पीजीआई
यशकांत सिंह- काकोरी
संतोष कुमार सिंह- नगराम
सीबी सिंह- जानकीपुरम
अंजनी पाण्डेय- चिनहट
अरुण कुमार सिंह- पीआरओ प्रेस बनाये गये

ये तो सिर्फ चंद नाम है यही हकीकत लखनऊ के अन्य थानों की भी है.

जालौन के 19 थानों में से 11 थानाध्यक्ष ब्राह्मण-

जालौन जिले में 19 थाने हैं जिनमें एसपी स्वपनिल ममगई ने स्वजातीय ब्राह्मण थानेदारोंं को हर जगह बैठा दिया है. आलन ये है बीजेपी सरकार आते ही अचानक से काबिल होते हुए 19 में से 11 थानों की कमान केवल ब्राह्मण जाति के थानेदारों को दे दी गई.

पूरे प्रदेश की कमोबेश यही स्थिति है-

लखनऊ ही नहीं इलाहाबाद, कानपुर मिर्जापुर,गोरखपुर,झांसी, मुरादाबाद, मेरठ, रामपुर, वाराणसी, बरेली, आजमगढ़ जैसे जिलों के थानों में ज्यादातर ब्राह्मण या ठाकुर बिरादरी के थानेदार ही बैठा दिए गए है. सपा सरकार के समय यूपी के थानों में यादव जाति के थानेदारों की खबर मीडिया में छाई रहती थी. चुनाव के समय भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा भी बनाया था.पर आज पिछड़ी जातियों के अधिकारियों में भाजपा सरकार की भेदभावपूर्ण नीति से पटेल, कुशवाहा, लोध, पासी, निषाद, विश्वकर्मा, धोबी, कोरी जैसी सशक्त पिछड़ी औऱ दलित जाति के अधिकारियों में गहरी निराशा है.

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