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इलाहाबाद से फिर उठी पीसीएस की परीक्षाओं में त्रिस्तरीय आरक्षण लागू करने की मांग

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

इलाहाबाद शहर में एकबार फिर से उ.प्र. लोक सेवा आयोग में होने वाली परीक्षाओं में त्रिस्तरीय आरक्षण को लागू करने की मांग उठी है. शहर के बुद्धिजीवियों और आरक्षण समर्थकों ने गुरुवार को सरदार पटेल सेवा संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में त्रिस्तरीय आरक्षण को लागू करने की मांग एक बार फिर से दोहराई है.

सामाजिक न्याय मोर्चा के बैनर तले हो रही बड़े आंदोलन की तैयारी- 

सामाजिक न्याय मोर्चा के बैनर तले प्रदेश में त्रिस्तरीय आरक्षण लागू करने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ने की तैयारी हो रही है. इसी आंदोलन की तैयारी के के लिए गुरुवार को इलाहाबाद में बड़ी सभा का आयोजित की गई. सभा में त्रिस्तरीय आरक्षण के अलावा सामाजिक न्याय व दलितों पिछड़े व अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई .

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इस दौरान सर्वसम्मति से तय हुआ कि पूरे प्रदेश में मजबूती से त्रिस्तरीय आरक्षण, दोहरी शिक्षा नीति खत्म कराने, किसानों के समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना करने और दलितों पिछड़ों से हो रहे सरकारी भेदभाव को खत्म करने की लड़ाई लड़ी जाएगी.

वक्ताओं में मुख्य रूप से रिटा. न्यायमूर्ति सभाजीत यादव,  डा. लाल रत्नाकर, विभागाध्यक्ष चित्र कला विभाग एम.एच.एच.महाविद्यालय, गाजियाबाद, प्रो. उमाकांत यादव इलाहाबाद विश्वविद्यालय , बजरंगी सिंह,अखिल भारतीय पटेल सेवा संस्थान, गुरू प्रसाद मदन अधिवक्ता हाईकोर्ट, पी पी यादव सीनियर एडवोकेट, विंग कमांडर इंद्रबहादुर यादव, प्रो. कृष्ण मुरारी, जमील अहमद आजमी,वरिष्ठ अधिवक्ता, एस.जी.हसनैन वरिष्ठ अधिवक्ता व अवधेश यादव पूर्व पुलिस अधीक्षक आदि मौजूद रहे।

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क्या है त्रिस्तरीय आरक्षण – 

त्रिस्तरीय आरक्षण का मामला यूपी पीसीएस की परीक्षा से जुड़ा हुआ है. दरअसल यूपी पीसीएस की परीक्षा तीन चरणों में होती है. प्री यानि प्रारम्भिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू। त्रिस्तरीय आरक्षण का अर्थ है तीनों स्तरों पर आरक्षण.

यूपीपीएससी के चेयरमैन रहे डॉ.अनिल यादव ने लागू किया था त्रिस्तरीय आरक्षण- 

इस व्यवस्था को पिछली सपा सरकार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के नेतृत्व में लागू किया था. यूपी पीसीएस में त्रिस्तरीय आरक्षण की व्यवस्था लागू होने पर बड़ी संख्या में दलित और पिछड़ी जाति के अभ्यार्थियों का पीसीएस में चयन होना शुरू हो गया. इसके बाद सवर्ण समुदाय के अभ्यर्थियों में त्रिस्तरीय आरक्षण के खिलाफ माहौल बनने लगा.

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इसके बाद सवर्ण अभ्यर्थियो ने त्रिस्तरीय आरक्षण की व्यवस्था लागू करने वाले डॉ. अनिल यादव पर भ्रष्टाचार और अक्षमता के आरोप लगाकर उनको लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के लिए आंदोलन छेड़ दिया था. यहां ये बताना जरूरी है कि त्रिस्तरीय आरक्षण की व्यवस्था यूपीएससी यानि केन्द्रीय लोक सेवा आयोग में भी लागू है. लेकिन बवाल के बाद अखिलेश यादव ने इस निर्णय को वापस ले लिया था.

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