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मध्यप्रदेश जल रहा है ‘शवराज’ चैन की बंसी बजा रहे हैं,पीएम विदेशों में अच्छे दिन खोज रहे हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

मध्यप्रदेश जल रहा है.  पुलिस की गोली लगने से 6 किसानों की मौत के बाद किसान आक्रोशित हैं. शिवराज सरकार कभी तो किसानों को असमाजिक तत्व बताती है तो कभी कहती है किसान पुलिस की गोली मे मरे ही नहीं. बहरहाल मांगे मानने की बजाए शिवराज ने दमन का तरीका अपनाया जिससे मध्य प्रदेश मे ंशिवराज अब शवराज बन गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभूषण सिंह यादव लिखते हैं कि-

मध्यप्रदेश में शिवराज का शासन शवराज बन गयाा है.

एमपी का किसान गोली खा रहा है और शिवराज चैन की बंसी बजा रहे हैं…
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जैसे रोम जल रहा था और वहां का राजा नीरो चैन से बंसी बजा रहा था. वैसे ही मध्यप्रदेश में रामराज में किसान गोली खा रहा है और चौहान साहब बंसी बजाने में मस्त हैं. अद्भुत है यह रामराज और अद्भुत हैं ये शासक.

राजनेता और राजनैतिक दल कभी कितने संवेदनशील हुआ करते थे कि एक तरफ ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त हुई और दूसरी तरफ लालबहादुर शास्त्री का इस्तीफा आ गया।

किसानों पर गोली चली लोहिया जी ने दे दिया इस्तीफा- 

केरल की प्रथम संविद समाजवादी सरकार पट्टम थानू पिल्लई की थी.  सरकार ने 1960 के दशक में किसानों पर गोली चला दी फिर क्या समाजवादी दल के महासचिव डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा कि “कांग्रेसी सरकार भी किसानों पर गोली चलाए और समाजवादी सरकार भी, तो दोनों में कौन सा अंतर है? पट्टम थानू पिल्लई की सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए”. सरकार को जमींदोज कर दिया और खुद भी दल से विलग कर दिए गए लेकिन नैतिकता को धराशायी नही होने दिया.

देश की सरकारें लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारें हैं. जनता द्वारा जनता के लिए चुनी गई सरकारें जनता के प्रति जबाबदेह हैं. ये जनकल्याण के लिए बनती हैं. कोई राजशाही नही है कि तिजोरी भरने के लिए राजा राज करता है. राज तो जन कल्याण का साधन है फिर तंगहाल किसान की बात सुनने की बजाय उसकी हत्या क्यों,उस पर गोली क्यों?

रामराज की परिकल्पना करने वाले लोग क्या “दैहिक,दैविक,भौतिक तापा,रामराज काहू नहिं ब्यापा” की बजाय शम्बूक बध, बालि बध, रावण बध, स्वर्ण लंका दहन, सुंदर अशोक वाटिका नाश, द्रुमकुल्य विनाश की ही सौगन्ध खाये हुए हैं?

जिसका कर्जा माफ कर दिया वो माल्या लंदन में मैच देख रहा है- 

तमिलनाडु का किसान मूत्रपान कर रहा है,महाराष्ट्र का किसान फांसी पर चढ़ रहा है,मध्यप्रदेश का किसान गोली का शिकार हो रहा है और विजय माल्या लन्दन में क्रिकेट देख रहा है। क्या यही अच्छे दिन हैं?

भारत का किसान मौत की आगोश में है तो वहीं अपने प्रधान सेवक विदेश यात्रा पर तो मुख्यमंत्री जी पिपिहिणी(बांसुरी) बजाने में मशगूल हैं,क्या यही सेवकाई है?

मोदी जी अच्छे दिनों की टेबलेट लेने विदेश गए हैं-

देश के बुद्धिजीवी लोग अच्छे दिनों की तलाश में हैं।मोदी जी अच्छे दिनों का टेबलेट लाने हेतु विदेश दौरों पर लगातार प्रयत्नशील हैं। फख्र करिए कि किसान गोली खाके अच्छे दिनों की स्थायी प्राप्ति कर रहा है।चिरनिद्रा से अच्छा क्या होगा जहां कोई चिंता, फिक्र,कठिनाई रह नही जाती है। हम मौत के बाद चिरनिद्रा में आवागमन से मुक्त स्वर्गारोहण को अग्रसर हो जाते हैं।

बीजेपी यह लोक नहीं परलोक सुधारक पार्टी है- 

ये परलोक सुधारने वाले लोग हैं ही इसलिए लोक को छोड़ो परलोक जाओ और वहां देखो अच्छे दिन हैं कि नही? किसानों!नौजवानों! मोदी जी की पार्टी असल मे परलोक सुधारने वाली पार्टी है इसलिए किसानों को जिन्हें अधिक परेशानी है परलोक भेज रही है,सारी परेशानी खत्म क्योकि वहां सोने-चांदी के पलंग मिलेंगे,विविध व्यंजन होंगे,अप्सराएं होंगी,इससे अच्छा दिन और क्या होगा जो मोदी जी के मातहत शिवराज जी दे रहे हैं,किसानों को चिरनिद्रा मतलब परलोक मतलब स्वर्ग-अप्सराएं,खूबसूरत वादियां, आदि-आदि,गोली खाओ,ऊपर जाओ और ऐश करो..

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