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मध्यप्रदेश में नहीं थम रही किसान आत्महत्या दो और किसान ‘शवराज’ की नीतियों की भेंट चढ़े

नई दिल्ली/भोपाल। नेशनल जनमत ब्यूरो 

मध्यप्रदेश में कर्ज से परेशान किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। 16 जून को होशंगाबाद के रंढाल गांव में खुद को आग लगाने वाले किसान बाबूलाल पिता बालकृष्ण वर्मा की मौत हो गई। गंभीर हालात में उनका भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा था।

उधर नरसिंहपुर के धमना गांव में लक्ष्मी प्रसाद पिता टीकाराम लोधी (70) ने जहर की गोलियां खा ली, जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान किसान की मौत हो गई।

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किसान पर था कर्ज- 

आत्मदाह करने वाले बाबूलाल पर करीब 7 लाख का कर्जा था। जिन लोगों से उसने कर्ज लिया था वे आए दिन तकाजा कर रहे थे। 15 जून को उसे कर्ज देने वाले घर पहुंचे और गाली-गलौज कर अपमानित किया। जिससे उसके परिवार में कलह मची और उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। बाबूलाल का बयान लेने वाले तहसीलदार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कर्ज और कलह के कारण उसने आत्मदाह किया।

मकान बनाने के लिए 10 फीसदी पर कर्ज- 

छोटे भाई छोटेलाल वर्मा और पड़ोसी हरिशंकर साहू ने बताया बाबूलाल के ऊपर करीब 7 लाख का कर्ज था। ये पैसा उसने दो सूदखोरों और 50 हजार रुपए बैंक से ले रखा था। सूदखोरों से उसने 10 फीसदी ब्याज पर रूपया लिया था। इन पैसों से उसने मकान बनवाया था। बताया जा रहा है कि मकान बनाने के बाद से पैसा देने वाले ज्यादा परेशान कर रहे थे।

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