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मप्र: SI शिवा अग्रवाल की गिरफ्तारी होने तक, मनीष पटेल का अंतिम संस्कार ना करने पर अड़े ग्रामीण

नई दिल्ली/भोपाल, नेशनल जनमत ब्यूरो।

आखिरकार मध्य प्रदेश की ‘शवराज’ सरकार के पुलसिया सिस्टम ने एक बेकसूर युवक की जान ले ही ली। कई दिनों तक जबलपुर से लेकर रीवा के अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद मनीष की मां को आज अपने बेटे की लाश पर आंसू बहाना पड़ रहा है।

मनीष की रोती बिलखती मां सरोज पटेल अभी भी उसके दोस्तों को देखकर पूछतीं हैं, मुझे ये तो बता दो मेरे बेटे का कसूर क्या था? क्यों पुलिस वालों ने मेरे बेटे को पीट-पीटकर मार डाला ?

मध्य प्रदेश की रीवा पुलिस की गुंडई का शिकार युवक मनीष पटेल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष की लड़ाई मंगलवार को हार गया। लोगों के आक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल के साथ मनीष का शव रीवा के बंधवा कोठार गांव पहुंचाया गया।

लेकिन खबर लिखे जाने तक मनीष के परिजनों और गांव वालों ने स्पष्ट तौर पर शव के अंतिम संस्कार से मना कर दिया। परिजनों का आरोप था कि जब तक आरोपी पुलिस वाले शिवा अग्रवाल के खिलाफ 302 का केस दर्ज करके उसकी गिरफ्तारी नहीं होती तब तक किसी कीमत पर अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

परिजनों की मांग है कि प्रशासन की तरफ से कमिश्नर और सरकार की तरफ से कोई मंत्री गांव आकर परिजनों को आश्वासन दे कि मनीष के परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी और आरोपी पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी होगी। इसके बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अभी तक की स्थिति ये है कि एक विधवा मां के बेकसूर बेटे को मरणासन्न हालत में पहुंचाने वाले एसआई शिवा अग्रवाल को सिर्फ निलंबित करके मध्य प्रदेश प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया।

क्या है मामला- 

मध्यप्रदेश में फैली अंधेरगर्दी के बीच खबर रीवा जिले से है। यहां एक युवक के साथ पुलिस द्वारा बर्बरता के साथ मारपीट करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस की गुंडई के शिकार 24 वर्षीय मनीष पटेल ने भोपाल से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग करने के बाद रीवा रेलवे में ही संविदा कर्मचारी के रूप में ज्वाइन कर लिया था।

जानकारी के अनुसार पीड़ित रीवा के समदड़िया होटल के पास खड़ा था तभी अचानक दो बाइकों से आये चार युवकों ने यह कहकर छीना-झपटी शुरू कर दी कि तुमने मेरे साथ पहले भी मारपीट की है। लेकिन वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से मामला शांत करा दिया।

थाने ना ले जाकर निजी स्थान पर की मारपीट-

देर रात संस्कृत मैरिज गार्डन में मनीष पटेल एवं उन युवकों की फिर से मुलाकात हो गई। इसके बाद आरोपी युवकों ने अपने मित्र एसआई शिवा अग्रवाल एवं आरक्षक कमला प्रसाद के साथ मिलकर युवक मनीष को शुक्रवार को लगभग शाम 5 बजे लैंडमार्क होटल के सामने से पकड़कर निजी वाहन स्विफ्ट डिजायर में बैठा कर कहीं ले गए।

मनीष पटेल जिस पल्सर बाईक से चलता था उसे एक आरक्षक द्वारा समान थाने में लाकर खड़ा कर दिया गया और युवक को अन्यत्र ले जा कर जमकर मारपीट की गई। इसकी जानकारी होते ही युवक का भाई श्याम पटेल 6 बजे थाने पहुंचा लेकिन उस वक्त युवक थाने में नहीं था।

श्याम पटेल का आरोप है कि उसके सामने ही करीब 6:15 बजे मनीष को थाने लाया गया। मनीष की हालत गंभीर थी और वह बार-बार खड़े-खड़े गिर रहा था। थाने के स्टाफ द्वारा श्याम को थाने से भगाकर आनन-फानन में संजय गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

इस मामले में अस्पताल स्टाफ का कहना है कि युवक को प्रकाश पटेल नाम के व्यक्ति द्वारा भर्ती कराया गया है लेकिन परिवार के लोगों का आरोप है कि युवक को थाना प्रभारी समान प्रभात शुक्ला एवं एसआई अग्रवाल द्वारा पुलिस वाहन में ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पतालों के बीच झूलते रहे परिजन-

रात्रि 1:30 बजे के करीब मनीष को संजय गांधी अस्पताल से रेफर कर दिया गया और इसके बाद परिजन मनीष को विंध्या अस्पताल ले गए जहाँ उसे डाक्टरों ने भर्ती करने से इनकार करते हुए जबलपुर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद मनीष को एम्बुलेंस से जबलपुर ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मायूस परिजन उसे लेकर लौट ही रहे थे कि अचानक उसके शरीर में कुछ हलचल दिखी।

जबलपुर से वापस आते वक्त रीवा पुलिस के अधिकारियों के कहने पर जगह जगह पर पुलिस द्वारा बीच सड़क पर बैरिकेडिंग लगाकर लोगों को रोका गया । इतना ही नहीं रीवा पुलिस ने पीड़ित की माँ के साथ चोराहटा वाईपास के पास अभद्र व्यवहार भी किया था। इसके बाद मनीष को फिर से संजय गांधी चिकित्सालय रीवा में वेंटिलेटर पर रखा गया था।

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