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शिवराज का रामराज: शिक्षक ने छठवीं कक्षा के पांच छात्रों के मुंह पर कालिख पोतकर गांव में घुमाया

नई दिल्ली/भोपाल। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

स्कूल में बच्चों को किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड देना, शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना अब कोर्ट की निगाह में अपराध माना जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में यह सब जायज है। यहां एक अध्यापक ने पांच बच्चों के चेहरे पर कालिख पोतकर गांव में फेरी लगवाई है।

घटना मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के देवसर ब्लॉक के ओबारी गांव के सरकारी स्कूल की है। जहां पांच बच्चों के चेहरे पर कथित तौर पर कोयला पोता गया। जिसके बाद उन बच्चों को गांव की गलियों में घुमाया गया। पांचों बच्चे छठी कक्षा के छात्र हैं।

पीड़ित बच्चों के परिजनों ने स्कूल जाकर उस अध्यापक के खिलाफ प्रिंसिपल से शिकायत की तो उसने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद परिजनों ने जिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि अध्यापक रामदरश प्रजापति ने बच्चों के मुंह पर कोयला पोतकर गांव घुमाया।

एक प्रताड़ित छात्र के पिता ने कहा, अध्यापक रामदरश प्रजापति ने बच्चों का अपमान किया है। अध्यापक का कहना है कि बच्चे बड़े हो गए हैं किसी का कहना नहीं मानते हैं। जिसके बाद अध्यापक ने बच्चों के चेहरे पर कोयले से मूंछे और दाढ़ी बनाई। बाद में उसने बच्चों के चेहरे को काला करके गांव में फेरी लगवाई।

परिजनों ने स्कूल जाकर जब टीचर का विरोध किया तो अध्यापक ने कहा वह दिए गए निर्देशों का पालन कर रहा है। यह निर्देश उसे किसने दिया,यह बताने से रामदरश प्रजापति ने मना कर दिया।

सिंगरौली जिले के डीएम अनुराग चौधरी ने स्कूल प्रशासन और अध्यापक के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, यह बहुत ही गंभीर मामला है कोई भी बच्चों का सार्वजनिक तौर पर प्रताड़ित और अपमान नहीं कर सकता। स्कूल और अध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हमने अध्यापक के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली है।

आपको बता दें,पूरे देश में बच्चों को शारीरिक दंड देने पर रोक है। फिरभी बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए इसे दिया जाता है। साल 2009 में पारित हुए विधेयक राइट टू एजूकेशन के तहत सभी 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा अनिवार्य कर दी गई। वहीं बच्चों को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने पर रोक है इसे दंडनीय अपराध माना जाता है।

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