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शिवराज के रामराज में फिर भड़की किसान आंदोलन की चिंगारी, जबलपुर में किसान उतरे सड़कों पर

नई दिल्ली/जबलपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मंदसौर में किसानों पर फायरिंग के बाद शिवराज सरकार भले ही सोच रही हो कि उसने किसानों का आंदोलन ठंडा कर दिया। लेकिन यह होता दिख नहीं रहा है। मध्य प्रदेश में दोबारा किसान आंदोलन की आग भड़क सकती है।

इस बार जबलपुर और उसके आस-पास क्षेत्रों के किसानों ने सरकार के खिलाफ कमर कस ली है। यहां सीलिंग पीड़ित किसानों के अंदर विरोध की चिंगारी धधक रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जबलपुर में अचानक सैकड़ों किसानों ने शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अपनी समस्याओं के लंबे अरसे से हल नहीं होने के चलते नाराज़ किसानों ने यहां पर आत्महत्या करने करने की कोशिश भी की। विरोध कर रहे किसानों को तितर बितर करने के लिए पुलिस बल प्रयोग करना पड़ा।

सूबे की सरकार ने सीलिंग पीड़ित हजारों किसानों को उनके ही हालात पर छोड़ दिया है। सीलिंग कानून के कारण हजारों एकड़ जमीन बंजर हो गई है। खेती बाड़ी पर ही आधारित इन किसानों का कहना है कि अब अत्याचार नहीं सहेंगे, जब कहीं पर सुनावई नहीं हो रही है तो आत्मदाह करेंगे।

बीते शुक्रवार को सामुदायिक भवन तिलहरी के पास सैकड़ों किसान इकट्ठा हुए जिन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान मनीष कनौजिया नाम के किसान ने अपने ऊपर केरोसिन उड़ेल लिया तभी एक किसान माचिस लेकर दौड़ने लगा।

किसानों को विरोध करता देख प्रशासन ने मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भेजा। पुलिस ने केरोसिन उड़ेलने वाले मनीष कनौजिया सहित 5 किसानों को गिरफ्तार कर लिया।

गोराबाजार थाना प्रभारी देवेंद्र प्रताप चौहान के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए किसानों पर हत्या करने का आरोप लगाया गया। लेकिन बाद में उन किसानों जमानत पर रिहा कर दिया गया।

दरअसल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीलिंग पीड़ित किसानों से वादा किया था कि अगर उनकी सरकार आई तो किसानों को जमीन वापस कर दी जाएगी। चार से अधिक समय बीत जाने के बाद मुख्यमंत्री ने सीलिंग पीड़ित किसानों की सुध नहीं ली है। जिसके चलते किसानों की उम्मीद का सब्र टूटने लगा है।

किसान सुरेंद्र सिंह का कहना है 1976 में आए सीलिंग एक्ट के अनुसार शहरी किसानों से केवल वह जमीन अधिग्रहीत की जानी थी जिस पर कृषि कार्य नहीं होता है। लेकिन उपजाऊ जमीन को भी बगैर किसी सूचना के अधिग्रहीत कर लिया गया।

वहीं विरोध प्रदर्शन में शामिल किसान शंकर सिंह के मुताबिक, 1999 में एनडीए की सरकार ने अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट को त्रुटिपूर्ण मानते हुए खत्म कर नया कानून निरसन एक्ट लाई थी। उन्होंने कहा कि केवल मध्य प्रदेश में जमीन वापस नहीं की गई है।

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