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आपने कभी सोचा राजनीति में नकली वीरता और नकली महानता की डींगे क्यों हांकी जाती हैं ?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

क्या कभी आपने इस बात पर विचार किया है कि राजनीति में अपनी महान संस्कृति और अपने महान इतिहास की डींगें क्यों हांकी जाती हैं ?
ताकि राजनीति में अपने आप को राज करने के लिए सबसे श्रेष्ठ और सबसे महान साबित किया जा सके।

भारत एक राष्ट्र के रूप में 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया। उससे पहले आप कितने महान थे आप इतिहास में क्या थे।
इतिहास की महानता के आधार पर आपका इस देश पर अधिक या कम अधिकार साबित नहीं कर सकते। ध्यान से देखिये भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यही चालाकी कर रहे हैं।

वे रोज़ यही बात दोहराते हैं कि हमारा इतिहास बड़ा महान है हम तो बड़े उदार थे हम बड़े वीर थे। ऐसा कह कर ये लोग खुद को इस देश पर शासन करने के लिए सबसे अच्छे लोग साबित करना चाहते हैं, और जहां इतिहास इनके पक्ष में नहीं है वहाँ यह इतिहास को तोड़-मोड़ रहे हैं इतिहास को पूरा काल्पनिक बना रहे हैं।

जैसा इन्होंने अभी राजस्थान में महाराणा प्रताप द्वारा हल्दी घाटी का युद्ध जीतने की बात इतिहास में घुसाई है। ध्यान से देखा जाय तो भारत ऐतिहासिक तौर पर भेद-भाव जातिवाद औरतों की गुलामी और आर्थिक शोषण का बहुत बुरा नमूना है।

लेकिन संघ और भाजपा बेहद चालाकी से इन सब गन्दगी को छिपा कर एक महान अतीत की झूठी कहानियाँ सुनाती है। और भाजपा एक राजनैतिक चालाकी से पुराने काल्पनिक स्वर्ण युग को पुनर्स्थापित करने का सपना भी युवाओं के मन में डालती है।

टीवी के सीरियल और धार्मिक गुरू इस कहानी को और भी हवा देते हैं, इस तरह भारत में पुरुषों की सत्ता, परम्परागत आर्थिक शोषण और जातिवाद बना रहता है। नौजवान जो इस सब से भारत को निकाल कर नये युग में ले जा सकता है।

उससे कहा जाता है कि भारत सबसे महान है और पाकिस्तान सबसे खराब है. और आज की राजनीति यह होनी चाहिए कि भारत का युवा पाकिस्तान की तबाही के लिए कोशिश करे। इस तरह मजे उड़ाने वाला तबका परिवर्तन को रोक देता है।

प्रगति और आज़ादी बुरी बात मानी जाने लगती है। जातिवाद और संघवाद से आजादी के नारे लगाने वाले जेएनयू के प्रगतिशील नौजवानों को देश में खलनायक बना दिया जाता है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और और उसका गिरोह जातिवाद, पितृसत्ता और सम्प्रदायवाद से आज़ादी के नारे को राष्ट्रद्रोह घोषित कर देता है।
और देश के नौजवान मानने लगते हैं जातिवाद, आर्थिक शोषण और औरतों की गुलामी हमारी महान संस्कृति है। और इन सब के खिलाफ राजनीति करने वाले लोग हमारी संस्कृति, धर्म और राष्ट्र के खिलाफ हैं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने बहुत मेहनत से इस लक्ष्य को हासिल किया है। नौजवानों के दिमाग को अपने काबू में करने के लिए संघ ने काल्पनिक डर खड़े किये। मुसलमानों, ईसाईयों, कम्युनिस्टों को दुश्मन के रूप में खड़ा किया गया।

औरतों की बराबरी की मांग की मज़ाक बनाई गई। खुद को असली मर्द ताकतवर और वीर घोषित किया गया। दंगों में मुसलमानों को मारने को अपनी वीरता का सबूत बताया गया, और सबसे बड़े दंगाई को सबसे वीर नेता के रूप में पेश किया गया। इस तरह भारत के आधुनिकता और प्रगतिशीलता की प्रक्रिया को नष्ट कर दिया गया।

इनके चेले दलितों की पिटाई, मुसलमानों की पिटाई के वीडियो वीरता के सबूत के रूप में गर्व के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे,
इस तरह भारत की राजनीति से समानता, न्याय और प्रगति को दफन कर दिया गया।

इस तरह संघ ने नकली वीरता और नकली महानता के बल पर राजनैतिक सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया.

(लेखक हिमांशु कुमार मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं) 

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