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सावधान ! आपके महापुरुष चुराकर, आपको छला जा रहा है, संगठित रहिए …

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कहा था कि अगर आज बाबा साहब न होते तो नरेंद्र मोदी कहां होते ? अगर इन्ही पीएम के राज में आरक्षण खत्म किया जा रहा है तो जाहिर है पीएम का यह बोलना बीजेपी और संघ का एजेंडा ही माना जाएगा, जिसके जरिए दलित और वंचितों को लुभाया जा सके।

दरअसल बीजेपी और संघ के वोट बैंक की दुकान कबीर, बुद्ध, अंबेडकर, रैदास बिरसा और सरदार पटेल जैसे महापुरुषों के नाम के बगैर चलने वाली नहीं है। यह बात बीजेपी और संघ अच्छी तरह जानते हैं।

वहीं 2014 के आम चुनाव में संघ और बीजेपी ने किसान जातियों के वोट बटोरने के लिए एक चाल चली। बीजेपी ने सरदार पटेल के नाम पर देश भर में किसान जातियों से लोहा लिया। बीजेपी ने कहा कि इस लोहे का इस्तेमाल सरदार पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी बनाने में उपययोग किया जाएगा।

अपने नेता के नाम पर मूर्ति बनाने की बात से खुश हुईं कुर्मी, गुर्जर, लोधी और पटेल जातियों ने अपने घरो से खूब लोहा दिया, लोक सभा चुनाव के दौरान इन जातियों ने बीजेपी को झोली भर भर कर वोट भी दिए।

बाद में पता चला सरदार पटेल के नाम पर दिए गए लोहे को इन लोगों कबाड़ के भाव बेच दिया वहीं सरदार पटेल के नाम पर बनने वाली स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के निर्माण का ठेका एलएनटी के माध्यम से चीन की कंपनी को चला गया। आपका लोहा अब कबाड़ में पड़ा सड़ रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थी और समाज विज्ञानी संजय श्रमन जोठे संघ और बीजेपी से बहुजनों को सावधान रहने की नसीहत देते हुे कहते हैं कि-

अगर आपको लगता है कि आपके महापुरुष चुराए जा रहे हैं तो एक अर्थ में बाजी आपके हाथ में ही हैं. लेकिन ये बाजी आपके हाथ में तभी तक है जब तक कि आप सावधान और संगठित हैं. कबीर, बुद्ध, अंबेडकर, रैदास, बिरसा आदि को चुराने वालों ने चोरी शुरू करके इतना तो जतला ही दिया कि इन नामों के बिना उनकी राजनीति और समाजनीति नहीं चलती.

अब इसके आगे का काम आप अपने हाथ में ले लीजिये. वो काम कैसे हाथ में लेंगे और आगे बढ़ाएंगे?

जिस जिस महापुरुष की चोरी हो रही है उसके साहित्य और वचनों में ब्राह्मणवाद के खिलाफ जो कुछ लिखा गया है उसे तेजी से बाहर निकालकर सबके सामने रखते जाइए. अपने युवाओं और विशेष रूप से स्त्रियों को जागरूक कीजिये.

अगर अंबेडकर चुराए जा रहे हैं तो सीधे उनकी 22 प्रतिज्ञाओं को फ्रेम करवा के गांव गलियों शहरों घरों की दीवारों पर चिपका दीजिये.अगर कबीर चुराए जा रहे हैं तो कबीर द्वारा पंडितों की निंदा को गाँव शहरों में फैला दीजिये.

इस सनातनी अजगर के मुंह में फंसे शिकारों को अपना आकार बढ़ाते जाना है. तब न केवल आप इसके मुंह से निकल जायेंगे बल्कि इसका मुंह भी चीर सकेंगे.

अपना आकार बढ़ाने का अर्थ है-इकट्ठे होना, आपसी असहमतियों का स्वागत करते हुए संवाद बनाये रखते हुए दलितों, ओबीसी (शूद्रों) आदिवासियों और सबसे महत्वपूर्ण- स्त्रियों का एक साथ आना.

अगर आप बुद्ध, कबीर, मखली घोषाल, अंबेडकर, बिरसा आदि के नाम से अलग-अलग लड़ते हुए आपस में भी लड़ रहे हैं तो आप मूर्खता कर रहे हैं. ऐसे में ये अजगर आपको एक एक करके आराम से निगलेगा.

अगर आप इकट्ठे होकर एक हो गये तो एकसाथ इस अजगर का मुंह चीर सकते हैं. आप तय कर लें, आपको क्या करना है.

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