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महिलाओं का शौच के लिए रात होने का इंतजार करना क्रूरता है, कोर्ट ने स्वीकार की तलाक की अर्जी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

केंद्र सरकार गांव-गांव शौचालय बनवाने का कितना भी झूठा प्रचार कर लें लेकिन कहीं न कहीं सरकार का झूठ उजागर हो जाता है। पिछले दिनों पीएम मोदी ने हज़ारों गावों में शौचालय बनवाने के कितने फर्जी आंकड़े दिए जिनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।

शौचालय न होने की वजह से राजस्थान में एक महिला ने तलाक के लिए अदालत में आावेदन किया जिसे कोर्ट ने स्वीकार करके महिला के हक में फैसला सुनाया।

घटना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक गांव की है। जहां ससुराल में शौचालय न होने की वजह से महिला ने तलाक के लिए कोर्ट में आवेदन किया। महिला की अर्जी पर कोर्ट ने फौरी सुनवाई करते हुए कहा, “महिलाओं को शौच के लिए रात होने का इंतजार करना पड़ता है ,यह क्रूरता है।”

मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राजेंद्र शर्मा ने ससुराल में शौचालय नहीं होने पर भीलवाड़ा जिले के आटूण गांव की एक महिला की ओर से लगाए गए तलाक के आवेदन को मंजूर करते हुए निर्णय में लिखा है कि “क्या हमें कभी दर्द हुआ है कि हमारी मां, बहनों को खुले में शौच करना पडता है?”

गांवों में महिलाओं को शौच के लिए रात होने का इंतजार करना पड़ता है. अंधेरा नहीं होता, तब तक वे शौच के लिए बाहर नहीं जा सकतीं. न्यायाधीश ने फैसले में लिखा है कि इससे उनकी शारीरिक यातना होती है. क्या हम मां, बहनों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं कर सकते?

कोर्ट ने कहा, “21वीं सदी में खुले में शौच की प्रथा समाज के लिए कलंक है, तम्बाकू, शराब, मोबाइल और बेहिसाब खर्च करने वाले घरों में शौचालय नहीं होना विडम्बना है।” अदालत ने अपने फैसले में कहा, “शौचालय के अभाव में एक पत्नी मानसिक पीड़ा बर्दाश्त कर रही है और पति कोई परवाह नहीं कर रहा है,यह पत्नी के लिए एक मानसिंक क्रूरता और त्रासदीपूर्ण स्थिति हो सकती है।”

सदर थाना पुलिस के मुताबिक पीड़िता ने पति के खिलाफ मानसिक क्रूरता का मामला दर्ज करवाया था। जिसके बाद यह मामला न्यायालय तक पहुंचा।

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