You are here

मेक इन इंडिया: विदेशी कंपनियां आओ और भारत में माल बनाओ, देशी मजदूर भाड़ में जाओ

नई दिल्ली। नेशनल जनमत

मेक इन इंडिया उन योजनाओं में से एक है जिन्हे सरकार ने बहुत महिमाामंडित किया था। मार्केटिंग सरकार की ये खासियत तो रही है कि उसे पुरानी शराब तो नई बोतल में पैक करके बेचना उसे बहुत अच्छे से आता है।

ऐसी ही एक पुरानी शराब है मेक इन इंडिया, जबकि ऐसा बहुत पहले से होता आया है कि विदेशी कंपनियों को भारत बुलाकर उनसे कारखाने खुलवाए जाते हैं और देश के गरीबों को मजदूरी में लगा दिया जाता है। एक ऐसा मजदूर जिसके अपने कोई अधिकार नहीं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार इसी दोहरे पन की मार्केटिंग सियासत पर लिखते हैं कि-

आपने कहा कि कम मेक इन इंडिया, विदेशी कंपनियों आओ अपना माल भारत में बनाओ, यह काम तो अमीर देशों की कंपनियां दसियों सालों से कर रही हैं। यह मुनाफाखोर कंपनियां उन्ही देशों में अपने कारखाने खोलती हैं जहां उन्हें सस्ते मजदूर मिल सकें और पर्यावरण बिगाड़ने पर सरकारें उन्हें रोक न सकें।

सब इस खेल को जानते हैं. जब यह विदेशी कंपनियां मजदूरों से बारह घंटे काम कराती हैं, तब कोई भी सरकार इन कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती.  बताइये आज तक भारत में आपने किसी विदेशी कम्पनी पर इसलिए कार्यवाही करी है कि उसने मजदूरों को कम मजदूरी दी है. नहीं आपने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।

आपमें दम ही नहीं है इन विदेशी कंपनियों की बदमाशियों को रोकने का और अपने देश के गरीब नागरिकों और मजदूरों की हिफाज़त का,
आप पूछते हैं उदाहरण दूं ? उदाहरण लाखों हैं.

लीजिए एक उदहारण- 

छत्तीसगढ़ में स्विस सीमेंट कंपनी हालिसिम सीमेंट कम्पनी के द्वारा मजदूरों को कम मजदूरी दी गई। जबकि वहाँ का विदेशी डायरेक्टर दस करोड़ तनख्वाह लेता है. श्रम अदालत ने मजदूरों के हक में फैसला दे दिया, कम्पनी ने अदालत का फैसला मानने से मना कर दिया,
मजदूर धरने पर बैठे,

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने छह मजदूर नेताओं पर डकैती का मामला बना दिया.वो भारतीय मजदूर आज भी छतीसगढ़ की जेलों में पड़े हुए हैं. ये आपकी भाजपा सरकार ने किया है,

प्रधानमंत्री जी,

कम मेक इन इण्डिया का नारा देने से पहले अमित जेठवा को याद कर लीजिए. जिसे पर्यावरण को बचाने के लिए आवाज़ उठाने के कारण आपके ही शासन में आपकी ही पार्टी के सांसद के इशारे पर गुजरात में गोली से उड़ा दिया गया. जीरो डिफेक्ट और जीरो इफेक्ट की बातें लाल किले से ही अच्छी लगती हैं.

लेकिन जब भी सोनी सोरी उस जंगल की हिफाज़त के लिए आवाज़ उठाती है तो आपकी ही सरकार उसे थाने में ले जाकर बिजली के झटके देती है, और उसके जिस्म में पत्थर भर देती है, बातें बहुत सुनी हैं हमने. जाइए इस देश की एक भी सोनी सोरी के हक़ में एक कदम उठा कर दिखाइए,

आपमें दम ही नहीं है मोदी जी. जिस दिन आप किसी सोनी सोरी के पक्ष में आवाज़ उठाएंगे मोदी जी. उसी दिन आपके मालिक ये पूंजीपति आपको रद्दी की टोकरी में फेंक देंगे,

असल में तो आपका मुखौटा लगा कर लाल किले से आप नहीं ये पूंजीपति दहाड़ रहे हैं, आप कहते हैं आप प्लानिंग कमीशन को समाप्त कर देंगे ? सही है अब जब सारे भारत को लूटने की सारी प्लानिंग अम्बानी के घर में ही होनी है. तो देश को प्लानिंग कमीशन की ज़रूरत भी क्या है ?

देश में सफाई मजदूरों की स्थिति- 

आप सफाई की बातें करते हैं ? इस देश में सफाई मजदूरों की हालात क्या हैं कभी जानने की जहमत करी है आपने ? पूछियेगा कि गंदगी फैलाने वाले ही संघ के नेता क्यों बने ? और सफाई करने वाला कभी संघ का नेता क्यों नहीं बन सका ?

आपके नागपुर के संघ के ब्राह्मण नेताओं से ये भी पूछियेगा ? कि भंवर मेघवंशी के घर का खाना वो क्यों नहीं खा सके ? और उस खाने को उन्होंने सड़क पर क्यों फेंक दिया था ? आप सोचते हैं कि आपकी कथनी से हम बहल जायेंगे ?

नहीं इस देश की लाखों सोनी सोरी,आरती मांझी, भंवरी बाई के हक के लिए कदम उठाने के लिए हम लड़ते रहेंगे, जेल जाते रहेंगे ,गोली खाते रहेंगे,

आप हमें आतंकवादी,नक्सलवादी,देशद्रोही जो मन में आये कहिये,
लेकिन इतिहास बताएगा
कि असल में देशभक्त कौन था ?
और आतंकवादी कौन ?

Related posts

Share
Share