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भ्रष्टाचार के आरोपी उरई ITI के प्रिंसिपल एमके सिंह की हनक, जांच अधिकारियों से की अभद्रता

नई दिल्ली/उरई। नेशनल जनमत ब्यूरो

योगीराज में पूरे प्रदेश में सत्ता से आशीर्वाद प्राप्त अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं। कहीं फरियादी को थप्पड़ मारने की घटना सामने आ रही है तो कहीं न्याय की गुहार लगाने पर जेल भेजने की। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के उरई का सामने आया है।

बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह इस घटना के बारे में लिखते हैं कि

राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) उरई के प्रधानाचार्य एमके सिंह द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार व लूट खसोट के मामले की शिकायत जब छात्रों ने तहसील दिवस में की तो उसकी जांच करने का जिम्मा जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत प्रसाद पटेल को सौंपा गया था। जांच अधिकारी द्वारा कार्यालय के लिपिक व लेखाधिकारी को आईटीआई भेजा गया।

झूठ बोला गया कि प्रिंसिपल है ही नहीं- 

जब दोनों लोग वहां चांज करने पहुंचे तो पहले तो उन्हें बताया गया कि प्रधानाचार्य बाहर गये लेकिन थोड़ी ही देर में प्रधानाचार्य उनकी आंखों के सामने आ गए। इसके बाद उन्होंने जांच अधिकारी द्वारा भेजे गये नोटिस को रिसीव कराने का प्रयास किया तो प्रधानाचार्य एक बार फिर अपना आपा खो बैठे और दोनों कर्मचारियों से अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने लगे।

हालांकि लेखाधिकारी किसी दवाब में नही आए और जिस मंशा से वहां गये थे उस काम को पूरा करके ही वापस कार्यालय में लौट गये। जब प्रधानाचार्य के बर्ताव के बारे में जांच अधिकारी बनाये गये डीआईओएस को जानकारी मिली तो वह भी हैरान रह गये।

धन उगाही के आरोप- 

पिछले काफी समय से आईटीआई प्रधानाचार्य एमके सिंह तानाशाही तरीका अपनाकर वहां पढ़ने वाले छात्रों से अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्हे मानसिक रूप से तो प्रताड़ित तो किया ही जाता है, इसके अलावा अलग-अलग ट्रेडों में पढ़ने वाले छात्रों से प्रति सेमेस्टर 2500 से 4500 रुपये की अवैध तरीके से वसूली भी होती है। आईटीआई छात्रों के अंदर प्रधानाचार्य के विरुद्ध आक्रोश गहराने लगा था।

अलग-अलग मदों में पैसे खींचने के आरोप- 

छात्रों का तो ये भी आरोप है कि प्रधानाचार्य के आदेशानुसार समय-समय पर नई मदों को इजाद कर प्रवेश लेने वाले छात्रों से निर्धारित शुल्क से दोगुना से तीन गुना तक शुल्क वसूला जाता था। वहीं छात्रों को सुविधाएं देने के नाम पर भी समय-समय पर वसूली का फरमान सुनाकर उसे पूरा करने का भी दबाब बनाया जाता था।

इसके बाद छात्रों ने आईटीआई प्रधानाचार्य एमके सिंह की शिकायत करना शुरू किया। बीते पिछले मंगलवार छात्रों ने तहसील दिवस में भी शिकायत दर्ज कराई थी। जिसकी जांच जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल को सौंपी गयी थी।

जांच अधिकारी ने प्रारम्भिक जांच के लिए अपने ही कार्यालय के लेखाधिकारी व लिपिक को आईटीआई में भेजा था ताकि वह प्रधानाचार्य को वह नोटिस रिसीव कराके आएं. बताया जाता है कि जैसे ही डीआईओएस कार्यालय के दोनों कर्मचारी आईटीआई परिसर में पहुंचे तो वहां के कर्मियों ने बताया कि प्रधानाचार्य तो बाहर गये हुये हैं।

इसके बाद दोनों कर्मी वहीं पर कुछ देर के लिये रुके तो आईटीआई प्रधानाचार्य एमके सिंह उन्हें नजर आए जिन्हे वह अच्छी तरह से पहचानते थे। इसके बाद उन्होंने प्रधानाचार्य को आने की वजह बताई और जांच अधिकारी द्वारा दिये गये नोटिस को रिसीव करने का अनुरोध किया तो प्रधानाचार्य एमके सिंह बुरी तरह से भड़क उठे और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने लगे।

गुस्से से आकर प्रधानाचार्य ने कहा कि जानते नहीं मैं क्लास वन अधिकारी हूं मेरी जांच कोई भी नहीं कर सकता। जब जांच अधिकारी भगवत पटेल को आईटीआई प्रधानाचार्य के बिगड़े बोल के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो जांच उन्हें सौंपी गयी है उसमें वह आईटीआई के छात्रों के बयान दर्ज कराने के बाद सही बात  निकालकर डीएम को सौंप देंगे।

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