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नोटबंदी से बर्बाद किसानों को पीएम मोदी का ‘तोहफा’ अब खेती-किसानी पर भी 28 फीसदी तक GST

नई दिल्ली । नेशनल जनमत ब्यूरो।

1 जुलाई से लागू होने वाले गुड्स एंड सर्विस टैक्स से किसानों पर दोहरी मार पड़ने की संभावना है। पहले से ही किसान कर्ज की मार से डूबे हुए हैं और देश भर में ऐसे किसानों द्वारा आत्महत्या की खबरें रोजाना आ रहीं हैं। मोदी सरकार ने आत्महत्या से जूझ रहे किसानों की तकलीफों को औऱ बढ़ाते हुए केवल बीज को छोड़कर बाकी खेती- किसानी की चीजों को जीएसटी के दायरे में लाकर किसानों की कमर तोड़ दी है।

पहले मोदी सरकार ने किसानों को ये भरोसा दिलाया था कि किसानों से जुड़ी चीजों पर जीएसटी नहीं लगाया जाएगा. पर पीएम मोदी का ये वादा भी जुमला साबित हुआ। एक अनुमान के मुताबिक अब एक बीघा खेत में किसानों को लगभग 400 रूपए अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा.

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विदेशी कम्पनियों के दबाव में खेला जा रहा है किसानों को मारने का खेल- 

राज्य सरकारें भी किसानों का कर्ज माफी का झुनझुना दे रही हैं. लेकिन इससे उनकी परेशानियों पर किसी तरह का कोई रहम नहीं मिल रहा है। अब जीएसटी के बाद किसानों के लिए खेती करना भी काफी महंगा हो जाएगा। कृषि मामलों के जानकारों का मानना है कि खेती से जुड़ी वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने से किसानों की मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। जिससे पहले से ही आत्महत्या करने को मजबूर किसान की हालत औऱ खराब हो सकती है।

किसान खेती से विमुख हो सकता है औऱ अन्न के मामले में देश की निर्भरता खत्म हो सकती है. भारत की अन्न के मामलों में विदेशी देशों पर निर्भरता बढ़ सकती है। औऱ यही विदेशी कम्पनियां चाहती हैं। किसानों को आत्महत्या पर मजबूर करने का ये सारा खेल विदेशी कम्पनियों के दबाव में मोदी सरकार खूबसूरती से खेल रही है।

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केवल बीज पर नहीं लगेगा टैक्स- 

जीएसटी काउंसिल ने किसानों को केवल बीज खरीदने पर अतिरिक्त टैक्स देने से राहत दी है। बीज पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगाया गया है। हालांकि इससे किसानों को राहत नहीं मिलेगी। खेती करने के लिए किसानों को कई तरह अन्य वस्तुएं भी चाहिए होती हैं, जिनको जीएसटी काउंसिल ने 12 से 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा है।

इन पर लगेगा टैक्स- 

जीएसटी काउंसिल ने फर्टिलाइजर्स और ट्रैक्टर पर 12 फीसदी टैक्स लगाया है। इसके अलावा पेस्टीसाइड पर 18 फीसदी टैक्स लगाया है। पेस्टीसाइड का इस्तेमाल किसान फसल को कीड़ों से बचाने के लिए करते हैं। सिंचाई के लिए प्रयोग होने वाले रबर और प्लास्टिक पाइप पर 28 फीसदी टैक्स लगेगा।

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एक बीघे की खेती पर इतना पड़ेगा असर- 

मान लिजिए अगर किसान के पास एक बीघा जमीन है तो उसे लागत में 360 रुपये अतिरिक्त खर्चा पड़ेगा। अभी किसान को 680 रुपये का यूरिया पड़ता है जो जुलाई से 740 रुपये का हो जाएगा। वहीं डाई पर 1050 रुपये से बढ़कर 1320 रुपये देने होंगे। इसी तरह जिंक 250 से 270 रुपये और कीटनाशक 550 से 600 रुपये देने होंगे। इस हिसाब से देखा जाए तो हर एक बीघे पर 400 रुपये अतिरिक्त खर्चा आएगा।

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