You are here

लालू यादव के खिलाफ बदले की राजनीति में जुटी मोदी सरकार, तेज,मीसा,तेजस्वी की सम्पत्ति जब्त

पटना/नई दिल्ली। सोबरन कबीर यादव

लालू यादव की मजबूत घेरेवंदी से भयभीत मोदी सरकार उनके परिवार के खिलाफ बदले की राजनीति करने पर उतर आई है. दरअसल भाजपा के रणनीतिकारों को ये डर सता रहा है कि लालू यादव यदि दलितों, पिछड़ों की भागीदारी, सरकारी नौकरियों में आबादी के हिसाब से आरक्षण और निजी क्षेत्र में दलितों- पिछड़ों को भागीदारी देने की राजनीति करते रहे तो भाजपा से दलित और पिछड़ी जातियां दूर हो सकती हैं.

इसे भी पढ़ें…सामाजिक न्याय के योद्धा लालू यादव के ठिकाने पर पीएम मोदी ने डलवा ही दिए छापे

भाजपा को पता है कि लालू यादव की राजनीति से दलित-पिछड़े उनसे दूर हो सकते हैं

भाजपा के रणनीतिकारों को ये भी अच्छी तरह से पता है कि दलितों पिछड़ों के वोट के बल पर ही उनकी सत्ता टिकी है. एक बार दलित और पिछड़ी जातियां इनसे दूर हुई तो फिर सत्ता कभी नसीब नहीं होगी. और लालू यादव की राजनीति में वो दम है जो कि दलितों पिछड़ो को भाजपा से दूर कर सकता है. भाजपा के लिए आगामी लोकसभा चुनावों में लालू यादव एक मजबूत प्रतिद्वंदी के तौर पर उभर रहे हैं. इसके अलावा लालू यादव ने गैर भाजपाई दलों को इकट्ठा करके भाजपा को अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास भी करा दिया है.

इसे भी पढ़ें…छापेमारी पर लालू की दो टूक, पूंजीपतियों के गुलामों सुनों – लालू न हारा है और न थका है

बिहार विधानसभा में हुई हार भाजपा को एक डरावने ख्वाब की तरह सता रही है

इसके अलावा भाजपा के जहन में अभी भी बिहार विधानसभा की हार एक डरावने ख्वाब की तरह घर कर गई है. भाजपा को पता है जिस समय मोदी के नाम की प्रचंड लहर चल रही थी उस समय लालू यादव के नेतृत्व में बिहार की जनता ने मोदी के अश्वमेघ रथ को रोक दिया. भाजपा के रणनीतिकारों को ये भी पता है कि 2019 में 2014 जैसे हालात भी नही है. बेरोजगारी के मोर्चे पर फेल होने के कारण युवाओं में भाजपा सरकार को लेकर काफी गुस्सा भी है. कुल मिलाकर हालात भाजपा के पक्ष में नहीं हैं.

इसे भी पढ़ें…छापेमारी के बाद सशक्त नेता बनकर उभरे लालू, 27 अगस्त की रेैली में शामिल होंगी मायावती

लालू पर कार्यवाही करके भाजपा अखिलेश – मायावती जैसे दलितों -पिछड़ो की राजनीति करने वाले नेताओं को देना चाहती हैं संदेश

भाजपा को पता है कि उसे अगर 2019 में दिल्ली का किला फतह करना है तो उसे लालू की चुनौती से हर हाल में निपटना ही होगा. लालू यादव की इसी चुनौती से निपटने के लिए भाजपा के रणनीतिकारों ने लालू यादव को चुनावी मैदान में न घेरकर उनको व उनके परिवार के सदस्यों को सीबीआई,आयकर विभाग,और न्यायपालिका के माध्यम से घेरने की रणनीति चुनी है ताकि लालू यादव की सारी ऊर्जा खुद को और अपने परिवार के अन्य सदस्यों को सरकार के इन प्रपंचों से बचाने में लग जाऐ. इसके अलावा मोदी सरकार लालू पर कार्यवाही करके अखिलेश, मायावती समेत दलितों पिछड़ों की राजनीति करने वाले नेताओं को ये संदेश भी देना चाहती है कि जो भी दलितों -पिछड़ों के हितो की राजनीति करेगा उसको सरकारी तंत्रों में फसाकर बर्बाद कर दिया जाएगा. उसे राजनीति करने लायक नहीं छोड़ा जाएगा.

इसे भी पढ़ें…गोदी मीडिया की एजेंडा पत्रकारिता ने लालू यादव को जानिए कैसे बना दिया अपराधी

तेजस्वी , तेजप्रताप औऱ मीसा की सम्पत्ति जब्त करके लालू यादव पर दबाव बनाना चाहती है भाजपा

लालू यादव के बच्चों की सम्पत्ति को जब्त करने का सारा खेल सिर्फ इसलिए खेला जा रहा है ताकि लालू यादव पर मानसिक दबाव बनाया जा सके. आपको बता दे कि आयकर विभाग ने पिछले महीने यानि 16 मई को लालू यादव के कई ठिकानों पर छापेमारी की . पर उस छापेमारी में आयकर विभाग को क्या मिला ये बताने में विभाग नाकाम रहा. लालू यादव के ऊपर राजनीतिक बदले की भावना से भाजपा के इशारे पर की गई आयकर विभाग की छापेमारी से पूरे बिहार में राजद कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया. हालत ये थी कि डर के मारे भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने घरों से और अपनी गाड़ियों से भाजपा का झंडा उतार दिया था. इसके बाद नाराज राजद कार्यकर्ताओं ने पटना स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर जमकर नारेवाजी की.

Related posts

Share
Share