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मोदीराज: OBC-SC-ST के साथ अन्याय, अब मेडिकल कॉलेजों में 15 फीसदी सवर्णों को 50.5 फीसदी आरक्षण !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

पूरे विश्व में सामाजिक रूप से कमजोर और सुविधाओं से वंचित लोगों के साथ रंग, जाति, धर्म, बोली  के आधार पर हुए भेदभाव को देखते हुए समाज में हिस्सेदारी देने का चलन है. जिसे भारत में आरक्षण कहा जाता है,  लेकिन मानव सभ्यता का हिस्सेदारी नियम भारत के जातिवादियो के लिए आंख की किरकिरी बनना हुआ है.

जिन लोगों के पूर्वजों ने सदियों तक मानव सभ्यता की सबसे क्रूरतम जातीय व्यवस्था बनाकर लोगों का शोषण किया यहां की पिछड़ों की हितैषी होने का दंंभ भरने वाली सरकार उन्हीं लोगों को उनकी आबादी से लगभग 4 गुना आरक्षण देने की शुरूआत कर चुकी है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडीकल परीक्षा के नये सत्र से सवर्णों को 50.5 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी कर ली है.

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इसी शैक्षणिक सत्र से लागू होने वाला है ये नियम- 

इस बार फिर केन्द्र में भाजपा की सरकार बनते ही दलित और पिछड़ी जातियों को मिलने वाले आरक्षण को प्रकारान्तर से समाप्त करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. खबरों के मुताबिक अब 15 फीसदी सवर्ण जातियों को 50.5 फीसदी रिजर्वेशन देने का मोदी सरकार ने फैसला कर लिया है. इस फैसले को मोदी सरकार इसी शैक्षणिक सत्र से लागू भी करने वाली है. ये जानकारी इंडियन एक्सप्रेस समाचार पत्र से बात करते हुए स्वास्थ्य सचिव सीके मिश्रा ने दी है.

इसे भी पढ़ें..बीएचयू कुलपति प्रोफेसर त्रिपाठी के राज्य में खत्म हुए ओबीसी-एससी-एसटी के पद, सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस, एससी या एसटी समुदाय के अभ्यर्थी को जनरल सीट पर क्वालीफाई नहीं कराया जाएगा. इसका मतलब ये है कि इस बार ओबीसी को सिर्फ 27 फीसदी सीटें और एससी को 16 फीसदी सीटें औऱ एसटी को 7.5 फीसदी सीटें ही मिलेंगी. इसके अलावा आरक्षित कोटे का कोई भी विद्यार्थी कितने भी नम्बर लाए उसको जनरल सीट पर मेडिकल में एडमीशन नहीं दिया जाएगा. मतलब इस बार दलितों,पिछड़ों,आदिवासियों को कुल मिलाकर मिलने वाले 49.5 फीसदी आरक्षण के अलावा शेष 50.5 फीसदी आरक्षण 15 फीसदी सवर्णों को ही मिलेगा.

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470 मेडिकल कॉलेजों की 9775 सीटों पर लागू होना है ये नियम- 

केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव सी.के. मिश्रा ने बताया कि इस बार एमबीबीएस में मेडिकल कॉलेजों के सीटों पर आरक्षित श्रेणी के अभ्यार्थियों की काउंसिलिंग अलग औऱ अनारक्षित श्रेणी के अभ्यार्थियों की काउंसिलिंग अलग होगी. यहां तक कि सवर्ण अभ्यार्थियों से ज्यादा नम्बर लाने वाले आरक्षित समूह के किसी भी अभ्यार्थी को जनरल सीट पर एडमीशन नहीं दिया जाएगा. 470 मेडिकल कॉलेजों की 15 फीसदी ऑल इंडिया सीटों यानि 9775 सीटों पर ये नियम इसी सत्र से प्रभाव में लाया जा रहा है.

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