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मोदी की काशी: घायल गाय के इलाज के लिए नहीं आए ‘गौभक्त’, छात्र नेता नेहा यादव को देना पड़ा धरना

नई दिल्ली/ वाराणसी। नेशनल जनमत ब्यूरो।

एक तरफ मोदी सरकार गौरक्षा को लेकर तरह-तरह के दावे कर रही है औऱ दूसरी तरफ पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ही बीमार गाय के प्रति अधिकारी असंवेदनशील बने रहे। खास बात ये है कि इस गाय की दवा कराने कोई भी भगवाधारी नहीं पहुंचा। जबकि गौरक्षा के नाम पर गौगुंडे पूरे देश में आंतक मचाए हुए हैं और अफवाह फैलाकर मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं। लेकिन जहां असली गौभक्ति दिखाने का मौका होता है वहां कोई भगवाधारी गौभक्त सामने नहीं आता।

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शनिवार को एक गाय किसी वाहन की चपेट में आने से लंका स्थित पुलिस बूथ के सामने ही गिर गई। पहले दिन तो गाय की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। दूसरे दिन गाय की हालत बिगड़ी और वह निढाल होकर सड़क पर ही लेट गई तो लोगों को उसके घायल होने का एहसास हुआ। इसके बाद भी लोग आते-जाते रहे लेकिन ना तो वहां कोई भगवाधारी दिखा ना ही गौभक्त। इसके अलावा वाराणसी में गाय को माता बताने वाले भाजपाईयों की अच्छी खासी संख्या है लेकिन फिर भी किसी भापजा कार्यकर्ता को घायल गाय की मदद करने की इच्छा नहीं हुई।

इस बार गाय को बचाने के लिए पशुपालक समाज की एक बेटी ही आगे आई। बीएचयू की शोध छात्रा नेहा यादव की नजर गाय पर पड़ी तो उन्होंने अधिकारियों को सूचना दी। संडे की छुट्टी का हवाला देकर कोई नहीं आया। नेहा ने पुलिस को भी सूचना दी लेकिन देर रात तक कोई झांकने नहीं पहुंचा। इसके बाद पीएम, सीएम और जिला प्रशासन को ट्वीट भी किया।

इसी बीच बारिश शुरू हुई तो गाय की हालत और बिगड़ने की आशंका में पालीथीन और बोरे का इंतजाम किया गया। सुबह होते ही नेहा ने अधिकारियों की बेरुखी पर बीएचयू के साथियों विवेक, अमन, सुनील, मनीष, राहुल, निधि, सनी आदि के साथ लंका पर सड़क जाम कर धरना शुरू कर दिया। सावन का पहला सोमवार होने के नाते जाम की खबर मिलते ही अधिकारी हरकत में आ गए। जिला प्रशासन के निर्देश पर पहुंची टीम गाय को पशु चिकित्सालय ले आई।

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आज भी हजारों गाएं सड़कों पर प्लास्टिक बैग खाकर जिंदगी गुजार रही हैं। इन गायों की फिक्र न तो गाय के नाम पर राजनीति करने वाली किसी पार्टी को है और न ही गाय के नाम पर हिंसा फैलाने वाले गौभक्तों को है। हालत ये है कि पीेएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में गौभक्त पार्टी का एक भी नेता ऐसा नहीं निकला जिसने दुर्घटना में घायल गाय का इलाज कराने के बारे में सोचा तक हो। इससे साफ है कि गाय के नाम पर राजनीति तो लोग कर सकते हैं पर गाय की असली सेवा तो पशुपालक समाज के लोग ही कर रहे हैं।

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