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मोदीराज ! फिल्म में गाय, हिंदुत्व, गुजरात, हिंदू इंडिया शब्दों के इस्तेमाल पर सेंसर बोर्ड की रोक

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

सरकार जिस स्वभाव जिस परिपाटी की होती है उसे कर्मचारी भी उसी मानसिकता के साथ काम करने लगते हैं। जब सीबीआई, इन्कमटैक्स, ईडी जैसी सरकारी एजेंसियां सरकारी नियंत्रण से मुक्त नहीं हैं तो फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानि सीबीएफसी को सरकारी प्रभाव से मुक्त कैसे माना जा सकता है।

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन

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खबर है कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन की चर्चित क़िताब पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन’ में इस्तेमाल हुए कुछ शब्दों पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने आपत्ति जताते हुए कैंची चलाने का कहा है. कोलकाता के अर्थशास्त्री सुमन घोष द्वारा बनाई जा रही इस फिल्म में गुजरात, गाय, हिंदुत्व और हिंदू इंडिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिसपर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति ज़ाहिर की है.  सुमन घोष मियामी यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं.

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार घोष ने बोर्ड के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है. यह फिल्म इसी हफ्ते रिलीज़ होने वाली थी, पर अब इस विवाद के चलते फिल्म की रिलीज़ टल सकती है.

बोर्ड ने घोष से कहा कि अगर वो गुजरात, गाय, हिंदुत्व और हिंदू इंडिया जैसे शब्दों को फिल्म से निकाल दें या फिर उसे ‘बीप’ कर दें तो उन्हें U/A श्रेणी का प्रमाण-पत्र मिल जाएगा. हालांकि घोष ने बोर्ड की कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया है.

घोष ने टेलीग्राफ से बातचीत में कहा है, ‘सेंसर बोर्ड के इस रवैये से इस डाक्यूमेंट्री की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है, जिसमें अमर्त्य सेन देश में बढ़ती असहिष्णुता की बात कहते हैं. किसी लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना पर इस तरह की जांच-पड़ताल चौंकाने वाली है. हमारे समय के कुछ बेहद अच्छे चिंतकों में से एक के विचारों को ‘बीप’ या ‘म्यूट’ करने से मैं सहमत नहीं हूं.’

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द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन दरअसल अमर्त्य सेन की चर्चित क़िताब है, जिसपर घोष ने यह डाक्यूमेंट्री बनाई है, जिसका नाम भी उन्होंने इसी किताब के नाम पर रखा है. इस फिल्म को दो भागों में शूट किया गया है एक हिस्सा 2002 का है और बाकी हिस्सा 2017 का है.

फिल्म में गुजरात शब्द का इस्तेमाल दरअसल अमर्त्य सेन द्वारा कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में दिए एक भाषण में इस्तेमाल किया गया था, जिसे घोष ने अपनी फिल्म में भी दर्शाया है.

गाय शब्द का इस्तेमाल सेन ने एक बहस के दौरान इस्तेमाल किया है.

हिंदुत्व शब्द का इस्तेमाल सेन ने करते हुए कहा है कि वो भारत को हिंदुत्व के चश्मे से नहीं देखते, बल्कि उनकी भारत की कल्पना अलग है.

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