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मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों से आलू किसान बर्बाद, UP में सड़कों पर फेंक रहे आलू

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

पीएम मोदी की सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसानों की हालत और खराब हो गई है. हालत ये है कि किसान आत्यहत्या की दर कांग्रेसी राज से भी अधिक हो गई है. सारे देश से किसान आत्महत्या की खबरें आ रही हैं. यहां तक कि किसानों ने संसद भवन के पास नग्न होकर प्रदर्शन भी किया है. पर मोदी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है.

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महाराष्ट्र के प्याज के किसान की बर्बादी के बाद अब  यूपी के आलू किसान का भी बुरा हाल है. आपको बता दें कि महाराष्ट्र में किसानों ने इस बार प्याज की बंपर पैदावार की. पर बाजार में प्याज का उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों को अपनी प्याज सड़कों पर फेंककर प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा. हालत ये थी कि जब खुदरा बाजार में प्याज 20 रुपए किलो बिक रहा था तब किसानों को प्याज का मूल्य दो रूपए प्रतिकिलों भी नहीं मिल रहा था. सरकार द्वारा पोषित बिचौलिए ही किसानों की कमाई को खा रहे हैं.  हालत ये है कि किसानों की फसल की  लागत भी नहीं निकल पा रही है.

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अब यही हाल यूपी के आलू किसानों का भी हो रहा है. यूपी में आलू बेल्ट यानि पश्चिमी यूपी में आलू की बंपर पैदावार हुई है. पर आलू का उचित मूल्य न मिलने से किसानों में भारी निराशा है. आप को बता दें कि खुदरा बाजर में आलू आज भी आम उपभोक्ताओं को 15 रूपए प्रति किलों मिल रहा है. पर किसानों की आलू की कीमत 2 रूपए प्रति किलो भी नहीं मिल रही है.  सरकार द्वारा बिचौलियों को संरक्षण देने की नीति के चलते किसानों की मेहनत के बल पर उगाई सारी फसल का पैसा बिचौलिए मार ले जा रहे है. और किसान मजबूर होकर आत्महत्या करने पर विवश है.

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किसानों की तरफ से लाख मांग होने के बावजूद भी सरकार किसानों की आलू , प्याज जैसी फसलों के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज को बनबाने की व्यवस्था नहीं कर रही है. कोल्ड स्टोरेज की कमी के चलते ही किसान आज किसान अपनी फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक्टिव सामाजिक कार्यकर्ता भारत भूषण ने मोदी -योगी की सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जताते हुए फेसबुक पर लिखा कि – आलू की फसल का उचित दाम न मिलने से नाराज यूपी के मथुरा जिले की महावन तहसील के किसानों ने सैकड़ों बोरा अालू सड़कों पर फेंककर प्रदर्शन किया.

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आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने किसानों से वादा किया था कि किसानों को उनकी उपज की लागत का डेढ़ गुना मूल्य मिलेगा पर मोदी का ये वादा भी अभी तक तो जुमला ही साबित हुआ है. मोदी सरकार में किसानों की आत्महत्या की दर भी कांग्रेसी राज की तुलना में तेज हो गई.

 

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