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आखिर पीएम मोदी का तुगलकी फरमान साबित हुई नोटबंदी, औंधे मुंह गिरी अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

मोदी सरकार द्वार की गई नोटबंदी के दुष्परिणाम अब लोगों के सामने आ रहे हैं. नोटबंदी के चलते मार्केट में पैसे की कमी और माल के उत्पादन की कमी से लाखों लोगों का रोजगार छिन गया है. इसके अलावा देश की जीडीपी पर भी नकारात्मक असर हुआ है.

पीएम नरेंद्र मोदी स्पेन दौरे के बाद अब रूस में हैं। वहां पुतिन सरकार के सबसे बड़े कारोबारी आयोजन सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में वह भारत को सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बता कर दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों के मालिकों से अपने यहां निवेश करने की अपील करेंगे। स्पेन में वह ऐसा कर चुके हैं लेकिन क्या वह रूस में ऐसा कर पाएंगे। क्योंकि मनमर्जी से किए गए एक फैसले के आ रहे भयानक नतीजे भारतीय इकोनॉमी को सबसे चमकदार साबित करने के उनके दावे की पोल खोल देंगे।

पीएम मोदी ने किए थे बड़े-बड़े दावे-

नोटबंदी लागू करते वक्त मोदी सरकार ने बढ़-चढ़ कर यह दावा किया था कि इससे इकोनॉमी निखरेगी। लेकिन बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों में जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी दर घट कर 6.1 फीसदी पर पहुंच गई है और 2016-17 की विकास दर तीन साल के सबसे निचले स्तर 7.1 फीसदी पर पहुंच गई है। अर्थशास्त्रियों ने इसे नोट बैन का असर करार दिया है। इससे भारत को सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बता कर विदेश में वाहवाही लूटने वाले मोदी का उत्साह जरूर ठंडा पड़ गया होगा।

विकास दर तीन साल में सबसे निचले स्तर पर-

ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर 6.1 फीसदी रही, जबकि इस दौरान चीन की इकोनॉमी की रफ्तार 6.7 फीसदी पर पहुंच गई। दिग्गज अर्थशास्त्रियों ने इसे नोटबंदी असर करार दिया। रेटिंग एजेंसी इक्रा की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट अदिति नैयर ने कहा कि इकोनॉमी में स्लोडाउन का सिलसिला तो पहले ही शुरू हो गया था लेकिन नोटबंदी से इसकी रफ्तार और गिर गई। सरकार के चीफ स्टेटिस्टिसियन टीसीए अनंत ने भी माना है कि नोटबंदी स्लोडाउन की एक वजह हो सकती है।

मोदी सरकार के दावों को सिर्फ जीडीपी ग्रोथ में गिरावट ही आईना नहीं दिखा रही है बल्कि ‘इज ऑफ डुइंग बिजनेस’ के मामले में भी इसका प्रदर्शन ढीला पड़ गया है। मोदी सरकार दुनिया भर के निवेशकों से भारत में निवेश करने को कह रही है लेकिन देश में कारोबार करना अब भी बेहद मुश्किल है। कारोबार करने में सहूलियत बढ़ाने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी जिस टास्कफोर्स की दी गई थी कि वह 2018 में भी इस मोर्चे पर सुधार के प्रति निराश है। उसे इसमें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं दिखती।

इज ऑफ डुइंग बिजनेस की वर्ल्ड बैंक रैंकिंग में भारत 190 में से 130वें स्थान पर है। 2016-17 में यह चार रैंक नीचे खिसक गया था। उसकी पोजीशन 151 से नीचे गिर कर 155 पर आ गई थी।

बृहस्पतिवार को सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में जब पीएम मोदी दुनिया भर के निवेशकों के सामने भारत में आर्थिक सुधारों का हवाला देकर निवेश करने की अपील करेंगे तो इकोनॉमी के ये खराब आंकड़े उनका मुंह चिढ़ाएंगे।

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