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RSS का मजदूर संगठन मोदी सरकार की रोजगार वादाखिलाफी के खिलाफ करेगा संसद का घेराव

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

71वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिना-गिनाकर थकने का नाम नहीं ले रहे थे लेकिन देश के मौजूदा हालात उससे एकदम उलट हैं। एक तरफ तो पीएम मोदी लाल किले से नोटबंदी के फर्जी आंकड़े गिना रहे थे, दूसरी तरफ इस नोटबंदी की वजह से देश में बेरोजगारी का संकट बढ़ा है।

भारतीय जनता पार्टी को जिस आरएसएस द्वारा संचालित पार्टी कहते हैं उसी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मजदूर संगठन बीएमएस यानी भारतीय मजदूर संगठन और 10 केंद्रीय व्यापार संघों ने बेरोजगारी और समान काम के बदले समान वेतन को लेकर संसद घेरने की तैयारी कर ली है। सरकार के ख़िलाफ़ ये घरना प्रदर्शन संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान किया जाएगा।

बीएमएस के राष्ट्रीय महासचिव ब्रजेश उपाध्याय के मुताबिक, “हम 17 नवंबर को दिल्ली कूच करेंगे, हमारी मांग समान काम काम कर रहे कामगारों को समान वेतन दिए जाने की मांग को लागू कराना है, इसके अलावा सार्वजनिक इकाईयों में काम कर रहे मजदूरों को प्रर्याप्त सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराई जाए।”

बीते 8 अगस्त को केंद्रीय व्यापार संघ के 10 संगठनों ने 9 से 11 नवंबर तक संसद भवन के बाहर देश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी को लेकर धरना प्रदर्शन का ऐलान किया था। यह फैसला मजदूर संघों के राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में लिया गया।

इस सम्मेलन में आईएनटीयूसी, एआईयूटीसी, एचएमएस सीआईटीयू, आआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एसईडब्ल्यूए एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी, और एलपीएफ सहित बैंकिंग फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम और कंस्ट्रक्शन के अलावा कई संगठनों ने शिरकत की।

भारतीय मजदूर संगठन को संघों के राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया था। इसलिए बीएमसी अपना प्रदर्शन इन संगठनों से अलग करेगा। बीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव का कहना है कि, ” केंद्र और राज्य सरकारें कॉन्ट्रैक्ट लेबर रेग्युलेशन का मखौल बना रही हैं, जबकि समान काम करने वालों को समान वेतन दिए जाने का प्रावधान है।”

आपको बता दें कि 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद भारतीय मजदूर संगठन और केंद्रीय व्यापार संघ में दूरियां बढ़ गई हैं। जिसके चलते केंद्रीय व्यापार संघ ने कार्यकर्ताओं के राष्ट्रीय सम्मेलन में बीएमएस को आमंत्रित नहीं किया था।

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