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शिवराज सरकार ने सदन में बताया कि BJP शासन के 13 सालों में 15129 किसानों ने की आत्महत्या

भोपाल/नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों और उसके बाद आंदोलन करने वाले किसानों पर हुए पुलिसिया कहर से किसान आक्रोशित हैं। इसी बीच किसान हितैषी होने का दावा करने वाली शिवराज सरकार को सदन में अपनी सरकार के रहते हुए किसान आत्महत्या के आंकड़ें सार्वजनिक करने पड़े जो चौंकाने वाले हैं।

गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह का जवाब- 

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन शिवराज सरकार ने सदन में बताया कि राज्य में पिछले 13 साल में 15,129 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की है.

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मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2004 से वर्ष 2016 के दौरान प्रदेश में 15,129 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने ये आंकडे़ दिए हैं.

गौरतलब है कि दिसंबर 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्ता में आई और तब से लेकर अब तक प्रदेश में भाजपा नीत सरकार है.

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बता दें कि बीते जून महीने में मध्य प्रदेश किसान आंदोलन का गढ़ बना हुआ था. किसान क़र्ज़माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे तमाम मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे.

इस आंदोलन का केंद्र राज्य का मंदसौर ज़िला बना हुआ था. छह जून को आंदोलन के दौरान ज़िले में पुलिस फायरिंग हुई जिसमें छह किसानों की जान चली गई थी.

इस घटना के बाद किसानों का आंदोलन हिंसक हो उठा था. इस आंदोलन के दौरान किसानों की आत्महत्या लगातार जारी रही.

मध्य प्रदेश में जून से अब तक 60 से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. आत्महत्या के पीछे प्रमुख कारण क़र्ज़, फसल खराब होना और खेती में नुकसान उठाना आदि रहे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा और द वायर से लिया गया इनपुट)

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