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कब तक सीवर टैंक में जान गंवाते रहेंगे मजदूर, अब म.प्र. के ‘रामराज्य’ में 4 सफाईकर्मियों की मौत

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

देश से जातिवाद खत्म होने की बात करने वालों देख लो इस देश का जातिवादी चरित्र आज भी देश की तरक्की में बाधक बना हुआ है। तुम सब्जबाग दिखाने वाले जादूगरों के करिश्मे में बंधकर देश को तरक्की की राह पर जाने का सपना देख सकते हो लेकिन इस सामाजिक हकीकत से कैसे छुटकारा पाओगे ?

कुछ ही दिन पहले सीवर की सफाई के दौरान एक साल में ही 22327 भारतीय नागरिकों के मारे जाने की खबर आई थी। अब मध्य प्रदेश के देवास से खबर आ रही है कि वहां 4 सफाईकर्मियों की मौत सेप्टिंक टैंक साफ करते हुए मौत हो गई।

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मध्य प्रदेश के देवास जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर पिपलरावा थाना इलाके के गांव बरदु में सेप्टिक टैंक की सफाई करने के लिए घुसे चार सफाईकर्मियों की बीते सोमवार मौत हो गई.

पिपलरावा थाना प्रभारी बीएल मीणा ने बताया कि मृतकों की पहचान विजय सिहोते (20), ईर सिहोते (35), दिनेश गोयल (35) और रिंकू गोयल (16) के रूप में हुई है. ये सभी देवास के रहने वाले थे.

उन्होंने कहा कि गांव बरदु में सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए देवास से पांच सफाईकर्मियों की टीम बुलवाई गई थी. यह सेप्टिक टैंक बरदु गांव के रहने वाले कमल सिंह सेंधव के घर के सीवेज का था और उन्होंने इन पांचों सफाईकर्मियों को 8,000 रुपये में इसे साफ करने का ठेका दिया था.

इस बीच, रविवार को आधी रात के बाद टीम का एक सदस्य इस सेप्टिक टैंक से निकाली गई गंदगी को फेंकने के लिए टैंकर लेकर बाहर गया और जब वह वापस लौटा तो उसने देखा कि उसके चारों साथी सेप्टिक टैंक में मृत पड़े हैं.

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उन्होंने कहा कि मौके पर पहुंची पुलिस ने जेसीबी मशीन की सहायता से टैंक तोड़कर चारों के शव बाहर निकाले और पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया.

मीणा ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है.

पिछले महीने दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी इलाके में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम घुटने से चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी. पुलिस के अनुसार पांच लोग इलाके में एक घर में टैंक के सफाई करने के लिए नीचे उतरे थे लेकिन लंबे समय तक बाहर नहीं निकले.

पांचों कर्मचारियों को करीब घंटे भर के अभियान के बाद बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया था. इलाज के दौरान इनमें से चार लोगों की मौत हो गई थी.

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि-

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सीवर में हर साल बीस हजार से ज्यादा मौत वाला विश्वगुरु?

आप को क्या लगता है कि दुनिया को पता नहीं होगा कि भारत में यह सब होता है? मतलब कि हम कहेंगे कि हम विश्वगुरु हैं, और वे मान लेंगे?यह सब विदेश में छपता है. नोएडा में नौकरानियों का विद्रोह न्यूयॉर्क टाइम्स में विस्तार से छपा. जितना भारतीय मीडिया में आया, उससे कहीं ज्यादा. ऐसी घटनाओं की वजह से पूुरी दुनिया में भारत का मजाक उड़ाया जाता है, या फिर लोग दया की दृष्टि से देखते हैं. हमारे सारे अच्छे-बुरे कर्मों की जानकारी दुनिया को है.

कश्मीर से ज्यादा खतरा देश के अपने सीवर में है- 

कश्मीर में हमारी लगभग एक तिहाई सेना तैनात है. सरकारी आंकड़ा है कि 2016 में वहां 60 सुरक्षाकर्मी देश की रक्षा करते हुए मारे गए, जो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा है. कश्मीर एक खतरनाक जगह है. लेकिन इसी भारत में एक जगह कश्मीर से भी खतरनाक है.

वह जगह है सीवर. इनकी सफाई करते हुए एक साल में 22,327 भारतीय नागरिक मारे गए .(स्रोत- एस. आनंद का आलेख, द हिंदू)

कश्मीर पोस्टिंग की तुलना में सीवर में जाने में जान का जोखिम कई गुना ज्यादा है. सीवर से आप जिंदा लौटकर न आएं, इसकी आशंका बहुत ज्यादा है. लेकिन अगर दिल्ली जैसे किसी शहर में सीवर साफ न हों, तो हफ्ते भर में हैजा और तमाम बीमारियों से हजारों लोग मर जाएंगे,
इस मायने में यह काम किसी भी अन्य काम से ज्यादा नहीं तो कम महत्वपूर्ण भी नहीं है.

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही कि सीवर में इंसान ना भेजा जाए- 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी हालत में किसी व्यक्ति को सीवर में न भेजा जाए. इसके लिए भारतीय संसद ने मैनुअल स्कैंवेंजर एंड रिहैबिलिटेशन एक्ट 2013 भी पास किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीवर साफ करने के दौरान हुई मौत का मुआवजा 10 लाख फिक्स किया है.
लेकिन हालात बदले नहीं है.

दुनिया में भारत की बदनामी की एक बड़ी वजह सीवर में होने वाली मौत है. इसे दुनिया कितनी गंभीरता से लेती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि इस दिशा में काम करने वाले मित्र बेजवाड़ा विल्सन को मैगसेसे अवार्ड मिला है.

इसके लिए कुछ उपाय किए जाने चाहिए.

1. सीवर साफ करने की न्यूनतम मजदूरी 50,000 रुपए प्रतिमाह तय हो.

2. सीवर में मरने वाले हर मजदूर को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा मिले और परिवार को शहीदों के परिवारों वाली सुविधाएं मिले.

3. इस काम का तत्काल मशीनीकरण हो. अर्बन रिन्यूअल मिशन का बाकी सारा काम रोककर सारा पैसा सीवर सफाई के मशीनीकरण पर लगाया जाए. पूरी पश्चिमी दुनिया में यह हो चुका है.

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और क्या किया जा सकता है, कृपया बताइए.
इस मामले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की सख्त जरूरत है.

 

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