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ये है मोदी नीति: देश में मिटा रहे मुगलों के निशान, विदेश में मुगल बादशाह की मजार पर सम्मान के फूल

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

पीएम के बदलते बयानों से देश में एक आम धारणा बन चुकी है कि मौके की नज़ाकत को भांपकर पीएम अपना रुख बदलने में माहिर हैं। पाकिस्तान को उसी की भाषा में समझाने की बात करते-करते अचानक से नवाज शरीफ से मिलने पाकिस्तान पहुंच जाना, खाड़ी देशों में जाना तो मुस्लिमों की पोशाक पहन लेना। प्रधानमंत्री कोई कूटनीतिक मौका नहीं छोड़ना चाहते।

प्रधानमंत्री म्यांमार यात्रा पर पहुंचे तो उनका ये रुप एकबार फिर देखने को मिला है। म्यांमार दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रंगून में मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की मजार पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के इस कदम पर चुटकी ली है।

दोहरे चरित्र पर उठे सवाल-  

जहां एक तरफ बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ खुले मंचों से मुगल शासकों के प्रति घृणा जाहिर करते हैं और मुगलों शासकों के नाम भारत के इतिहास से मिटाने पर आमादा हैं। वहीं पीएम मोदी का बहादुर शाह जफर की मजार पर जाकर फूल चढ़ाना चौकाने वाला कदम है।

पीएम मोदी का बहादुर शाह जफर की मजार पर जाकर इत्र छिड़कर श्रद्धा सुमन अर्पित करना लोगों के मन में कई अनसुलझे सवाल उठाता है? क्या ये वही मोदी हैं जिनकी बीजेपी सरकारें पाठ्य पुस्तकों से मुगलों से जुड़े चैप्टर गायब करा देती हैं। मुगलो के नाम पर बनीं सड़कों का नाम बदल देती है।

प्रधानमंत्री इस बात को भली भांति जानते होंगे कि बहादुर शाह जफर मुगल थे। क्या प्रधानमंत्री 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक को श्रद्धाजंलि देने गए थे या उनकी मंशा कुछ और संदेश देने की थी। ये सवाल अभी भविष्य के गर्भ में।

सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या पीएम मोदी के बहादुर शाह जफर की मजार पर पहुंचने से बीजेपी और संघ के लोगों में यह संदेश जाएगा कि वे अपना नजरिया बदलें। इस बारे में लोगों की राय है कि मोदी भले ही बहादुर शाह जफर के दरबार में हाजिरी लगा आए हों लेकिन RSS और बीजेपी के पूर्वाग्रह दूर नहीं कर सकते।

बीजेपी सरकार ने हटाया अकबर महान का चैप्टर- 

आरएसएस और बीजेपी के लोगों का मुगलों के प्रति क्या रवैया रहता है? इसकी बानगी राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार में देखने को मिल चुका है। वसुंधरा के सत्ता में आते ही किताबों से अकबर महान के चैप्टर को हटा दिया गया था।

बीजेपी सरकार ने दलील दी अकबर महान क्यों हैं, महाराणा प्रताप महान क्यों नहीं हैं? जिसके बाद इतिहास बदल गया। नए इतिहास के तहत हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप जीते और अकबर हार गया।

राजस्थान के बाद महाराष्ट्र में भी किताबों से मुगलों से संबधित चैप्टर को हटाया गया। वहीं दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम रख दिया गया। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में मौजूद मुगल गार्डन का नाम बदलने की भी बात कही जा चुकी है।

आपको बता दें कि पीएम मोदी वाहवाही लूटने के लिए किसी भी मौके को हाथ से नहीं जाने देते। प्रधानमंत्री जब खाड़ी देशों की यात्रा पर गए थे तो उन्होंने वहां की पोशाक पहनीं थी।

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